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चुनावी बांड्स पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

क्या धनतंत्र के चंगुल से निकल पाएगा हमारा लोकतंत्र
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-04-12 08:49 UTC
चुनावी बांड्स पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। यह फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन इससे इस बात को लेकर पूरी तसल्ली नहीं मिलती कि धनतंत्र के चंगुल में फंसा हमारा लोकतंत्र इस चंगुल से बाहर आ जाएगा। यह फैसला मोदी सरकार की चुनावी बांड्स योजना से संबंधित है, जिसे अवैध घोषित करार दिए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट मंे एक याचिका दाखिल की गई थी। यह योजना मोदी सरकार ने चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता लाने के दावे के साथ शुरू की थी, लेकिन यह समझ से बाहर की बात थी कि जब दानदाता ही छुपा हुआ हो, तो फिर इस योजना को पारदर्शी योजना कैसे कहा जा सकता है।

श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है रामनवमी

मर्यादा पुरूषोत्तम क्यों कहलाए राम?
योगेश कुमार गोयल - 2019-04-11 11:07 UTC
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष नवमी को रामनवमी का त्यौहार प्रतिवर्ष भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में समूचे भारतवर्ष में अपार श्रद्धा, भक्ति व उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में उत्सवों का विशेष आयोजन होता है, जिनमें भाग लेने के लिए देशभर से हजारों भक्तगण अयोध्या पहुंचते हैं तथा अयोध्या स्थित सरयू नदी में पवित्र स्नान कर पंचकोसी की परिक्रमा करते हैं। समूची अयोध्या नगरी इस दिन पूरी तरह राममय नजर आती है और हर तरफ भजन-कीर्तनों तथा अखण्ड रामायण के पाठ की गूंज सुनाई पड़ती है। देशभर में अन्य स्थानों पर भी जगह-जगह इस दिन श्रद्धापूर्वक हवन, व्रत, उपवास, यज्ञ, दान-पुण्य आदि विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। विभिन्न हिन्दू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि श्रीराम का जन्म नवरात्र के अवसर पर नवदुर्गा के पाठ के समापन के पश्चात् हुआ था और उनके शरीर में मां दुर्गा की नवीं शक्ति जागृत थी। मान्यता है कि त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या के महाराजा दशरथ की पटरानी महारानी कौशल्या ने मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम को जन्म दिया था।

कमलनाथ से जुड़े लोगों पर आई छापे

राज्य सरकार भी कर सकती है जवाबी कार्रवाई
एल एस हरदेनिया - 2019-04-10 13:19 UTC
भोपालः भोपाल में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं घटी हैं, जो मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव का रूप ले सकती हैं। ऐसा ही एक घटना राज्य की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव को लिखा गया पत्र है।

आडवाणी के इस अरण्यरुदन पर कौन कान देगा?

अनिल जैन - 2019-04-09 09:51 UTC
भारतीय जनता पार्टी में इस समय कतिपय नेताओं के लिए ‘विवेक-जागरण’ का काल चल रहा है। मार्गदर्शक और वरिष्ठ लेकिन हाशिए पर पटक दिए गए नेताओं के श्रीमुख से बहुत ही अच्छी-अच्छी और प्यारी-प्यारी बातें निकल रही हैं। इतनी अच्छी और प्यारी कि जाहिरा तौर पर कोई भी उनसे असहमत नहीं हो सकता। पिछले पांच वर्षों से पार्टी में उपेक्षा, तिरस्कार और अकेलापन झेल रहे भाजपा के संस्थापकों में से एक उम्रदराज लालकृष्ण आडवाणी ने लम्बे समय बाद एक ब्लॉग लिखकर अपनी चुप्पी तोडते हुए कहा है कि उनकी पार्टी ने राजनीतिक रूप से असहमत होने वाले को कभी ‘राष्ट्र विरोधी’ नहीं माना है।

