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तो क्या अब इसी तरह ‘इंसाफ’ और ‘फैसले’ होंगे?

हैदराबाद की पुलिस मुठभेड़ में चार आरोपितों की हत्या
अनिल जैन - 2019-12-10 10:50 UTC
बात 1990 के दशक की है। अविभाजित मध्य प्रदेश और अब छत्तीसगढ़ के दल्ली राजहरा में श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी जहां उस इलाके के मजदूरों और उनके परिवारजनों के बीच काफी लोकप्रिय थे। इसी वजह से वे वहां के भ्रष्ट उद्योगपतियों, शराब माफिया और उनकी संरक्षक मध्य प्रदेश सरकार (कांग्रेस और भाजपा दोनों ही) की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। इसी नाते हमेशा पुलिस के भी निशाने पर रहते थे। शराब माफिया नियोगी को इसलिए अपना दुश्मन मानता था कि उन्होंने अपनी यूनियनों से जुडे 70 हजार से अधिक मजदूरों की शराब छुड़वा दी थी, जिसकी वजह से उनका शराब का कारोबार प्रभावित हो रहा था। मजदूरों के एक प्रदर्शन के सिलसिले में जिले की पुलिस ‘शांति भंग’ के आरोप में नियोगी को गिरफ्तार कर दल्ली राजहरा से भिलाई ला रही थी। घने जंगलों से गुजरते हुए खुली जीप जब रास्ते में कुछ मिनटों के लिए रुकी तो नियोगी से एक पुलिस वाले ने कहा कि मौका अच्छा है, भाग जाओ, हम कह देंगे कि नियोगी पुलिस को चकमा देकर भाग निकला।

एससी, एसटी और क्रीमी लेयर

सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एतराज क्यों?
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-12-09 11:21 UTC
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में केन्द्र और राज्य सरकारों से कहा कि वह अनुसूचित जातियों और जनजातियों को दिए जा रहे आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रावधान डाले। सुप्रीम कोर्ट इन समुदायों के लिए आरक्षण में प्रमोशन के मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाले एक बेंच में हो रही थी। आरक्षण में प्रमोशन को सही मानते हुए कोर्ट ने कुछ शर्ते रख दीं और उसके साथ ही सभी प्रकार के एससी-एसटी के आरक्षण में इन वर्गों के क्रीमी लेयर को बाहर रखने को कहा। लेकिन केन्द्र और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट को उस आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। इस बीच सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों और शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए कई बार विज्ञापन आए, लेकिन एससी और एससी उम्मीदवारों के लिए क्रीमी लेयर नहीं लगाया गया। क्रीमी लेयर लगाना तो दूर अभी तक एसएसी और एसटी के लिए क्रीमी लेयर का क्राइटेरिया तक तय नहीं किया गया है।

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने किया विद्रोह

पार्टी से निष्कासित नेता सोनिया गांधी से मिलेंगे
प्रदीप कपूर - 2019-12-07 09:33 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व का सामना करने के लिए ताकत दिखाने के लिए कमर कस रहे हैं। पार्टी से निष्कासन से हैरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आगामी 28 दिसंबर को लखनऊ में पार्टी के बड़े नेताओं का सम्मेलन आयोजित करने का फैसला किया है ताकि भविष्य में कार्रवाई की रूपरेखा तय की जा सके। पूर्व सांसदों और विधायकों से अपेक्षा की जाती है कि वे कार्यकर्ता सम्मेलन में पैदा हुई असाधारण स्थिति पर चर्चा करेंगे।

'हैदराबाद के बलात्कारियों को त्वरित सजा'

