Loading...
 
Skip to main content

View Articles

क्या भाजपा में जाएंगे सिंधिया?

मध्यप्रदेश कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है
अनिल जैन - 2019-09-09 11:08 UTC
भीतरी कलह से ग्रस्त मध्य प्रदेश कांग्रेस की हालत संगीन है, जहां कांग्रेस चंद महीनों पहले ही पूरे डेढ दशक के अंतराल के बाद जैसे-तैसे सत्ता में आई है।पहले दिन से अल्पमत की सरकार करार देते हुए भाजपा के नेताओं ने उसकी बिदाई का गीत गाना शुरू कर दिया था। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन भी नहीं दोहरा सकी और उसका पूरी तरह सफाया हो गया। हालांकि भाजपा की ओर से न तो सरकार गिराने की कोशिश की गई और न ही उसके किसी नेता ने इस आशय का कोई बयान दिया। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में माना जाने लगा कि अब सूबे में कांग्रेस की सरकार के दिन करीब आ गए हैं।

मध्यप्रदेश कांग्रेस का गुटीय संघर्ष जारी है

भाजपा इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रही है
एल एस हरदेनिया - 2019-09-07 08:43 UTC
भोपालः मध्यप्रदेश कांग्रेस में हर दिन गुटबाजी का दौर मुखर होता जा रहा है। मंत्री उमंग सिंगार ने मुख्यमंत्री कमलनाथ की कड़ी चेतावनी के बावजूद मप्र के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ बयानबाजी पर रोक नहीं लगाई है। नाथ ने उन्हें बुलाया और चुप रहने के लिए कहा।

कश्मीर पर भारत की राजनयिक मुश्किलें बढ़ रही हैं

पाबंदी लंबी होने से शुरुआती लाभ घट रहे है
नित्य चक्रवर्ती - 2019-09-06 08:33 UTC
पाकिस्तान को अलग-थलग करने में अपनी कूटनीतिक सफलता पर भारत को खुश होना स्वाभाविक है। लेकिन अब मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं और शायद यह खुशी गायब होने लगे। विदेशी मामलों की यूरोपीय संसद समिति ने जो कहा है, उससे तो ऐसा ही लगता है। समिति ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर में कर्फ्यू को तुरंत हटा लें। सदस्यों ने कहा कि यूरोपीय संघ और यूरोपीय संसद को जल्द से जल्द कश्मीर के हालात पर बयान जारी करना चाहिए।

फाइनल एनआरसी लिस्ट कानूनी पचड़ों में उलझेगी

सुप्रीम कोर्ट मोनिटरिंग में विफल
अमृतानंद चक्रवर्ती - 2019-09-05 11:23 UTC
असम में उन लाखों लोगों के लिए जो अपने नागरिकता के दावों के साथ राष्ट्रीय नागरिकता सूची में अपने नाम आने का इंतजार कर रहे थे, 31 अगस्त का दिन आखिरकार आ ही गया जब नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) की अंतिम सूची प्रकाशित हुई। 3,11,21,004 व्यक्ति एनआरसी में शामिल हैं, जबकि असम में रहने वाले 19,06,657 लोगों को उसमें शामिल नहीं किया गया है।यानी 95 फीसदी आबादी सूची में शामिल हैं और 5 फीसदी लोग उससे बाहर रह गए। जिन 5 व्यक्तियों को सूची से बाहर रखा गया है, वे असम के विदेशी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं, और उन्हें अपना दावा साबित करने का एक और अवसर मिलेगा कि वे भारत के नागरिक हैं। इसके लिए उन्हें 120 दिनों का समय मिलेगा। जब जुलाई 2018 में एनआरसी सूची का मसौदा प्रकाशित किया गया था, तो 40 लाख से अधिक लोगों को छोड़ दिया गया था। उनकी संख्या अंतिम सूची में 50 फीसदी कम हो गयी है।

दिग्विजय पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ओर से हमला

मंत्री पत्र लिखने का कर रहे हैं विरोध
एल एस हरदेनिया - 2019-09-03 12:19 UTC
भोपालः पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर उनकी पार्टी के सहयोगी और भाजपा और बजरंग दल द्वारा एक साथ हमला किया जा रहा है। कमलनाथ कैबिनेट के सदस्य उमंग सिंगर ने दिग्विजय सिंह पर सरकार के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया है। एक हस्ताक्षरित बयान में उमंग ने विशेष रूप से उस पत्र का उल्लेख किया जो दिग्विजय ने सभी मंत्रियों को भेजा है।

मध्यप्रदेश बना राजनीति का गर्म केक

मंत्रियों पर भी लग रहे हैं भ्रष्टाचार के आरोप
एल एस हरदेनिया - 2019-09-02 15:49 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश कांग्रेस में सब ठीक नहीं है। विभिन्न गुटीय नेताओं के अनुयायी खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि यदि उनके बॉस को राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त नहीं किया गया तो वे अन्य विकल्पों का सहारा ले सकते हैं। ज्यादातर मुखर ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुयायी हैं। सिंधिया को शीर्ष संगठनात्मक पद के लिए नहीं चुने जाने पर उनमें से कई लोग कहने लगे हैं कि वे सैकड़ों अनुयायियों के साथ सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं। वर्तमान में कमलनाथ के पास मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष - दोनों पद हैं।

कश्मीर में स्थिति सामान्य होने की संभावना किधर है?

