पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ट्रंप के शांति के कदमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इस ज़रूरी दौरे की नयी तिथियां घोषित करना यह दिखाता है कि ट्रंप चीन के साथ अमेरिकी संबंधों को कितना महत्व देते हैं। ट्रंप जल्द से जल्द शी जिनपिंग से मिलने के लिए बेचैन हैं। वह आने वाले दौरे को लेकर मौजूदा युद्ध के हालात में भी कोई विभ्रम पैदा नहीं करना चाहते। इसलिए उन्होंने बुधवार को नयी तिथियों की घोषणा करते हुए कहा, “मैं राष्ट्रपति शी के साथ समय बिताने के लिए उत्सुक हूं, जो मुझे यकीन है कि एक यादगार अवसर होगा।”
दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ दिनों से, चीनी विदेश मंत्रालय के सूत्र और आधिकारिक मीडिया हर क्षेत्र में, खासकर आर्थिक, अमेरिका और चीन के बीच करीबी सहयोग की ज़रूरत की बात कर रहे हैं, जबकि उनका कहना है कि अमेरिका ने ईरान पर हमला करके संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अन्तर्राष्ट्रीय प्रवधानों का उल्लंघन किया है। चीन ईरानी अधिकारियों, खासकर ईरानी विदेश मंत्री के संपर्क में रहा है और युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की वकालत कर रहा है। पिछले दो दिनों में, बातचीत ट्रंप द्वारा प्रस्तावित किए गए 15 सूत्री शांति योजना और तेहरान के प्रतिप्रस्ताव के संदर्भ में ज़्यादा रही है। चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद करने की ट्रंप के अनुरोध को भी मानने से मना कर दिया है।
खास बात यह है कि ट्रंप के 14 और 15 मई को चीन के अपने दौरे के ऐलान के एक दिन बाद, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार, 26 मार्च को एक संपादकीय प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया, “इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि चीन और अमेरिका दोनों को सहयोग से फायदा होता है और टकराव से नुकसान। चीन ने कई मौकों पर इस बात पर ज़ोर दिया है कि रणनीतिगत सोच का मुद्दा हमेशा चीन-अमेरिकी रिश्ते के लिए ज़रूरी होता है, ठीक वैसे ही जैसे कि शर्ट का पहला बटन सही से लगाना होता है। अगर वह बटन गलत जगह पर लगा, तो बाद की सारी कोशिशें बेकार हो जाएंगी। अमेरिका के प्रति चीन की नीति एक जैसी, स्थिर और अंदाज़ा लगाने लायक रही है, जिसमें आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण ढंग से साथ रहने और दोनों के लिए फ़ायदे वाले सहयोग पर ज़ोर दिया गया है, और यह आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद ताकत के तौर पर काम कर रही है। वॉशिंगटन को चीन के प्रति अपने भेदभाव को छोड़ने, चीन की असलियत को बेहतर ढंग से समझने और चीन के आर्थिक और सामाजिक विकास के लंबे समय के रास्ते को पहचानने के लिए और ज़्यादा कोशिशें करने की ज़रूरत है।”
चीनी नज़रिए से व्यापारिक और वाणिज्यिक सहयोग पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है। ग्लोबल टाईम्स का कहना है कि चीन और अमेरिका का व्यापारिक समुदाय और नागरिस संगठनों ने करीबी बातचीत बनाए रखी है, और दोनों देशों के लोग आपसी समझ और दोस्ताना बातचीत की बहुत इच्छा रखते हैं। उम्मीद है कि अमेरिका के नीति निर्धारक चीन जाकर उसे खुद देखने में ज़्यादा समय बिताएंगे। जब "चीन में क्या हो रहा है यह देखना" सलाह के बजाय कार्य बन जाएगा, तभी अमेरिका के फ़ैसले लेने वाले अपना घमंड छोड़ पाएंगे, भेदभाव ठीक कर पाएंगे, और सीधे तौर पर जुड़कर अपनी सोच को बदल पाएंगे।
अभी जो हालात हैं, चीन पर नज़र रखने वालों का कहना है कि ट्रंप अमेरिका में सेमी कंडक्टर और दूसरे उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए ज़रूरी दुर्लभ खनिज पर ज़्यादा से ज़्यादा छूट पाने की कोशिश करेंगे और इस प्रक्रिया में, वह ताइवान पर चीन को कुछ राजनीतिक छूट दे सकते हैं। जापान और ताइवान दोनों इस बात से परेशान हैं। जापान की नई प्रधान मंत्री साने ताकाइची को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी हालिया बातचीत में ताइवान के मुद्दे पर वह समर्थन नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी, हालांकि आधिकारिक तौर पर जापानी अधिकारियों ने कहा कि ताइवान के मामले में जापान भी अमेरिकी जैसा ही है।
जापान और चीन के बीच राजनयिक झगड़ा इस हफ़्ते तब और बढ़ गया जब एक जापानी सैन्य अधिकारी पर टोक्यो में चीनी एम्बेसी में घुसने का आरोप लगा, जिसके बाद बीजिंग ने कड़ी फटकार लगाई। चीन ने इस घटना को जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के एक एक्टिव-ड्यूटी ऑफिसर द्वारा “ज़बरदस्ती घुसना” बताया। जापान ने भी चीन के इस रवैये पर आधिकारिक विरोध जताया।
यह घटना ऐसे समय में हुई जब हाल के महीनों में चीन और जापान के बीच रिश्ते खराब हुए हैं। इस गिरावट की मुख्य वजह जापानी प्रधान मंत्री साने ताकाइची की पिछले नवंबर में स्वशासित द्वीप ताइवान के बारे में की गई बातें थीं। पिछले साल अक्तूबर में ही चुने गए कट्टर कंजर्वेटिव नेता ने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान सैन्य दखल दे सकता है। ट्रंप ने ताकाइची के इस रवैये पर एतराज़ जताया और उनसे ताइवान का ज़िक्र करने के मुद्दे पर चीन के सन्दर्भ में अपनी जुबान पर नियंत्रण रखने को कहा। इस तरह, ताइवान और जापान दोनों इस साल मई के मध्य में होने वाली ट्रंप-शी वार्ता के नतीजों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। (संवाद)
बीजिंग में ट्रंप-शी वार्ता अब 14-15 मई को, जापान और ताइवान परेशान
ईरान युद्ध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प चाहते हैं यह “यादगार” बन जाये
नित्य चक्रवर्ती - 2026-03-27 11:40 UTC
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार बहुप्रतीक्षित अपने चीन दौरे की नयी तिथियां 14 और 15 मई तय की है। इसकी घोषणा उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल में की। बीजिंग के इस तय दौरे को लेकर फिलहाल चल रहे पश्चिम एशियाई युद्ध में एक तरह के युद्धबंदी के प्रचार के माहौल में राजनयिक घेरे में बड़ी दिलचस्पी पैदा हो गई है। पहले ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल तक चीन जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने ईरान युद्ध में अपनी व्यस्तता के बारे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात करके उसे विलम्बित कर दिया।