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तेजी से बदल रही है कांग्रेस

राहुल ने राजनीति के फोकस को बदल दिया है
अनिल सिन्हा - 2018-12-31 11:17 UTC
हम लोग तेजी से 2019 के लोक सभा चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं और देश की राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। पिछले दिनों में हमने बहस का एक ऐसा ढांच विकसित कर लिया है कि समाज, अर्थ और राजनीति- सभी क्षेत्रों की पड़ताल कुछ चुने हुए सवालों को ही लेकर होती है। यही कांग्रेस में हो रहे बदलाव को भी लेकर हुआ है। हम यह देख नहीं पा रहे हैं की राहुल गांधी ने कांग्रेस की राजनीति में कितने बदलाव ला दिए हैं। इनके असर में देश की राजनीति भी बदल रही है। यह सच है कि कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति ठहर चुकी थी। इसे लोकतांत्रिक बनाना लगभग नामुमकिन ही था। मीडिया का बड़ा हिस्सा इन बदलावों पर नजर डालने के लिए अभी भी तैयार नहीं है। लोग मानें या न मानें, राहुल ने बरसों से तंग रही कांग्रेस की राजनीति को फैला दिया है और देश की राजनीति के फोकस को भी बदल दिया है।

नये साल की नई चुनौतियां

क्या मोदी फिर अपनी सरकार बना पाएंगे?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-12-29 10:56 UTC
नया साल भारत के लिए कैसा रहेगा- इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है। भारत संक्रमण के दौर से गुजर रहा है और पिछले कुछ सालों में देश की राजनीति, समाज और अर्थतंत्र में जबर्दस्त बदलाव आए हैं। डिजिटल दुनिया में भी भारी बदलाव आया है और यह देश को जबर्दस्त तरीके से झकझोरने के काम कर रहा है। बदलाव के इस पड़ाव पर 2019 में एक बड़ी राजनैतिक घटना घटने वाली है और वह घटना है लोकसभा का आमचुनाव, जो यह निर्णय करेगा कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर सत्ता हासिल कर पाएंगे या नया साल सत्ता से उनकी बिदाई कर देगा।

गूगल पर सर्वाधिक खोजी जाने वाली खिलाड़ी बन गई सिंधु

भारतीय बैडमिंटन का जगमगाता सितारा पीवी सिंधु
योगेश कुमार गोयल - 2018-12-28 20:24 UTC
रियो ओलम्पिक रजत पदक विजेता और इस वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों तथा विश्व चैंम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वाली भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु (पुसरला वेंकट सिंधु) ने ग्वांगझू में ‘बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर फाइनल्स’ में ऐतिहासिक खिताबी जीत हासिल कर भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। सिंधु के लिए यह जीत ऐतिहासक इसलिए मानी जा रही है क्योंकि वह एक ओर जहां अभी तक लगातार सात फाइनल मुकाबलों में हार का सामना कर चुकी थी, वहीं साल के अंत में मिला उनका इस साल का यह पहला खिताब है। इस स्वर्णिम जीत के बाद सिंधु ने स्वयं कहा भी है कि हर बार लोग उनसे एक ही सवाल पूछते थे कि वह बार-बार फाइनल में क्यों हार जाती हैं किन्तु इस जीत के बाद अब यह सवाल उनसे दोबारा नहीं पूछा जाएगा, इसीलिए यह जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके लिए उन्हें गर्व है। इस शानदार जीत के बाद सिंधु सर्च इंजन ‘गूगल’ पर सर्वाधिक खोजी जाने वाली भारतीय खिलाड़ी भी बन गई हैं।

कांग्रेस का आधार सुरक्षित करने के लिए कमलनाथ का समय से संघर्ष

लोक सभा चुनावों की गर्मी से मध्यप्रदेश तपा
हरिहर स्वरूप - 2018-12-27 11:10 UTC
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ एक कुशल राजनीतिक रणनीतिकार हैं। उन्हें पता है कि उनके पास 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए ज्यादा समय नहीं है। जिस तीव्रता के साथ सीएम ने नई सरकार के दो फैसलों की उन्होंने घोषणा की, उसने बीजेपी को चैंका दिया। पहली घोषणा तो किसानों की कर्जमाफी की घोषणा है और दूसरी घोषणा निजी उद्योगों के 70 फीसदी रोजगार स्थानीय लोगों को दिए जाने से संबंधित है।

कोलेबिरा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत

क्या कांग्रेस हिन्दी क्षेत्र में अपना जनाधार वापस पा रही है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-12-26 13:57 UTC
एक उपचुनाव के नतीजे को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। इसलिए यदि झारखंड के कोलेबिरा विघानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की जीत से कोई खास निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। लेकिन यह उपचुनाव एक विशेष माहौल में हुआ था। इस उपचुनाव के मतदान के कुछ दिन पहले ही तीन हिन्दी प्रदेशों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आए थे और तीनों में भारतीय जनता पार्टी पराजित हुई थी और कांग्रेस ने जीत हासिल की थी।

