नोटबंदी के एक साल: खोदा पहाड़ निकली चूहिया
- 2017-11-04 12:33 UTCप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के दो बड़ी करेंसी नोट को प्रचलन से रोकने की घोषणा के एक साल पूरे होने हैं। आजादी के बाद किसी सरकार द्वारा लिया गया यह सबसे बड़ा नीतिगत फैसला था और फैसले के बाद जिस तरह का इसे समर्थन मिला था, वह भी अभूतपूर्व था। इसे एक बड़ी क्रांति माना गया था, जिसमें बिना किसी एक गोली चलाए व्यवस्था परिवर्तन को अंजाम दिया गया मान लिया गया था। लगने लगा था कि काला धन रखने वालों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं और देश एक ऐसे काल में प्रवेश कर गया है, जिसमें अवैध रूप से धन संग्रह करना अतीत की बात बन जाएगी। लिहाजा इस घोषणा को देश के आमलोगों का जबर्दस्त समर्थन मिला। जो लोग इसका विरोध कर रहे थे, उन्हें या तो लोगों ने गंभीरता से लिया ही नहीं या उन्हें काले धन के मालिकों का हमदर्द मान लिया गया।