एनकाउंटर तो अदालती व्यवस्था का भी हुआ है
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-12-06 11:12 UTC
देश के लोग बहुत खुश हैं कि हैदराबाद के बलात्कारियों के साथ पुलिस ने त्वरित न्याय कर डाला। एक मुठभेड़ में उन चारों को मौत के घाट उतार डाला। लोग इसी तरह की मांग कर रहे थे। कोई उन्हें जल्द से जल्द फांसी पर लटकता हुआ देखना चाहता था, तो कोई चाहता था कि जिस जगह उन्होंने अपराध को अंजाम दिया, उसी जगह ले जाकर उन्हें गोली से उड़ा दिया जाना चाहिए। एक कथित बलात्कारी की मां का तो यहां तक कहना था उनके बेटे और अन्य तीन बलात्कारियों को उसी स्थान पर ले जाकर जलाकर मार डालना चाहिए, जिस तरह से उन्होंने उस महिला डाॅक्टर को जलाकर मारा था।

भोपाल के गैस पीड़ितों ने 4 दिसंबर को याद किया

बचे हुए लोग अभी भी उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं
एल. एस. हरदेनिया - 2019-12-05 09:34 UTC
भोपालः आंखों में आंसू लेकर केंद्र और राज्य सरकार और यूनियन कार्बाइड के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हजारों गैस पीड़ितों ने भोपाल की सड़कों पर मार्च किया, मानव श्रृंखला बनाई और विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा 4 दिसंबर को भोपाल में हुई आपदा को याद करते हुए आयोजित सार्वजनिक बैठकों में भाग लिया।

सख्त सजा के प्रावधान से नहीं रुकेंगे बलात्कार

जरूरत शीघ्र सजा के प्रावधान की है
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-12-04 11:25 UTC
हैदराबाद के एक पशु चिकित्सक के बलात्कार और हत्या के बाद एक बार फिर देश भर में बलात्कार के खिलाफ उबाल है। निर्भया ज्योति सिंह के साथ जब 2012 में बलात्कार हुआ था, उस समय भी देश भर में उबाल आया था। उस समय बलात्कार को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने के लिए एक वर्मा कमिटी बनी थी। उसने कुछ सिफारिशें की थी। उन सिफारिशों के आधार पर कानूनों को कड़े किए थे, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ। बलात्कार बदस्तूर जारी हैं। कभी कभी मीडिया के खास ध्यान के कारण या बलात्कार के साथ जुड़ी मौत और उसके पहले की गई पाशविकता के कारण बलात्कर हमारे सभ्य समाज को झकझोरने लगता है और समाज से आवाज उठने लगती है कि कानून को और कठोर करो। बलात्कारियों को फांसी दे दो। भावनाओं का एक बड़ा ज्वार उठता है और कुछ दिन के बाद शांत हो जाता है, लेकिन बलात्कार की घटनाएं नहीं थमतीं। सच तो यह है कि इस तरह की घटनाएं दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं। अब रेप नहीं होते, बल्कि गैंग रेप होते हैं और वर्मा कमिटी की अनुशंसा पर कड़े किए गए कानूनों कारण रेप पीड़िताओं की हत्या कर देने की घटना अब ज्यादा होने लगी है। यानी जिस कानून को महिलाओं की रक्षा के लिए कड़े किए गए थे, वे कानून अब पीड़िताओं की मौत का कारण भी बनने लगे हैं।

भाजपा शिवसेना से डरती रहेगी

शरद पवार की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी
अमूल्य गांगुली - 2019-12-03 11:19 UTC
भाजपा के सभी विरोधियों में से, जिस पार्टी से नरेंद्र मोदी- अमित शाह की जोड़ी बेहद चैकस होगी, वह शिवसेना है। कारण यह है कि सेना आलोचना में असामान्य रूप से तेज है। यह विशेषता उसने वर्षों में सड़क छाप राजनीति करते हुए हासिल की है।

