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वाराणसी से प्रियंका का पलायन

क्या राहुल अभी भी राजनैतिक पप्पू हैं?
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-04-26 13:07 UTC
प्रियंका गांधी का लगभग घोषणा करके वाराणसी से चुनावी रण से भाग खड़ा होना पार्टी के रूप में कांग्रेस की राजनैतिक अपरिपक्वता का एक ताजा सबूत है। प्रियंका गांधी पिछले कई दिनों से कह रही थीं कि वह वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहती हैं। सबसे पहले उन्होंने रायबरेली की एक सभा में सवाल पूछते हुए ऐसा कहा था। रायबरेली के मतदाता नारा लगा रहे थे कि प्रियंका अपनी मां के क्षेत्र से ही चुनाव लड़ें और मां सोनिया का विश्राम दे दें। तब प्रियंका गांधी ने मतदाताओं से पूछा था कि उन्हें रायबरेली से क्यों और वाराणसी से क्यों नहीं चुनाव लड़ना चाहिए। ऐसा कहकर उन्होंने रायबरेली के मतदाताओं को शांत कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में ‘चौकीदार चोर है’

दोनों पक्ष अपनी अपनी राजनीति में अदालत का इस्तेमाल कर रहे हैं
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-04-25 09:38 UTC
सुप्रीम कोर्ट में अपने एक बयान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खेद भी जता दिया है, लेकिन मामला खेद जताने मात्र से समाप्त नहीं हुआ है और भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की मानहानि का जो मामला दर्ज किया है, वह अभी अपनी तार्किक परिणति तक नहीं पहुंचा है। वह मामला राहुल गांधी के ‘चैकीदार चोर है’ अभियान से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष ने राफेल सौदे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा बना रखा है। वह पिछले दो-एक वर्षों से इस मुद्दे को बार बार उठा रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी इससे खासा परेशानी महसूस कर रही है।

मध्य प्रदेश भाजपा में विद्रोह

प्रज्ञा लगातार सांप्रदायिक बयान कर रही हैं जारी
एल एस हरदेनिया - 2019-04-24 20:24 UTC
भोपालः कांग्रेस और भाजपा दोनों ने लोकसभा की 29 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है। अंतिम सूची के बाद भाजपा कम से कम चार निर्वाचन क्षेत्रों में विद्रोह का सामना कर रही है। वे चार निर्वाचन क्षेत्र खजुराहो, बालाघाट, शादोल और इंदौर हैं।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 140वें स्थान पर

पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा
योगेश कुमार गोयल - 2019-04-23 12:46 UTC
प्रेस को लोकतंत्र में सदैव चैथे स्तंभ की संज्ञा दी जाती रही है क्योंकि इसकी लोकतंत्र की मजबूती में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र के लिए प्रेस की स्वतंत्रता को बहुत अहम माना गया है लेकिन पेरिस स्थित ‘रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स’ (आरएसएफ) अथवा ‘रिपोर्टर्स विदआउट बाॅर्डर्स’ नामक संस्था ने 18 अप्रैल को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर जो तथ्य पेश किए हैं, उससे हर किसी को असहनीय झटका लगा है। एक तरफ जहां देश में लोकसभा चुनाव का दौर चल रहा है और इस चुनावी माहौल में प्रेस की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है, ऐसे में यह तथ्य सामने आना कि भारत प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में दो पायदान और नीचे खिसक गया है, चिंता का विषय है। कुल 180 देशों पर आधारित इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत अब 140वें स्थान पर पहुंच गया है, जो 2017 में 136वें स्थान पर और 2018 में 138वें पायदान पर था।

प्रधान न्यायाधीश पर यौन हिंसा का आरोप

खतरे में में पूरे तंत्र की विश्वसनीयता
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-04-22 14:07 UTC
आजादी के बाद यह अपने किस्म की पहली घटना है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश पर उनके मातहत काम करने वाली एक महिला स्टाफ ने न केवल अपने खिलाफ प्रधान न्यायाधीश के हाथों यौन हिंसा का आरोप लगाया है, बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देने का भी आरोप लगाया है। न्यायपालिका व्यवस्था का वह अंग है, जहां लोग अपने खिलाफ हो रहे अन्याय से राहत पाने के लिए फरियाद के साथ जाते हैं। वे न्याय की याचना करते हैं और यदि उनके साथ अपराध हो गया हो, तो अपराधियों को दंड दिलाने के लिए अदालत की शरण लेते हैं।

चुनाव आते ही क्यों शुरू हो जाता है ईवीएम राग?

