मणि
मणि एक प्रकार की वस्तु है जिसे आभूषण की तरह पहने जाने का उल्लेख प्राचीन साहित्य में मिलता है। कहीं-कहीं पर इसे प्रकाशमान वस्तु कहा गया है और माना गया कि मणि इसे धारण करने वाले की मनोकामना पूरी करता है। अथर्ववेद में मणियों को सुख, समृद्धि, और रक्षा आदि का साधन बताया गया है। उसमें अमीवर्त नामक मणि का उल्लेख मिलता है, जिसे धारण करने से इन्द्र दिग्विजयी हुए ऐसा कहा गया। मणि को वैभवदाता मान गया है।परन्तु मणि क्या है, इसकी शक्ति क्या है, और यह कहां से प्राप्त होता है इसपर काफी मतभेद हैं। कहानियों में बताया गया है कि सर्प या नाग के पास मणि होता है, और उनसे प्राप्त मणि को सर्पमणि या नागमणि कहा जाता है। परन्तु वैज्ञानिक रूप से इसे अभी तक सिद्ध नहीं किया जा सका है। हाथी के सिर में गजमणि, मत्स्य में मुख में मत्स्य मणि, तथा कदली में कदली मणि पाये जाने की कथाएं हैं, परन्तु इनकी भी वास्तविकता अभी सिद्ध नहीं है।
वैसे सामान्य रूप से कुछ कीमती पत्थरों को भी मणि की संज्ञा दी गयी है, जैसे रक्तमणि। प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले कुछ मणियों के नाम हैं - स्यमंतक मणि, कौस्तुभ मणि और पारस मणि।
कहा जाता है कि मणि की महत्ता उसके भौतिक आकार प्रकार और चमक में नहीं, बल्कि उसकी शक्ति में है।