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पंजाब नगर निकायों के चुनाव नतीजों के संकेत

क्या मोदी का तिलिस्म समाप्त हो रहा है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-02-18 11:25 UTC
भारत गांवों का देश तो है ही, यह चुनावों का भी देश है। हमेशा कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं। भारत में त्रिस्तरीय सरकारें निर्वाचित होती हैं। केन्द्र और राज्य सरकारों के गठन के लिए चुनाव तो होते ही हैं, स्थानीय निकायों के चुनाव भी होते रहते हैं। स्थानीय निकायों के चुनाव गांवों के लिए भी होते हैं और शहरों के लिए भी होते हैं। अभी अभी पंजाब के नगर निकायों के चुनाव हुए। 8 महानगरों के निगमों के चुनाव हुए और उनके साथ ही 109 नगरपालिकाओं और नगरपंचायतों के भी चुनाव हुए। वे चुनाव किसानों के आंदोलन के बीच हुए और यह किसी से छिपा हुआ रहस्य नहीं है कि ये किसान आंदोलन हरित क्रांति की भूमि में सबसे ज्यादा तेज है। इसे पंजाब के किसानों ने शुरू किया और यह अभी पंजाब के साथ साथ हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा तीव्र हैं, हालांकि कमोबेश यह पूरे देश में चल रहा है।

किसान आंदोलन के राष्ट्रीय चरित्र से संघ परिवार सकते में

किसी भी प्रकार के असंतोष को दबाने के लिए शासक कृतसंकल्प
अरुण श्रीवास्तव - 2021-02-17 10:43 UTC
हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में बड़े पैमाने पर किसान महासम्मेलनों के उन्नयन और किसानों के आंदोलन के आधार को व्यापक बनाने से न केवल आरएसएस का नेतृत्व सकते में है, बल्कि संघ और मोदी सरकार के बीच विरोधाभास भी तेज हो गया है।

मध्य प्रदेश बजट में किसानों की दशा पर फोकस होगा

राज्य सरकार की वित्तीय हालत पतली है
एल एस हरदेनिया - 2021-02-16 10:49 UTC
भोपालः ऐसी परियोजनाओं और योजनाओं को शामिल करना जो किसानों को खुश कर सकता है और आगामी स्थानीय चुनावों में मतदाताओं को लुभाने में मदद करता है, मध्य प्रदेश के अगले बजट का मुख्य आकर्षण हो सकता है। बजट, आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश, किसान और सरकारी कर्मचारी राज्य के बजट में एक पखवाड़े में विधानसभा में पेश किए जाने वाले सरकार के प्राथमिकता वाले क्षेत्र होंगे। बजट सत्र 22 फरवरी से शुरू होगा और 26 मार्च तक जारी रह सकता है।

बार-बार भूकंप

यानी पृथ्वी मनुष्य से खुश नहीं है!
अनिल जैन - 2021-02-15 09:46 UTC
उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के इलाके में भूंकप यानी धरती के डोलने-थरथराने का सिलसिला नया नहीं है। लेकिन पिछले कुछ समय से यह सिलसिला बेहद तेज हो गया है। इस इलाके के किसी न किसी हिस्से में आए दिन भूकंप के झटके लग रहे हैं। पिछले साल मई और जून के महीने में कुल 14 मर्तबा भूकंप के झटकों ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर के साथ ही हरियाणा और पंजाब के एक बडे हिस्से को भयाक्रांत किया था। हालांकि उन सभी झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.0 से 4.5 तक थी, लेकिन इस बार 12 फरवरी की रात 6.3 की तीव्रता वाले भूकंप के झटकों ने दिल्ली-एनसीआर समेत समूचा उत्तर भारत कांप उठा।

प्रधानमंत्री कुलीनतंत्र को त्यागें

तीनों कृषि कानूनों को वापस लें
सीताराम येचुरी - 2021-02-13 11:23 UTC
संसद के संयुक्त सत्र के लिए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए डेढ़ घंटे लंबे भाषण में राष्ट्रपति नरेंद्र मोदी ने अपना और अपनी सरकार का अधिकांश समय राष्ट्रपति के अभिभाषण पर टिकाने में बिताया। तथ्य यह है कि यह अभिभाषण केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा तैयार किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता पीएम करते हैं और राष्ट्रपति उसे पढ़ते है।

