मालादीपक
मालादीपक एक श्रृंखलामूलक अर्थालंकार है। इसमें पूर्वोक्त वस्तुओं से उत्तरोत्तर उल्लिखित वस्तुओं का सम्बंध स्थापित होता है। इसकी रचना दीपक और एकावाली अलंकारों के संयोग से की जाती है।मालादीपक का उदाहरण भिखारीदास के इस कविता में देखें -
जग की रुचि ब्रजवास, ब्रज की रूचि ब्रजचन्द हरि।
हरि रुचि बंसी दास, बंसी रुचि मान बांधिबो।
यहां ध्यान देने की बात यह है कि प्रत्येक पूर्वोक्त वस्तु बाद के उल्लिखित वस्तु का कराण है।
यदि प्रत्येक पूर्वोक्त वस्तु का बाद के उल्लिखित वस्तु से विशेषण-विशेष्य सम्बंध होता तो वह कारणमाला अलंकार हो जाता।