मायावती की मुसलमानों से सांप्रदायिक अपील

बाल ठाकरे की तरह माया का नाम भी मतदाता सूची से बाहर हो
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-04-08 09:53 UTC
मायावती अपने आपको सेकुलर कहती हैं। एक बार लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल से मिलकर उन्होंने सेकुलर फेडरेशन भी बनाया था। सेकुलरिज्म की खातिर उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार का समर्थन भी किया था। मध्यप्रदेश में अभी भी कांग्रेस का समर्थन वह सेकुलरिज्म की दुहाइे देते हुए कर रही हैं, अन्यथा वह कांग्रेस की विरोधी हैं और देश की सबसे पुरानी पार्टी के खिलाफ जहर उगलने का कोई मौका नहीं छोड़ती।

लालू परिवार मे घमसान

तेज प्रताप के साथ अच्छा नहीं हुआ
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-04-06 10:09 UTC
लालू परिवार में चल रहा राजनैतिक घमसान कथित महागठबंधन के लिए एक बहुत बड़ा अपशकुन है। बिहार में पहले से ही राजनैतिक हालात इस गठबंधन के पक्ष में नहीं है। जमीनी हकीकत यह है कि मोदी और नीतीश की जोड़ी आज बहुत ही मजबूत स्थिति में है। यह सच है कि मोदी का जादू अब 2014 की तरह नहीं चल रहा है, लेकिन उनके साथ नीतीश के जुड़ जाने के बाद राजग बहुत मजबूत हो गया है। यादव और मुसलमान को छोड़कर प्रदेश के अन्य सारे समुदायों में मोदी और नीतीश के पक्ष में माहौल है।

प्रियंका ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सक्रिय कर दिया है

मुस्लिम और ब्राह्मण पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं
प्रदीप कपूर - 2019-04-04 08:51 UTC
लखनऊः प्रियंका गांधी वाड्रा के कारण कांग्रेस पार्टी के उत्तर प्रदेश में पुनरुत्थान ने एक तरफ बीजेपी तो दूसरी तरफ सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन को बेवजह परेशान किया है। प्रियंका गांधी के कारण ब्राह्मणों, युवा, गैर-यादव ओबीसी, शहरी और ग्रामीण युवाओं और पूर्वी यूपी में गरीब किसानों के कांग्रेस की ओर आकर्षित होने की संभावना है।

राजनीति को अमीरों की जेब से निकालें

मुद्दा आधारित राजनीति स्थापित करने का समय
कन्हैया कुमार - 2019-04-03 10:10 UTC
घटनाएं कुछ इस तरह से घटीं कि मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब एक राजनेता बन गया। मेरा नेता बन जाना महज एक दुर्घटना है। वैसे मैं हमेशा राजनीतिक रहा हूं, लेकिन कुछ साल पहले तक मुझे और मेरे दोस्तों को लोकसभा का चुनाव लड़ने के किसी भी सुझाव पर हंसी आती थी।

समझौता पर फैसलाः उठ रहे हैं अनेक सवाल

एल एस हरदेनिया - 2019-04-02 11:53 UTC
समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट में 68 लोग मारे गए थे। परंतु इस अपराध के लिए जिन आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया था उन्हें अदालत ने निर्दोष पाया। अदालत के फैसले के बाद अनेक प्रश्न उठ रहे हैं।

दुनिया का सबसे महंगा आम चुनाव

चुनावों में धन-बल का बढ़ता इस्तेमाल
योगेश कुमार गोयल - 2019-04-01 10:27 UTC
देशभर में लोकसभा चुनाव को लेकर माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है, तमाम छोटे-बड़े राजनीतिक दलों ने महासमर जीतने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी है। चुनाव चाहे छोटे स्तर पर हो या फिर लोकसभा जैसे बड़े स्तर का, प्रत्येक चुनाव में साम, दाम, दंड, भेद हर प्रकार के हथकंडे अपनाते हुए चुनाव जीतने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया जाता रहा है। यही वजह है कि हमारे यहां हर चुनाव में बहुत बड़ी धनराशि चुनाव प्रक्रिया पर ही खर्च हो जाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में करीब 5 अरब डाॅलर अर्थात् 35 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया था। विधानसभा चुनावों के मामले में खर्चीले चुनाव की बात करें तो कर्नाटक का पिछला विधानसभा चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खर्च किए गए धन के मामले में अब तक का देश में सबसे महंगा विधानसभा चुनाव रहा, जहां 9.5-10.5 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था, जो कर्नाटक के उससे पहले के चुनावी खर्च से दोगुना था।