भूचरी
भारतीय योगशास्त्रीय परम्परा में भूचरी एक मुद्रा है। इसका निवास नाक में माना जाता है। भूचरी के दावारा साधक प्राण और अपान वायु दोनों को नासिका मध्य में एकत्रित करता है। यह गोरखबानी की अष्टमुद्राओं में से एक है। कहा गया है -नासिका मध्ये भूचरी मुद्रा गंध बिगंध ले उतपनी।
गंध बिगंध समोकृत्वा, मुद्रा तौ भई भूचरी।