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वैदिक सभ्‍यता

वैदिक सभ्‍यता

प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्‍यता सबसे प्रारंभिक सभ्‍यता है। इसका नामकरण भारत के प्रारम्भिक साहित्‍य वेदों के नाम पर किया गया है। वैदिक सभ्‍यता सरस्‍वती नदी के किनारे के क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब और हरियाणा राज्‍य आते हैं, में विकसित हुई।

संस्कृत में आर्य का अर्थ है सभ्य। वेद सभ्य लोगों के ज्ञान का भंडार है। विद् का अर्थ जानना होता है। अतः वेद उन ग्रंथों के नाम हैं जिनमें ज्ञान भरा है। भ्रम वश इन ग्रंथों को संकीर्ण दायरे में परिभाषित किया गया तथा बताया गया कि ये आर्यों (यहां अर्थ एक कल्पित प्रजाति से है जो कभी थी ही नहीं) के आदि ग्रंथ हैं। इसी कल्पित आर्य प्रजाति के आधार पर भारत का इतिहास रचा गया। आज तो हिन्‍दुओं को ही आर्य कल्पित प्रजाति का पर्यायवाची माना जाता है। वैदिक सभ्यता वास्तव में वेदों से निकले धार्मिक और आध्‍यात्मिक विचारों का दूसरा नाम है।

ईसा पूर्व 2000 के आसपास से वैदिक काल का प्रारम्भ होता है जैसा कि अधिकांश इतिहासकार मानते हैं।

वैदिक सभ्यता के लोग संस्‍कृत भाषा का उपयोग करते थे। यह सभ्यता ईसा पूर्व सातवीं शताब्दी तक मानी जाती है।

इस अवधि के दो महान ग्रंथ रामायण और महाभारत थे।

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वैधर्म्य, वैराग्य, व्याख्यात्मक आलोचना, व्यायाम, शकुनि का भाई उलूक, शब्द

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