लेकिन भले ही अमेरिकी और इज़राइली अधिकारी रणनीतिगत मकसद बता रहे हों — जैसे मिसाइल शक्ति को कमज़ोर करना, नौसैनिक क्षमता को कुंद करना, तथा न्यूक्लियर हमले को रोकना — लेकिन बड़ा रणनीतिगत लक्ष्य अभी भी साफ़ नहीं है। वहां से निकलने की कोई योजना नहीं बतायी गयी है, कोई तय राजनीतिक समझौता नहीं किया गया है, और बातचीत के लिए कोई साफ़ रास्ता नहीं है। इसके बजाय, लड़ाई बढ़ती जा रही है — सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर।
वॉशिंगटन में, अधिकारियों ने एक अभियान के बारे में बताया है जो खाड़ी में ईरान की कम दूरी तक जमीन से जमीन तक मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल अवसंरचना और नौसैनिक क्षमता को खत्म करने पर केन्द्रित है। सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो ने इस सैन्य कार्रवाई को अमेरीकी सम्पदा और ठिकानों पर भावी ईरानी हमले, जैसा कि गुप्तचर अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया था, से समय पूर्व ही बचाव करने की कोशिश बताया। फिर भी इस युद्ध की समय सीमा पक्की नहीं है।
ईरान ने पूरे इलाके में जवाबी हमला किया है, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने और उसकी खाड़ी स्थित अवसंरचनाओं को लक्षित किया गया है। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड बड़े जोरदार तरीके से हवाई हमले की कार्रवाई जारी रखे हुए है। इज़राइली हमले ईरानी इलाके से आगे बढ़कर लेबनान में अप्रत्यक्ष ठिकानों तक फैल गए हैं। इस युद्ध की समस्या के समाधान के बजाय इसके बढ़ने का खतरा ही बढ़ता दिख रहा है।
इराक युद्ध के शुरुआती हफ्तों के उलट, जहां वॉशिंगटन ने सत्ता परिवर्तन को एक मुख्य मकसद बताया था, मौजूदा लड़ाई में कोई साफ तौर पर तय राजनीतिक माहौल नहीं है। क्या असली मकसद ईरानी राज को गिराना है? क्या उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है? क्या उसकी प्रतिरोधी शक्ति को फिर से निर्धारित करना है? ऐसे सवालों पर अमेरिकी प्रशासन के अधिकारी अलग-अलग बातों पर ज़ोर दे रहे हैं। इस विभ्रम की स्थिति ने बाजार और सहयोगी देशों में चिंता बढ़ा दी है।
ऊर्जा बाजार ने तुरंत प्रतिक्रया दी है। ब्रेंट क्रूड तेज़ी से बढ़ा, जब होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग में रुकावट की खबरें आईं। ध्यान रहे कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक पतला समुद्री गलियारा है जिससे दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। मिसाइल के खतरों और ड्रोन गतिविधियों के बढ़ने के बीच टैंकरों ने कथित तौर पर परिवहन धीमा कर दिया है या रोक दिया है। कई शिपिंग कंपनियां यात्राओं का फिर से आकलन कर रही हैं; तथा इंश्योरेंस कंपनियां रिस्क प्रीमियम का फिर से हिसाब लगा रही हैं।
जापान ने पहले ही जहाज मालिकों को फारस की खाड़ी से बचने की सलाह दी है। यूरोपीय और एशियाई आयातक दूसरी आपूर्ति मार्ग पाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। एक गैर-आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, होर्मुज से गुजरने में असमर्थ 200 जहाज फंसे हुए हैं, क्योंकि या तो यह बंद है या वहां जाना बहुत जोखिम वाला काम है।
