पात्र
पात्र कथाओं और नाटकों में शामिल व्यक्तियों, किरदारों, या चरित्रों को कहा जाता है। कहानियां उन्हीं के माध्यम से आगे बढ़ती हैं। कथानक और कथावस्तु इन्हीं पात्रों के क्रियाकलापों से निर्मित होती है, जो इनके इर्द-गिर्द होने वाली या उनके साथ होने वाली घटनाओं से प्रभावित हुआ करती हैं। रचनाकार इन पात्रों के बारे में प्रत्यक्ष सूचना देते हैं या फिर पात्रों के कथन और कार्यों का वर्णन इस ढंग से किया जाता है कि उनका चरित्र हमारे सामने स्पष्ट हो जाता है। कथानकों में पात्र कोई भी हो सकता है, मनुष्य भी और अन्य पशु-पक्षी , देव-दानव, ग्रह-नक्षत्र, पहाड़, नदी, आदि कुछ भी। यह इस बात पर निर्भर करता है कि रचनाकार अपनी कथा, काव्य, नाटक, उपन्यास आदि के लिए कैसे पात्र का चयन करता है। पात्रों के प्रकार उनके चरित्र के आधार पर निर्धारित होता है। नायक, खलनायक, विदूषक, और अन्य सभी किरदारों का पात्र ही कहा जाता है।