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राजकोषीय अराजकता के दौर में प्रवेश कर चुका है भारत

लोगों के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं
ज्ञान पाठक - 2019-07-20 10:19 UTC
हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को छोड़कर, किसी से भी पूछिए कि 2019-20 में भारत की अपेक्षित विकास दर क्या है? इसका उत्तर लगभग 7 प्रतिशत होगा जो सभी विश्वसनीय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की गणना पर आधारित है। हालाँकि, चालू वित्त वर्ष के बजट ने भारत की जीडीपी, प्राप्तियों और व्यय की गणना 12 फीसदी की वृद्धि दर से की है, जबकि वास्तविक विकास दर में 6.8 प्रतिशत है। एक अच्छी दिखने वाली बैलेंस शीट बनाने के लिए इतनी बड़ी अतिशयोक्ति का सहारा लिया गया, लेकिन इससे सरकार को अपनी खुद की वित्तीय गड़बड़ियों को दूर करने में मदद नहीं मिलेगी। अर्थव्यवस्था की झूठी और बढ़ा चढ़ाकर पेश की गई तस्वीर वास्तविकता को छिपा नहीं सकती।

सोनभद्र का नरसंहारः क्यों चुप है हमारा सभ्य समाज?

उपेन्द्र प्रसाद - 2019-07-19 09:51 UTC
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हुए आदिवासियों के नरसंहार ने पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। हमारा कथित सभ्य समाज कितना पाखंडी और निर्लज्ज है, इसका इसी से पता चलता है कि जब गुजरात में एक दलित की मूछ कटती है, तो यह कथिज सभ्य समाज पूरा आसमान सिर पर उठा लेता है। वह इसे एक अंतरराष्ट्रीय मसला बना देता है। पर जब आज आदिवासियों का नरसंहार हुआ है, तो उस पर वह पाखंडी कथित सभ्य समाज अपनी पूर्ण निर्लज्जता के साथ खामोश है। सभ्य समाज के सारे वर्ग, राजनैतिक से लेकर मीडिया तक, चुप है। सोशल मीडिया के दबाव में प्रियंक गांधी ने घटना स्थल का दौरा करना उचित समझा, लेकिन एक कथित दलित द्वारा एक ब्राह्मण विधायक की बेटी की शादी पर समाज में जितनी उत्तेजना थी, उसका सौंवा भाग भी आज देखने को नहीं मिल रही है।

भारतीय लोकतंत्र को एक प्रभावी विपक्ष की तलाश

राहुल के बाद कांग्रेस अपना घर करे दुरुस्त
कल्याणी शंकर - 2019-07-18 11:17 UTC
17 वीं लोक सभा का पहला सत्र बिना किसी गड़बड़ी के शुरू हो गया है, यहां तक कि पहली बार जीत कर आने वालों को भी अपने पहले भाषण देने का अवसर मिला है। जबकि 16 वें लोक सभा ने एक विभाजित और खंडित विपक्ष को देखा, वर्तमान लोकसभा में अभी तक केवल एक आवाज में बोलने का प्रयास देखा जा रहा है, लेकिन उस प्रयास के बाद निकल रही आवज कमजोर है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि विपक्ष को चुनावों में मिले झटके से उबरना अभी बाकी है।

कमलनाथ के लिए समस्याएं खड़ी कर रही है भाजपा

गोवा और कर्नाटक की घटनाओं से कांग्रेस परेशान
एल एस हरदेनिया - 2019-07-18 11:13 UTC
भोपालः कर्नाटक और गोवा की राजनीतिक घटनाओं ने मध्य प्रदेश में असर दिखाना शुरू कर दिया है। है। भाजपा के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस सरकार को चेतावनी दी है कि गोवा से तूफान कर्नाटक के माध्यम से मप्र में आ रहा है। इससे राजनीतिक क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

उत्तर प्रदेश में उपचुनावों की सरगर्मी बढ़ी

प्रियंका गांधी ने एक बार फिर कांग्रेस की कमान संभाली
प्रदीप कपूर - 2019-07-16 10:07 UTC
लखनऊः 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान हुए घमासान के बाद विपक्षी दल 12 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों की तैयारियों में जुट गया है। भाजपा के आठ और विपक्ष के तीन सहित 11 विधायकों को लोकसभा के लिए चुने जाने के कारण रिक्तियां पैदा हो गई हैं। एक हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद भाजपा विधायक की सीट खाली हो गई है।

असम के बंगालियों के बुरे दिन

40 लाख लोगों की नागरिकता संकट में
बरुन दास गुप्ता - 2019-07-13 08:53 UTC
असम में बंगालियों के लिए - हिंदू और मुस्लिम दोनों - वर्ष 2019 एक भयानक वर्ष है। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स की अंतिम सूची 31 जुलाई को प्रकाशित होने जा रही है। दोनों सूचियों में से किसी में भी लगभग 41.09 लाख बंगाली नागरिकं को शामिल नहीं हैं।

भाजपा की परेशानी का अंत नहीं

एक साथ लगे उन्हें तीन झटके
एल एस हरदेनिया - 2019-07-12 08:48 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश के तीन घटनाक्रमों ने भारतीय जनता पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। वे है। वे है- 1 न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एन के जैन की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को राज्य सरकार को सौंपने का निर्णय, जिसमें इंदौर के महापौर होने पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय द्वारा कुछ कथित दुर्भावनाओं के बारे में उल्लेख किया गया है। 2. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की अश्लील हरकतों के बारे में खुलासा, और 3. आर्थिक सर्वेक्षण में रहस्योद्घाटन कि मध्य प्रदेश एक बीमारू राज्य बना हुआ है।

लालू परिवार में गृहयुद्ध

अपनी स्वाभाविक मौत की ओर बढ़ रहा है राजद
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-07-11 09:32 UTC
राष्ट्रीय जनता दल का स्थापना दिवस समारोह मनाया गया और उसके अगले दिन उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। दोनों दिन जो कुछ हुआ और जो देखने को मिला, उससे स्पष्ट है कि 1997 में गठित राष्ट्रीय जनता दल अपनी मौत की ओर बढ़ रहा है। जिंदा रहने की इसकी इच्छा शक्ति समाप्त हो गई है और यह एक पतवार विहीन नाव हो गया है।

कर्नाटक का नाटक

कुमारस्वामी सरकार शुरू से ही अस्थिर थी
कल्याणी शंकर - 2019-07-10 09:37 UTC
भारत में गठबंधन सरकारें सामान्य रूप से सफल क्यों नहीं होती? ऐसा राज्य और संघीय स्तर पर अलग अलग कारणों से होता है। यह एक या दो बार नहीं, बल्कि कई बार हुआ है।

बीएसपी पहली बार लड़ रही है उपचुनाव

गठबंधन से बाहर होने के बाद उसे मुस्लिम वोट शायद नहीं मिले
प्रदीप कपूर - 2019-07-09 10:56 UTC
लखनऊः 12 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव के नतीजे ही बताएंगे कि समाजवादी पार्टी के साथ गटबंधन को खत्म करने का बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का एकतरफा फैसला सही था या नहीं। उपचुनाव हो रहे हैं क्योंकि विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों ने लोकसभा चुनाव जीतकर अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों के विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया है। होने वाले उपचुनावों में पहली बार बसपा उपचुनाव लड़ रही है।