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भाजपा का विधान परिषद के गठन की योजना का विरोध

विधायक आवास के निर्माण पर भी विवाद
एल एस हरदेनिया - 2019-11-02 16:08 UTC
भोपालः झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में भारी जीत दर्ज करने के बाद कमलनाथ सरकार ने राज्य में विधान परिषद के गठन के लिए कदम उठाया है। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र (घोषणापत्र) में राज्य में उच्च सदन का गठन करने का वादा किया था। जैसा कि ऐसा करने की बात ज्ञात हो गई, भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल के रूप में इसे दुर्लभ राज्य संसाधनों की बर्बादी करार दिया, इस कदम को पार्टी में असंतुष्ट तत्वों को खुश करने का उद्देश्य बताया। मकसद सरकार को स्थिरता देना है जो बहुमत के लिए सुनिश्चित नहीं है।

कश्मीर में यूरोपीय सांसदों का क्या काम?

अनिल जैन - 2019-11-01 16:01 UTC
वैसे तो कश्मीर तब से ही भारत का अभिन्न अंग है, जब से उसका भारत में विलय हुआ है, लेकिन 5 अगस्त, 2019 के बाद से वह ऐसा और इतना ‘अभिन्न अंग’ हो गया है कि वहां केंद्र सरकार की मर्जी के बगैर भारतीय संसद के सदस्य नहीं जा सकते। जो जाने की कोशिश करते हैं, उन्हें श्रीनगर के हवाई अड्डे से बाहर नहीं निकलने दिया जाता और वहीं से वापस दिल्ली भेज दिया जाता है। वहां संसद के उच्च सदन में विपक्ष के नेता और उस सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री भी नहीं जा सकते। उन्हें वहां जाने के अपने अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगानी पडती है। सुप्रीम कोर्ट उन्हें जाने की अनुमति भी देता भी है तो तमाम तरह की शर्तों के साथ। वहां विदेशी पत्रकारों को जाने की तो कतई अनुमति नहीं है। नई दिल्ली स्थित विभिन्न देशों के राजनयिक भी वहां नहीं जा सकते। लेकिन यूरोपीय देशों में कार्यरत एक स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) से जुड़ी एक इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर की सिफारिश पर यूरोपीय संसद के 27 सदस्यों को भारत सरकार खुशी-खुशी वहां जाने देती है। हैरानी की बात यह कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में उन विदेशी सांसदों का खैरमकदम करते हैं।
मध्यप्रदेश का स्थापना दिवस - 1 नवम्बर

मेहनती लोगों का मध्यप्रदेश नई उड़ान क्यों नहीं भर सकता?

कमल नाथ (मुख्य मंत्री) - 2019-10-31 15:56 UTC
मध्यप्रदेश एक लंबा सफर तय कर चुका है। यह एक शानदार राज्य है। सिर्फ इसलिए नहीं कि यहाँ शांतिपूर्ण सांस्कृतिक विविधता है, मोहक जैव-विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य है या लुभावने स्मारक है। यह अपने शांतिप्रिय और मेहनती लोगों के कारण अद्वितीय है। सर्वधर्म समभाव मध्यप्रदेश की पहचान है।

उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में मायावती का सपना चकनाचूर

उपेन्द्र प्रसाद - 2019-10-31 08:50 UTC
उत्तर प्रदेश में 11 विधानसभाओं के उपचुनाव भाजपा, सपा और बसपा के लिए अपने अपने कारणों से महत्वपूर्ण थे। भारतीय जनता पार्टी को यह दिखाना था कि उत्तर प्रदेश के मतदाताओं पर अभी भी उसका सिक्का चलता है। इसे साबित करने में वह सफल रही। 11 में से 7 सीटों पर तो उसके अपने उम्मीदवारों की जीत हुई, जबकि एक अन्य सीट पर उसका सहयोगी अपना दल सफल हुआ। समाजवादी पार्टी को यह दिखाना था कि लोकसभा चुनाव में लगे झटके से वह उबर रही है। यह दिखाने में वह सफल भी रही। उसने आजमगढ़ की अपनी सीट तो बचाई ही, साथ ही साथ भाजपा और बसपा की एक-एक सीट छीन भी ली।

