भारत में शासन-प्रणाली में बदलाव की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट की ईमानदारी तथा विश्वसनीयता दांव पर
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2018-01-15 12:01 UTC
भारत की शासन प्रणाली के तीन हिस्सों-कार्यपालिका, विधायिका तथा न्याययापालिका के ईमानदार तथा निष्पक्ष होने को लेकर आम तौर पर विश्वास है। विधायिका के सदस्यों, कार्यपालिका में बड़े ओहदे पर बैठे अधिकारियों तथा मंत्रियों और न्यायपालिका के जजों की अनियमिताओं और अन्याय के सामने पूरी तरह लाचार है। लोगों को अन्याय के खिलाफ सीमित उपचार था, और उनमें से कई पूरी तरह असहाय हैं, यह सच्चाई बाहर आ गई है और मुख्य न्यायाधीश के ठीक नीचे के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने इसे प्रेस के सामने स्वीकार किया है। उन्होंने यहां तक आारोप लगाया कि ‘न्यायालय के नियमों की अवहेलना कर मुकदमे पसंदीदा खंडपीठों को सौंपे जाते हैं।’ यह भारत में पहली बार हुआ है कि कार्यपालिका के ‘असली मुखिया‘ और ’न्यायपालिका के ’वास्तविक प्रधान’ दोनों के पर ’परंपराओं तथा मानदंडों’ के खिलाफ अपनी मनमर्जी से काम करने के आरोप हैं।