ईवीएम को लेकर अनावश्यक विवाद
योगेश कुमार गोयल - 2019-04-18 19:18 UTC
विगत दिनों जब सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के मतों की वीवीपैट पर्चियों से मिलान की संख्या पांच करने का निर्णय सुनाया था तो उम्मीद जगी थी कि इस निर्णय के बाद ईवीएम राग शांत हो जाएगा किन्तु प्रथम चरण के मतदान के बाद जिस प्रकार 21 विपक्षी दलों ने एकजुट होकर एक बार फिर ईवीएम में गड़बड़ियों के आरोप लगाकर सारा ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है, उससे यह आईने की तरह साफ हो गया है कि लोकसभा चुनाव के परिणाम आने तक तो ईवीएम राग शांत नहीं होने वाला है। इससे पहले विपक्षी दलों की वीवीपैट की 50 फीसदी पर्चियों की गिनती की मांग को अव्यावहारिक मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को निर्देशित किया था कि वह हर विधानसभा क्षेत्र से एक के बजाय पांच मतदान केन्द्रों से मतों की गिनती करे। फिलहाल सारा विवाद पहले चरण के मतदान के तुरंत बाद तब खड़ा हुआ, जब आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों और 175 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा आशंका जताई जाने लगी कि उनके राज्य में चुनाव प्रक्रिया में काफी गड़बड़ियां हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट में भारत का चुनाव आयोग

इसे चुनाव आयोग की लाचारी कहा जाए या मक्कारी?
अनिल जैन - 2019-04-18 19:15 UTC
चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव में नेताओं की आपत्तिजनक बयानबाजी पर अंकुश लगाने के लिए उसके पास पर्याप्त अधिकार नहीं है। यह बात आयोग के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कही है। हालांकि अपनी इस लचर दलील के बावजूद आयोग ने चुनावी रैलियों में जाति और धर्म के आधार पर विद्वेष फैलाने वाले भाषण देने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा नेता आजम खान के लिए 72 घंटे के लिए तथा बसपा अध्यक्ष मायावती और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के लिए 48 घंटे तक चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। मायावती ने गत 7 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के देवबंद में एक रैली को संबोधित करते हुए मुस्लिम समुदाय से एकजुट होकर अपने महागठबंधन के पक्ष में मतदान करने की अपील की थी। मायावती की इस अपील के जवाब में योगी आदित्यनाथ ने सपा, बसपा और कांग्रेस को अली की पार्टी बताते हुए बजरंगबली के नाम हिंदुओं से भाजपा को वोट देने के लिए कहा था। आजम खान ने अपने विरोधी नेताओं पर अभद्र टिप्पणी की थी और मेनका गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान मुसलमानों से कहा था कि अगर मुझे वोट नहीं दिया तो फिर मैं देख लूंगी।

योगी-माया पर अस्थाई प्रतिबंध

वोटर लिस्ट से नाम भी हटा सकता है निर्वाचन आयोग
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-04-16 09:56 UTC
आखिर निर्वाचन आयोग को कार्रवाई करनी ही पड़ी। सुप्रीम कोर्ट में उसके वकील ने कहा था कि विभाजक बयानबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ वे इसलिए कार्रवाई नहीं कर पाता है, क्योंकि उसके अधिकार बहुत सीमित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी कि आयोग के अधिकार सीमित क्यों हैं। फिर भी पूछा था कि वह अगले दिन यह बताए कि उसने क्या किया।
महावीर जयंती पर विशेष

भगवान महावीर के अनमोल वचन

जब अंगूठे से निकली थी दूध की धारा
योगेश कुमार गोयल - 2019-04-15 07:40 UTC
भगवान महावीर एक बार सुवर्णबालिका नामक नदी के नजदीक स्थित कनखल नामक आश्रम के पास से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने पीछे से एक ग्वाले की भयाक्रांत आवाज सुनी। ग्वाले ने भयभीत स्वर में भगवान महावीर से कहा, ‘‘हे देव! कृपया आप यहीं रूक जाएं, यहां से आगे न जाएं क्योंकि इसी मार्ग पर आगे एक बहुत भयानक और अत्यंत विषैला काला नाग रहता है, जिसने अभी तक इसी राह पर जाने वाले सैंकड़ों राहगीरों को अपने विष की ज्वाला से भस्म कर दिया है। उस विषधर की विषाग्नि से हजारों पशु-पक्षी, पेड़-पौधे जलकर राख हो चुके हैं।’’

उत्तर प्रदेश के मुसलमान भारी संशय में

कांग्रेस और सपा-बसपा में किसे चुनें?
प्रदीप कपूर - 2019-04-13 10:28 UTC
लखनऊः आठ लोकसभा सीटों के लिए पहले चरण के मतदान से पहले मुस्लिम समुदाय को अपील जारी करने के लिए बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को मुस्लिम समर्थन पाने की हताशा ने मजबूर किया। गौरतलब होगा कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पहले मुस्लिम समुदाय को बसपा-सपा-रालोद के गठबंधन का समर्थन करने की अपील जारी की और फिर स्पष्ट रूप से मुस्लिम समुदाय से कहा कि वे कांग्रेस पार्टी को अपना वोट न दें, जो उनके गठबंधन की तुलना में बहुत कमजोर है।