होर्मुज के आंशिक रूप से बंद होने या वहां से गुजरने पर रोक लगने से भी वैश्विक मूल्यों में झटका लगता है। व्यापारियों को न केवल तुरंत आपूर्ति में कमी का डर है, बल्कि अनिश्चितता का भी डर है। अगर खाड़ी का उत्पादन भरोसेमंद तरीके से बाजार तक नहीं पहुंच पाया, तो इसकी इन्वेंट्री में कमी हो जाएगी और वायदा कारोबार में तेजी आएगी। ऊर्जा विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि अगर अस्थिरता बनी रही तो तेल की कीमतें हफ़्तों तक ऊंची रह सकती हैं — इससे महंगाई बढ़ेगी, ठीक वैसे ही जैसे पिछले महंगाई के झटके के दौरान बढ़ी थी और जिससे उबरने में अभी भी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं लगी हुई हैं।
इसके आर्थिक असर सिर्फ़ ईंधन तक ही सीमित नहीं हैं। तेल की ऊंची कीमतों का असर परिवहन लागत, मैन्युफैक्चरिंग इनपुट, और उपभोक्ता वस्तुओं पर पड़ता है। युद्ध के जोखिम की बढ़ी हुई कीमतों (या प्रीमियम) का सामना कर रही शिपिंग कंपनियां अफ्रीका के आसपास जहाजों को मोड़ रही हैं, जिससे आपूर्ति समय में हज़ारों समुद्री मील और दिन बढ़ रहे हैं।
मिसाइल और ड्रोन के खतरों से सावधान कंटेनर इंश्योरेंस कंपनियां कवरेज की शर्तों में बदलाव कर रही हैं। कुछ कैरियर गल्फ जाने वाले रूट पूरी तरह से मना कर रहे हैं। इसका नतीजा लॉजिस्टिक में रुकावट है।
मिडिल ईस्टर्न पेट्रोकेमिकल्स और एशियन असेंबली हब पर निर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स को मूल्य में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। ऑटोमोटिव उत्पादकों को तेल इनपुट से बनने वाले प्लास्टिक और सिंथेटिक पदार्थों की चिंता है। फर्टिलाइजर, केमिकल्स और परिष्कृत खनिज तेल को भी ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
देरी से कीमतें बढ़ रही हैं। खुदरा व्यापारी इन्वेंटरी कम होने की चेतावनी दे रहे हैं। अर्थशास्त्री चेतावनी देते हैं कि अगर मैरीटाइम इंश्योरेंस बाजार बंद हो जाते हैं, तो व्यापार में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। लंदन के एक कमोडिटी रणनीतिकार ने कहा, “इस तरह क्षेत्रीय युद्ध वैश्विक मुद्रस्फीति बन जाता है।”
वॉशिंगटन में राजनीतिक गर्मी बढ़ रही है। दोनों पार्टियों के कांग्रेस सदस्य युद्ध शुरू करने और उसे बनाए रखने में राष्ट्रपति के अधिकार के दायरे पर सवाल उठा रहे हैं। वॉर पावर्स रिज़ोल्यूशन को लंबी दुश्मनी के लिए कांग्रेस से अनुमोदन की ज़रूरत होती है, फिर भी दोनों पार्टियों के राष्ट्रपतियों ने ऐतिहासिक तौर पर अपनी शक्तियों के बाले में व्यापक अर्थ निकाला है।
हाउस और सीनेट के नेता ऐसी सुनवाई की तैयारी कर रहे हैं जिसमें तगड़ा मुकाबला हो सकता है। कुछ सांसदों का तर्क है कि अमेरिकी सेना को बचाने के लिए प्रीएम्प्टिव कार्रवाई पूरी तरह से कार्यपालिका की शक्ति के अंदर आता है। दूसरे ज़ोर देते हैं कि लंबे समय तक चलने वाले आक्रमण की कार्रवाई के लिए कांग्रेस से साफ मंज़ूरी की ज़रूरत होती है।
वर्तमान बहस में – इटली से इराक तक - पहले के झगड़ों की झलक है जब रणनीति के सवाल संवैधानिक विवादों में बदल गए। आलोचक मिशन के धीरे-धीरे फैलने की चेतावनी देते हैं। समर्थकों का तर्क है कि हिचकिचाहट से दुश्मनों की हिम्मत बढ़ती है।
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी में ईरान के राजदूत ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी-इज़राइली हमले तेहरान की मुख्य नाभिकीय परिष्करण स्थलों में से एक, नतांज़ के पास लक्षित सुविधाओं पर हुए। आईएईए ने नाभिकीय संयंत्र को हुए नुकसान की पुष्टि नहीं की है और पड़ोसी देशों में कोई असामान्य रेडिएशन स्तर की रिपोर्ट नहीं की है।
