तो क्या अब इसी तरह ‘इंसाफ’ और ‘फैसले’ होंगे?
हैदराबाद की पुलिस मुठभेड़ में चार आरोपितों की हत्या
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2019-12-10 10:50 UTC
बात 1990 के दशक की है। अविभाजित मध्य प्रदेश और अब छत्तीसगढ़ के दल्ली राजहरा में श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी जहां उस इलाके के मजदूरों और उनके परिवारजनों के बीच काफी लोकप्रिय थे। इसी वजह से वे वहां के भ्रष्ट उद्योगपतियों, शराब माफिया और उनकी संरक्षक मध्य प्रदेश सरकार (कांग्रेस और भाजपा दोनों ही) की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। इसी नाते हमेशा पुलिस के भी निशाने पर रहते थे। शराब माफिया नियोगी को इसलिए अपना दुश्मन मानता था कि उन्होंने अपनी यूनियनों से जुडे 70 हजार से अधिक मजदूरों की शराब छुड़वा दी थी, जिसकी वजह से उनका शराब का कारोबार प्रभावित हो रहा था। मजदूरों के एक प्रदर्शन के सिलसिले में जिले की पुलिस ‘शांति भंग’ के आरोप में नियोगी को गिरफ्तार कर दल्ली राजहरा से भिलाई ला रही थी। घने जंगलों से गुजरते हुए खुली जीप जब रास्ते में कुछ मिनटों के लिए रुकी तो नियोगी से एक पुलिस वाले ने कहा कि मौका अच्छा है, भाग जाओ, हम कह देंगे कि नियोगी पुलिस को चकमा देकर भाग निकला।