कश्मीर पर नई दिल्ली का वही पुराना रवैया
कश्मीर की अस्मिता को स्वीकारे बगैर इस समस्या का हल नहीं हो सकता
-
2019-01-07 11:07 UTC
जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लग गया है और उसे संसदीय मंजूरी भी मिल गई है। मंजूरी के लिए राज्यसभा में हुई बहस से फिर एक बार साबित हुआ कि देश का नेतृत्व निहायत असंवेदनशील लोगों के हाथ में है। इससे यही साबित हुआ कि नई दिल्ली सैनिक तंत्र के जरिए ही घाटी पर शासन करना चाहती है। विपक्ष ने भी बेचारगी ही दिखाई है। सीपीएम के सांसद रंगराजन को छोड़ कर किसी ने वहां के नागरिकोें की हत्या की जांच और इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग नहीं की और सीपीआई नेता डी राजा को छोड़ कर किसी ने पाकिस्तान और भारत की जनता के बीच अच्छे संबंध बनाने की बात नहीं कही।