कांग्रेस की सहारनपुर रैली से कार्यकत्ताओं की हौसल आफजाई

प्रियंका गांधी ने जमीनी स्तर पर उत्तर प्रदेश में पार्टी को गतिशील किया
प्रदीप कपूर - 2021-02-12 09:49 UTC
लखनऊः एआईसीसी महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा संबोधित किसान महापंचायत की शानदार सफलता ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है।

सजा काटकर शशिकला की जेल से वापसी

सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के लिए बज रही है खतरे की घंटी
एस सेतुरमन - 2021-02-11 09:41 UTC
दिवंगत सर्वोच्च नेता सुश्री जयललिता की विश्वासपात्र सुश्री शशिकला की जेल से वापसी हो चुकी है। सोमवार को बेंगलुरु से चेन्नई जाने की उनकी यात्रा 17 घंटे की रही और वह एक शानदार यात्रा थी। कई केंद्रों पर सभी रस्मी स्वागत और भीड़ के जश्न के बीच, उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी की चुनावी योजनाओं को लेकर एक मजबूत राजनीतिक संदेश दिया।

भारत का 2021-22 का बजट मोदी सरकार के लिए एक बडा जुआ है

विकास दर और घाटे के प्रोजेक्शन में इसकी सफलता छिपी हुई है
नंतू बनर्जी - 2021-02-10 09:49 UTC
सरकार के 2021-22 के बजट अनुमानों के पीछे बहुत सी धारणाएँ भारत के नए बजट को एक बड़ा जुआ बनाती हैं। आगामी वित्त वर्ष में 34.83 लाख करोड़ रुपये 2021-22 में 19.76 लाख करोड़ रुपये की प्राप्तियों (उधार के अलावा) के अधीन है, जो कि 2020-21 के संशोधित अनुमान से 23 प्रतिशत अधिक है। 2020-21 में प्राप्तियों के लिए संशोधित अनुमान महामारी के कारण वर्ष के लिए मूल बजट अनुमानों से 29 प्रतिशत कम थे। 2021-22 के लिए बजट प्राप्तियों का लक्ष्य पूरी तरह से इस महत्वपूर्ण धारणा पर आधारित है कि नॉमिनल जीडीपी 14.4 प्रतिशत बढ़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के अपने मुख्य आर्थिक सलाहकार जीडीपी के पूर्वानुमान के आधार पर भिन्न भिन्न राय रखते हैं।

उत्तराखंड के एक ग्लेसियर फटने का मामला

हिमालय से आपराधिक छेड़खानी के नतीजे तो भुगतने ही होंगे!
अनिल जैन - 2021-02-09 10:14 UTC
उत्तराखंड समेत समूचे हिमालयी क्षेत्र में बरसात के मौसम में तो बादल फटने, ग्लेशियर टूटने, बाढ आने, जमीन दरकने और भूकंप के झटकों की वजह से जान-माल की तबाही होती ही रहती है। ऐसी आपदाओं का कहर कभी उत्तराखंड, कश्मीर और हिमाचल प्रदेश तो कभी पूर्वोत्तर के राज्य अक्सर झेलते रहते हैं। लेकिन यह पहला मौका है जब सर्दी के मौसम में उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने के रूप में कुदरत का कहर बरपा है। वहां चमोली जिले में नंदादेवी ग्लेशियर के टूटने से भीषण तबाही मची है और बडे पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। आश्चर्यजनक रूप से सर्दी के मौसम में घटी यह घटना एक नए खतरे की ओर इशारा करती है। कहने को तो यह खतरा प्राकृतिक है और इसे जलवायु चक्र में हो रहे परिवर्तन से भी जोडकर देखा जा रहा है लेकिन असल में यह मनुष्य की खुदगर्जी और विनाशकारी विकास की भूख से उपजा संकट है।

किसान आंदोलन का अंतरराष्ट्रीयकरण

प्रधानमंत्री मोदी कृषि कानून की लड़ाई हार चुके हैं
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-02-08 11:06 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी भी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं और कृषि कानूनों के पक्ष में लगातार बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं है कि जब पूरा देश लॉकडाउन के कारण घरों में बंद था, तो अध्यादेश के द्वारा इन कानूनों को बनाने की क्या जरूरत थी। उनके पास इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं है कि संसद में इस पर बहस कराए बिना इसे क्यों पारित कराया गया। उनके पास इस सवाल का जवाब भी नहीं है कि राज्यसभा में जब उनकी पार्टी अल्पमत में है और उनके राजग सहयोगी दलों में भी उन कानूनों को लेकर विरोध था, तो फिर राज्यसभा में मत विभाजन क्यों नहीं कराया गया।