भोपाल गैस त्रासदी के 35 वर्ष

उस भीषणतम गैस त्रासदी को अभी भुगत रहा है भोपाल
अनिल जैन - 2019-12-02 11:22 UTC
इंसान को तमाम तरह की सुख-सुविधाओं के साजो-सामान देने वाले सतर्कताविहीन या कि गैरजिम्मेदाराना विकास कितना मारक हो सकता है, इसकी जो मिसाल भोपाल में साढे़ तीन दशक पहले देखने को मिली थी, उसे वहां अभी अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग रूपों में देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी मध्य प्रदेश के दौरे पर होते हैं तो वे अपने भाषण में कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए भोपाल गैस कांड का जिक्र करना नहीं भूलते हैं। मोदी अपने भाषण में उस भयावह गैस कांड के लिए जिम्मेदार अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन अध्यक्ष वॉरेन एंडरसन के भारत से भाग निकलने के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराते हैं। लेकिन उस गैस त्रासदी के बाद जो त्रासदी वहां आज तक जारी है, उसका जिक्र वे कभी नहीं करते।

शिवसेना और कांग्रेस का साथ

क्या मुंबई पहले की तरह कास्मोपाॅलिटन नगर बन पाएगा?
एल एस हरदेनिया - 2019-11-30 15:48 UTC
अभी तक कांग्रेस का यह दावा था कि उसने कभी किसी साम्प्रदायिक दल से हाथ नहीं मिलाया। संभवतः उसे इस बात पर गर्व भी था। अब पहली बार ऐसा हो रहा है। इसके क्या दूरगामी परिणाम होंगे यह तो भविष्य में ही पता लगेगा। इस संदर्भ में शिवसेना के चरित्र को समझना आवश्यक है। शिवसेना स्वयं को शिवाजी महाराज का अनुयायी बताता है। परंतु इतिहास इस बात का गवाह है कि शिवाजी स्वयं एक अत्यंत उदारवादी राजा थे। उनके संबंध में एक अत्यधिक संवेदनशील कहानी प्रचलित है। एक युद्ध में एक मुस्लिम राजा को हराकर शिवाजी के सैनिक एक अत्यधिक सुंदर मुस्लिम रानी को ले आए। वे उसे शिवाजी को तोहफे के रूप में देना चाहते थे। उसे देखकर शिवाजी आक्रोषित हो गए। उन्होंने उसे तत्काल ससम्मान वापिस भेजने का आदेश दिया। आदेश देते हुए शिवाजी ने कहा, "काश मेरी मां इतनी सुंदर होती तो मैं भी उतना ही सुंदर होता"।

झारखंड चुनाव पर महाराष्ट्र की छाया

भाजपा के लिए यह चुनाव हुआ और भी मुश्किल
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-11-29 17:18 UTC
महाराष्ट्र में हुए राजनैतिक उठापटक में भारतीय जनता पार्टी बुरी तरह परास्त हुई है। चुनावों में तो जनादेश उसे ही मिला था। शिवसेना के साथ मिलकर उसे सरकार बनानी थी, लेकिन अपने पुराने वायदे को पूरा नहीं करने के कारण उसे शिवसेना और सत्ता दोनों का साथ छोड़ना पड़ा। सेना का दावा है कि लोकसभा चुनाव के पहले जब वह भाजपा से गठबंधन नहीं करना चाहती थी, तो अमित शाह उद्धव ठाकरे की इस मांग से सहमत हो गए थे कि महाराष्ट्र में जब अगली सरकार बनेगी तो उसमें भाजपा और शिवसेना बराबर बराबर सत्ता की भागीदारी करेंगे। इसका मतलब था कि सरकार में दोनों पार्टियों के मंत्रियों की संख्या बराबर होगी और दोनों पार्टियों के नेता ढाई ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री के पद पर रहेंगे। लेकिन भाजपा इस वायदे से मुकर गई। महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं ने तो यहां तक कहा कि अमित शाह ने ऐसा कोई वायदा किया ही नहीं था। दूसरी तरफ अमित शाह ने इस विवाद पर अपना मुह तक नहीं खोला। उन्होंने न तो शिवसेना के दावे का खंडन किया और न ही पुष्टि। इससे यह माना गया कि उद्धव ठाकरे सच ही बोल रहे थे।