नाभिकीय हमले बढ़ने का डर — भले ही गलती से हो — तनाव को बढ़ाता है। ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता काफी बनी हुई है। इसके क्षेत्रीय साथी देश कार्रवाई की क्षमता बनाए हुए हैं। अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अनुमति देने वाले खाड़ी राजशाही देश संभावित टकराव के बिंदु बने हुए हैं। हर लेन-देन से गलत आकलन का खतरा बढ़ जाता है।
तेल की बढ़ी हुई कीमतें, समुद्री व्यापार में रुकावट और भूराजनीतिक अनिश्चितता का मेल पहले से ही वित्तीय बाजार को परेशान कर रहा है। एशिया और यूरोप में इक्विटी इंडेक्स में तेज़ी से उतार-चढ़ाव आया है। मुद्रा बाजार कथित सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन को दिखाते हैं।
सेंट्रल बैंक, जो पहले से ही महंगाई और धीमी विकास दर को संतुलित कर रहे हैं, अगर ऊर्जा से चलने वाले कीमतों के दबाव को बढ़ाते हैं, तो उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं। आयातित ईंधन पर बहुत ज़्यादा निर्भर विकासशील अर्थव्यवस्थाएं बहुत कमज़ोर हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था, जो सालों की महामारी और आपूर्ति-श्रृंखला की उथल-पुथल के बाद हाल ही में रफ़्तार पकड़ रही थी, अब नई अस्थिरता का सामना कर रही है।
राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी कि सैन्य कार्रवाई शुरुआती अनुमानों से आगे बढ़ सकता है, इस मुख्य सच्चाई को दिखाता है कि युद्ध शायद ही कभी टाइमटेबल के हिसाब से होते हैं। अभी तो सैन्य कार्रवाई जारी हैं, तेल टैंकर विवादित समुद्री मार्ग के पास अनिश्चितता में मंडरा रहे हैं, कानून बनाने वाले अपनी दलीलें तेज़ कर रहे हैं और हर सुर्खियों की खबर के साथ बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है। मकसद अभी भी विवादित हैं। यह कब तक चलेगा, यह पक्का नहीं है। आर्थिक नतीजे तेज़ी से बिगड़ते दिख रहे हैं।
जो एक प्रिएंपटिव सैनिक हमले से शुरु हुआ था, वह अब एक सह्यता परीक्षण का मामला बन गया है — सब्र का और राजनीतिक इच्छाशक्ति का, और फिर इस बात का कि क्या आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं बिना किसी और गहरे संकट में पड़े एक और भूराजनीतिक झटका झेल सकती हैं? दुनिया न सिर्फ़ लड़ाई के मैदान पर, बल्कि बैलेंस शीट पर भी नज़र रख रही है। (संवाद)
लंबा खिंच सकता है ट्रंप-नेतन्याहू का ईरान युद्ध, जिसमें कई और देश शामिल होंगे
डगमगा रहे हैं वैश्विक बाजार, अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय तक झटकों के लिए तैयार रहें
अशोक नीलकंठन एयर्स - 2026-03-05 11:20 UTC
न्यूयॉर्क: जो युद्ध बिजली गिरने जैसे ज़ोरदार हमले से शुरू हुआ था, वह अब कहीं ज़्यादा अनिश्चित हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी मिलिटरी कार्रवाई "चार से पांच हफ़्ते" तक चल सकते हैं — और शायद "बहुत ज़्यादा लंबे समय तक।" अटलांटिक के उस पार, इजराइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने हमले के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि तेहरान मज़बूत मिसाइल और नाभिकीय स्थलों को फिर से बना रहा है जो जल्द ही पहुंच से बाहर हो जाएंगी।