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मकड़ी

मकड़ी एक जीव है जिसके आठ पैर होते हैं। मकड़ी एक मांसाहरी जीव है और उसका भोजन छोटे-छेटे कीट होते हैं। उन कीटों को वह स्वयं द्वारा बुने हुए जाल में फंसाती है। वह जो जाल बुनती है, उसी में निवास करती है, और अन्त में उसी मकड़जाल में फंसकर मर जाती है। मकड़ी के शरीर के दो भाग होते हैं - शिरोवक्ष और उदर। इसके पेट में एक विशेष ग्रंथि होती है जिससे निकले चिपचिपे धागे से वह मजबूत जाल बनाती है। मकड़ियों की 51,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और यह अंटार्कटिका को छोड़कर दुनिया के हर कोने में मौजूद हैं।

भारतीय संतों ने मन को मकड़ी कहा है क्योंकि यह मकड़ी की भांति ही जगत का जंजाल बुन लेता है और उसी में अन्ततः फंस जाता है। यही मन की प्रवृत्ति बतायी गयी है जिससे मुक्ति पाने की सलाह दी गयी है। संतों ने शुद्ध मन से ही परम पद की प्राप्ति की बात कही है। गोरख बानी में कहा गया -

अवधू यो मन जात है याही ते सब जाणि,
मन मकड़ी का ताग ज्यूं उलटि अपूगै आणि।

Page last modified on Saturday September 5, 2026 14:36:10 UTC : Initial version