बच्चों के पोषण में डिजिटलीकरण न बने बाधा
बच्चों के भोजन और पोषण के अधिकार के लिए जरूरी हैं बहुआयामी प्रयास
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2026-10-05 12:15 UTC
हाल के वर्षों में लगभग हर क्षेत्र में डिजिटल प्रक्रिया तेजी से बढ़ी है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लक्षित समूहों के लिए चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में भी तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इससे योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बेहतर हो सकती है, लेकिन तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण पात्र व्यक्ति योजना से वंचित रह जाए, तो यह चिंता का विषय है। बच्चों के भोजन और पोषण से जुड़ी योजनाओं में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि देश में बाल कुपोषण अब भी गंभीर समस्या बना हुआ है। ऐसे में आधार, ई-केवाईसी, फेस रिकग्निशन या किसी ऐप की तकनीकी प्रक्रिया के कारण किसी बच्चे का भोजन और पोषण नहीं रुकना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल योजनाओं को बेहतर बनाने और उनकी निगरानी के लिए हो सकता है, लेकिन गरीब, प्रवासी, आदिवासी और दूसरे वंचित परिवारों के बच्चों के लिए ऐसी शर्तें भोजन और पोषण सेवाओं तक पहुंच को और कठिन बना सकती हैं।