बैंकों के एनपीए को लेकर भी गलतबयानी
अनिल जैन
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2018-02-08 10:32 UTC
एक राजनेता के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘ख्याति’ भले ही एक कामयाब मजमा जुटाऊ भाषणबाज की रही हो, लेकिन उन पर यह ‘आरोप’ कतई नहीं लग सकता है कि वे आमतौर पर एक शालीन और गंभीर वक्ता है! चुनावी रैली हो या संसद, लालकिले की प्राचीर हो या फिर विदेशी धरती, मोदी की भाषण- शैली आमतौर पर एक जैसी रहती है- वही भाषा, वही अहंकारयुक्त हाव-भाव, राजनीतिक विरोधियों पर वही छिछले कटाक्ष, वही स्तरहीन मुहावरे। आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर गलत बयानी, तथ्यों की मनमाने ढंग से तोड़-मरोड़, सांप्रदायिक तल्खी और नफरत से भरे जुमलों और आत्मप्रशंसा का भी उनके भाषणों में भरपूर शुमार रहता है।