मधुमती भूमिका
मधुमती भूमिका भारतीय योगदर्शन में साधना की एक अवस्था या भूमि है। यह योगसूत्र में वर्णित चार प्रकार की योग अवस्थाओं में दूसरी है। इसके अनुसार मधुमती भूमिका ब्रह्मविद की सत्त्वशुद्धि को देखकर देवगण उस स्थान के योग्य मनोरम भोग दिखलाते हैं। इसके बाद योग की दो और स्थितियां हैं - प्रज्ञाज्योति तथा अतिकान्त-भावनीय।इसके आधार पर ही केशव प्रसाद मिश्र ने मधुमती भूमिका को चित्त की वह विशेष अवस्था माना है जिसमें वितर्क की सत्ता नहीं रह जाती, और उस अवस्था में सम्बंध और सम्बंधी विलीन हो जाते हैं तथा केवल वस्तुमात्र का आभास मिलता रहता है, और सभी प्रकार की वस्तुएं हमारे केवल सुखात्मक भावों का आलम्बन बनकर उपस्थित होती हैं। उन्होंने कालिदास के मेघदूत में रससिद्धांत की व्याख्या करते हुए ऐसा कहा।