असम और पूर्वोत्तर में बार-बार बाढ़ आने की समस्या

चीन और भूटान के साथ एक संपूर्ण जल समझौता बहुत जरूरी है
आशीष बिश्वास - 2019-10-31 01:42 UTC
भारत को अपने पूर्वोत्तर क्षेत्र को बाढ़, भूमि कटाव और विनाश से बचाने के लिए चीन और भूटान के साथ नए समझौते करने की तत्काल आवश्यकता है। असम के नीति निर्धारक और अर्थशास्त्री इसे पहले से कहीं अधिक मजबूती से महसूस करते हैं, खासकर विनाशकारी बाढ़ के सबसे हालिया अनुभव के बाद। इस साल, असम-आधारित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 100 लोग मारे गए, जबकि संपत्ति के नुकसान का आकलन रूढ़िवादी रूप से 5000 करोड़ रुपये था। भारत के पूर्वोत्तर में सबसे बड़ा राज्य असम बांग्लादेश के साथ ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नदियों को साझा करता है। भूटान में बहने वाली नदियों के अतिरिक्त पानी को प्राप्त करने के लिए, इसे बहाव क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है।

महाराष्ट्र-हरियाणा चुनाव के संदेश

झारखंड में हो सकती है भाजपा की करारी हार
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-10-29 11:45 UTC
भारतीय जनता पार्टी की चुनावी मजबूती के तीन कारण हैं। पहला कारण उसके विरोधियों का कमजोर होना और लोगों के बीच उनकी विश्वसनीयता लगभग नगण्य होना है। दूसरा कारण देश की जातिवादी राजनीति में भाजपा का जाति समीकरण मजबूत होना। नरेन्द्र मोदी के कारण भाजपा ने एक अभेद्य जाति समीकरण बना रखा है, जिसका कोई तोड़ उनके विरोधियों के पास अभी नहीं है। भाजपा की जीत का तीसरा कारण मुस्लिम फैक्टर है। मुस्लिम विरोधी भावना भड़का कर भाजपा हिन्दुओं का वोट लेती है और अपने विरोधियों पर भारी पड़ जाती है।

कांतिलाल भूरिया बन सकते हैं मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

पड़ रहा है कमलनाथ पर दबाव
एल.एस. हरदेनिया - 2019-10-28 12:11 UTC
भोपालः झाबुआ विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए गंभीर परिणाम हैं। भाजपा में जहां हार के कारणों का विश्लेषण करते हुए असंतोष की आवाजें उठाई जा रही हैं, वहीं कांग्रेस में फुसफुसाहट सुनाई दे रही है क्योंकि पार्टी के दिग्गज कांति लाल भूरिया की जीत संभव हो गयी है।

क्यों न गांधीवादी अर्थव्यवस्था को एक मौका मिले?

विफल हो रही है आधुनिक मशीनी अर्थव्यवस्था
अनिल सिन्हा - 2019-10-26 07:39 UTC
मंदी की ओर तेजी से बढती जा रही अर्थव्यवस्था को बचाने के उपायों की चर्चा आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण बहस है। भारत जैसे मुल्क के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की बड़ी आबादी के पास कोई जमा पूंजी नहीं है, जिसके सहारे वह अपना जीवन चला ले। अपने देश में सामाजिक सुरक्षा की भी इतनी ख्रराब हालत है कि बेरोजगार और अशक्त लोगों को संभालना मुश्किल है। इसे हम किसानों की आत्महत्या से समझ सकते हैं। बैंक उन्हें कर्ज दे देता है, लेकिन उसके डूब जाने की हालत मे ंउसकी जान बचाने का कोई सामाजिक उपाय हमारे पास नहीं है।

भाजपा को चुनावी झटका

वे खबरें जो इन नतीजों से निकल रही हैं
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-10-25 10:40 UTC
दो राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव और अनेक राज्यों के उपचुनावों के नतीजों ने भाजपा को एक ऐसा झटका दिया है, जिसकी उम्मीद उसके नेता नहीं कर रहे थे। ये चुनाव जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने की पृष्ठभूमि में हो रहे थे। जम्मू और कश्मीर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा के अन्य नेता चुनाव में मुद्दा बना रहे थे। इस मुद्दे पर सरकार को देश की एक बहुत बड़ी आबादी की समर्थन भी हासिल है। देश की विशाल आबादी इस बात से खुश है कि प्रधानमंत्री ने आखिरकार साहस दिखाकर कश्मीर में कुछ करने का निर्णय लिया। लेकिन इसके बावजूद देश भर में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी मनचाहा नतीजा नहीं पा सकी।

भारत में निजता की सुरक्षा के लिए अगले तीन महीने महत्वपूर्ण

नए नियम स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के लिए खतरा
के रवीन्द्रन - 2019-10-24 09:15 UTC
अगले तीन महीने व्यक्तिगत गोपनीयता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक और व्हाट्सएप की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया है कि उनके उपयोगकर्ताओं के निजी संदेशों को उच्च न्यायालयों से लेकर शीर्ष अदालत में हस्तांतरित करने के कई मामले हैं, ताकि बिचैलियों को नियंत्रित करने वाले नियमों को अंतिम रूप दिया जा सके। अगली सुनवाई अगले 15 जनवरी के लिए निर्धारित है।