चौहान के हिंदू तुष्टिकरण की नीति विफल हुई

पक्षपातपूर्ण कार्यक्रमों के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल हुआ
एल एस हरदेनिया - 2018-12-22 20:24 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि हिंदुत्व की अपील की नीति ने शिवराज सिंह को फायदा नहीं पहुंचाया। वास्तव में, उन्होंने मध्यप्रदेश को हिन्दू राष्ट्र के रूप में बदलने के लिए सभी प्रयास किए। सबसे पहला कदम तो सरकारी कर्मचारियों पर आरएसएस की गतिविधियों में भाग लेने वाले प्रतिबंध को उठाना था। शायद मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला पहला राज्य था।

मायावती को भाजपा से दूर रखने को अखिलेश बेकरार

पर बसपा अन्य पार्टियों के प्रति नहीं दिखा रहीं उदारता
प्रदीप कपूर - 2018-12-20 09:32 UTC
लखनऊः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव केंद्र से बीजेपी को हटाने के लिए बीएसपी नेता मायावती को जरूरत से ज्यादा महत्व दे रहे हैं और उनके पिछलग्गू तक बन गए हैं। तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित, अखिलेश यादव 2019 के लोकसभा चुनावों में मायावती के लिए और सीटें छोड़ने को तैयार हैं।

क्यों छाये हैं एटीएम पर संकट के बादल?

इसका समाधान संभव है
योगेश कुमार गोयल - 2018-12-19 14:02 UTC
एटीएम उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘कैटमी’ (कन्फेडरेशन आॅफ एटीएम इंडस्ट्री) ने गत दिनों चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक अर्थात् मार्च 2019 तक देश के करीब 50 फीसदी एटीएम बंद हो जाएंगे। इस चेतावनी के बाद से ही बैंकिंग क्षेत्र में चिंता का माहौल है। हालांकि बंद होने वाले अधिकांश एटीएम गैर शहरी क्षेत्रों के ही होंगे किन्तु अगर ऐसा होता है तो गैर शहरी क्षेत्रों में भी इससे आमजन के लिए परेशानियां बढ़ जाएंगी, जिसका असर सरकार की ओर से दी जाने वाली विभिन्न सब्सिडी को एटीएम के जरिये खातों से निकालने पर पड़ेगा। ग्रामीण अंचलों में बहुत बड़ी संख्या जन-धन खाताधारकों तथा मनरेगा, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन सरीखी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की है और नोटबंदी के बाद हर प्रकार के खाताधारकों और एटीएम का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में एटीएम बंद होने का सीधा असर ऐसे बैंक उपभोक्ताओं और एटीएम धारकों पर पड़ना तय है। अगर एटीएम बंद होते हैं तो नकदी निकालने के लिए बैंकों में फिर से लंबी-लंबी लाइनें नजर आ सकती हैं।

अखिलेश पर माया का साया

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की संभावना धूमिल
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-12-18 13:38 UTC
अब इसकी संभावना बहुत बढ़ गई है कि उत्तर प्रदेश के सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं किया जाएगा। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के शपथग्रहण समारोह में न जाकर मायावती और अखिलेश ने स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। मध्यप्रदेश में बिना मांगे कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाले सपा-बसपा नेता द्वारा अपनी ही समर्थित मध्यप्रदेश सरकार के शपथग्रहण समारोह में नहीं जाना विशेष राजनैतिक महत्व रखता है।

कांग्रेस मुख्यमंत्रियों के चयन में एक परिवार की भूमिका

लोकतंत्र पर परिवारतंत्र का हावी होना राष्ट्रहित में कदापि नहीं
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-12-17 13:25 UTC
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम में तेलंगाना को छोड़ सत्ता विरोधी लहर के कारण राजस्थान छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश एवं मिजोरम राज्यों में सत्ता परिवर्तन तो हो गया पर राजस्थान, छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश में जहां कांग्रेस के पक्ष में जनमत आया वहां लोकतांत्रिक ढंग से नेतृृत्व का चयन न हो पाना लोकतंत्र पर परिवारतंत्र का हावी होना दर्शाता है, जिसे राष्ट्रहित में कदापि नहीं कहा जा सकता। राजस्थान, छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश में दल के नेता चुनने की प्रक्रिया में बुलाई गई विधायकों की बैठक में एक नाम पर सहमति नहीं बन पाने के कारण दल के नेता तय करने का मामला कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के पास पहुंच गया जहां इस मसले पर निर्णय लेने में गांधी परिवार की भूमिका उभरती नजर आई।