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मेघालय

मेघालय

मेघालय का गठन असम के अंतर्गत 2 अप्रैल, 1970 को एक स्वायत्तशासी राज्य के रूप में किया गया। एक पूर्ण राज्य के रूप में मेघालय 21 जनवरी, 1972 को अस्तित्व में आया। इसकी उत्तरी और पूर्वी सीमाएं असम से और दक्षिणी तथा पश्चिमी सीमाएं बांग्लादेश से मिलती हैं। मेघालय, जिसका शाब्दिक अर्थ है—मेघों का आलय यानी बादलों का घर, मूलतः एक पहाड़ी राज्य है। यहां मुख्यतः खासी, जयंतिया और गारो आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। मेघालय के मध्य और पूर्वी भाग, जिसमें खासी और जयंतिया पहाड़ियां हैं, एक विशाल पठारी क्षेत्र हैं। इस इलाके में विस्तृत मैदान, पहाड़ियां और नदी-घाटियां हैं। इस पठार के दक्षिणी इलाके में गहरे खड्ड तथा खड़ी ढलानें हैं और पहा़ड़ी की तलहटी पर समतल भूमि की संकरी पट्टी बंग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ लगी है।
कृषि

मेघालय बुनियादी तौर पर कृषि प्रधान राज्य है। यहां की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या आजीविका के लिए मुख्य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर है। यहां की मिट्टी और जलवायु बागवानी के अनुकूल होने के कारण बागवानी के विकास की यहां काफी क्षमता है। शीतोष्ण, उपोष्ण और उष्ण कटिबंधीय फलों और सब्जियों के उत्पादन की भी यहां अच्छी संभावनाएं हैं।

चावल और मक्का यहां की मुख्य फसलें हैं। इनके अतिरिक्त मेघालय अपने संतरे (खासी मेंडेरियन), अन्नास, केला, कटहल और आलूबुखारा, नाशपाती तथा आडू जैसे शीतोष्ण फलों के लिए प्रसिद्ध है। नकदी फसलों तथा प्रचलित व परंपरागत ढंग से उगाई जाने वाली फसलों में आलू, हल्दी, अदरक, काली मिर्च, सुपारी, पान, टैपियोका, छोटे रेशे वाली कपास, पटसन और मेस्टा, सरसों और तोरिया शामिल हैं। इस समय गैर-परंपरागत फसलों जैसे तिलहनों (मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी), काजू, स्ट्रॉबरी, चाय और कॉपी, मशरूम, जड़ी-बूटियों, आर्किड और व्यावसायिक दृष्टि से उगाए जाने वाले फूलों की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भूतलीय जल और भूजल से राज्य की सिंचाई क्षमता लगभग 2.13 लाख हेक्टेयर है और अब तक 55,182 हेक्टेयर क्षमता जुटाई जा चुकी है।
उद्योग

मेघालय औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड राज्य की वित्तीय एवं औद्योगिक विकास संस्था है, जो स्थानीय उद्यमियों को वित्तीय सहयता प्रदान करती है। जिला औद्योगिक केंद्र लघु, ग्रामीण, बहुत छोटे स्तर के तथा कुटीर उद्योगों तथा संवर्धन के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। लोहे तथा इस्पात सामग्री, सीमेंट तथा अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन के लिए अनेक उपक्रमों की स्थापना की गई है।

त्‍योहार

पांच दिन तक मनाया जाने वाला ‘का पांबलांग-नोंगक्रेम’ खासियों का एक प्रमुख धार्मिक त्यौहार है। यह नोंगक्रेम नृत्य के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह खासियों का एक प्रमुख धार्मिक त्यौहार है। यह हर साल शिलांग से लगभग 11 कि.मी. दूर स्मित नाम के गांव में मनाया जाता है। शाद मिनसीम खासियों का एक अन्य महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हर वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्ताह में शिलांग में मनाया जाता है। बेहदीनखलम जयंतिया आदिवासियों का सबसे महत्वपूर्ण तथा खुशनुमा त्योहार है। यह आमतौर पर जुलाई के महीने में जयंतिया पहाड़ियों के जोवई कस्बे में मनाया जाता है। गारो आदिवासी अपने देवता सलजोंग (सूर्य देवता) के सम्मान में अक्टूबर-नवंबर में वांगाला त्यौहार मनाते हैं। यह त्यौहार एक हफ्ते तक चलता है।

परिवहन

सड़कें: मेघालय से छह राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं। राज्य में लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार की गई पक्की और कच्ची सड़कों की कुल लंबाई 7,977.98 किलोमीटर है।

उड्डयन: राज्‍य में एक मात्र हवाई अड्डा उमरोई में हैं, जो शिलांग से 35 किलोमीटर दूर हैं।

पर्यटन स्‍थल

मेघालय में जगह-जगह ऐसे खूबसूरत पर्यटन स्थल हैं, जहां प्रकृति अपने भव्य रूप में दिखाई देती है। राजधानी शिलांग में कई रमणीक स्थान हैं। इनमें वार्ड लेक, लेडी हैदरी पार्क, पोलो ग्राउंड, मिनी चिड़ियाघर, एलीफेंट जलप्रपात, और शिलांग चोटी प्रमुख हैं। शिलांग चोटी से पूरे शहर का नजारा दिखाई देता है। यहां का गोल्फ कोर्स देश के बेहतरीन गोल्फ कोर्सों में से एक है।

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