राज्यपाल के विचार ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर डाला
नित्य चक्रबर्ती - 2019-08-31 11:51 UTC
जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने शुक्रवार को प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के साथ किसी भी बातचीत को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मुख्यधारा के राजनीतिक दलों या अलगाववादियों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने राजनीतिक संवाद को महत्वपूर्ण बताते हुए अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया और कहा कि हम कश्मीरी नागरिक समाज के साथ बात करेंगे।ं साक्षात्कार महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला जैसे मुख्यधारा के नेताओं के खिलाफ अपमान और दुर्भावना से भरा है और यह धारणा बनती है कि सरकार मुख्यधारा के राजनीतिक दलों की अनदेखी कर राजनीतिक बातचीत के लिए कश्मीर में चुने हुए लोगों की तलाश करेगी।

कश्मीर में नागरिक स्वतंत्रता की उपेक्षा कर रहा है सुप्रीम कोर्ट

वहां मौलिक अधिकारों का हो रहा है हनन
अमृतानंद चक्रवर्ती - 2019-08-30 11:47 UTC
बुधवार, 28 अगस्त, 2019 को, सुप्रीम कोर्ट ने अंततः कश्मीर में 70 लाख लोगों के 24 दिनों के पूर्ण लॉकडाउन के बाद क्रमशः 5 अगस्त और 6 अगस्त को राष्ट्रपति आदेशों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की और उन्हें निर्देश दिया। याचिकाओं पर अक्टूबर, 2019 से 5 न्यायाधीशों की एक संविधान पीठ द्वारा सुनवाई की जाएगी, क्योंकि इसमें कानून के पर्याप्त प्रश्न शामिल थे। इन याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसमें सीमा पार से होने वाले नुकसान भी शामिल हैं।

दिल्ली में मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली

क्या चुनाव जीत पाएंगे केजरीवाल
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-08-29 11:12 UTC
पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हाथों आम आदमी पार्टी की करारी हार हुई थी। दिल्ली लोकसभा की सातों सीट पर चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मात्र दो सीटों पर ही दूसरे नंबर पर आ सके थे। यानी शेष 5 सीटों पर उसके उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे थे और उनमें से अधिकांश की जमानतें जब्त हो गई थीं। भारतीय जनता पार्टी को 50 फीसदी से भी ज्यादा मत मिले थे, जबकि केजरीवाल की पार्टी को मात्र 18 फीसदी मत ही मिले थे। उससे ज्यादा मत तो कांग्रेस को मिले थे। शीला दीक्षित तक कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्षा थीं और उन्होंने अपने आपको भी चुनाव मैदान में उतार दिया था। इसके अलावा दिल्ली प्रदेश के अन्य कांग्रेसी महारथी भी चुनाव के अखाड़े में खुद उतर आए थे। खुद शीला दीक्षित, पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, अजय माकन, लवली और महावल मिश्र चुनाव लड़ रहे थे और वे सभी के सभी हार तो गए, लेकिन आम आदमी पार्टी को धूल चटाने में भाजपा की मदद कर दी। कांग्रेस के वे सारे दिग्गज दूसरे स्थान पर रहे और इस तरह उन्होंने केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को सदमे में भेज दिये।

जिंदगी बचाने के लिए पानी का कुप्रबंधन रोकें

जलशक्ति मंत्रालय को हल ढूंढ़ना होगा
ज्ञान पाठक - 2019-08-28 10:52 UTC
भारत को दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी के लिए पानी का प्रबंधन करने की आवश्यकता है लेकिन दुनिया के ताजा पानी के संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत ही यहां है। यद्यपि वार्षिक उपयोग योग्य पानी सतही जल स्रोतों से 690 अरब घन मीटर (बीसीएम) और भूजल से 447 बीसीएम है, लेकिन पानी की आपूर्ति इतनी कुप्रबंधित है कि हर साल लगभग दो लाख लोग अपर्याप्त पानी, और अस्वच्छता के कारण मर जाते हैं। व्यक्तिगत रूप से असुरक्षित पानी का बोझ चीन की तुलना में 40 गुना अधिक है, और श्रीलंका की तुलना में 12 गुना अधिक है। प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में अपशिष्ट जल उत्पन्न होने के साथ, सतही और भूजल दोनों को दूषित करने वाले अपशिष्ट जल के कुप्रबंधन, तरल अपशिष्ट प्रबंधन की कमी, स्वच्छता की खराब स्थिति ने जल जनित बीमारियों से पीड़ित आबादी की संख्या बढ़ाने में योगदान दिया है।