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गुजरात विधानसभा चुनावः मोदी के लिए क्यों है यह बहुत महत्वपूर्ण

उपेन्द्र प्रसाद - 2017-10-10 14:06 UTC
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन वहां चुनावी संग्राम शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अबतक वहां की ताबड़तोड़ तीन यात्राएं कर डाली हैं और उनकी ये यात्रा सरकारी कम चुनावी ज्यादा होती हैं। गुजरात को उन्होंने बुलेट ट्रेन की सौगात दी है। ताजा यात्रा के पहले जीएसटी मे बदलाव कर वहां के व्यापारी वर्ग को राहत देने की कोशिश की। मोदी ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनावों की तरह ही लेते हैं। आखिर ऐसा वे करें क्यों नहीं, क्योकि अपनी पार्टी को वोट दिलाने वाले वे अब अकेले नेता रह गए हैं। पार्टी जीत के लिए उनपर पूरी तरह निर्भर हो गई है। जहां मोदी का सिक्का चलता है, वहां भाजपा की जीत हो जाती है। बिहार में मोदी का सिक्का नहीं चला था, इसलिए भाजपा वहां हार गई, हालांकि हारने के बावजूद वह वहां सत्ता में है।

उत्तर प्रदेशः अखिलेश की नई चुनौतियां

भाजपा के आक्रामक हिन्दुत्व की काट निकालना कठिन काम
प्रदीप कपूर - 2017-10-10 14:03 UTC
लखनऊः अखिलेश यादव अगले पांच सालों के लिए एक बार फिर समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष बन चुके हैं। अध्यक्ष बनने में तो उन्हें किसी प्रकार की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन आने वाले समय में उन्हे पार्टी के अंदर और पार्टी के बाहर से कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

परमाणु संयंत्रों में काम करने वाले विकिरण से ग्रस्त

यूरेनियम खदानों में काम करने वालो का स्वास्थ्य भी खतरे में
डाॅ अरुण मित्र - 2017-10-07 11:36 UTC
परमाणु ऊर्जा को हमारे देश में ऊर्जा समस्या का रामबाण माना जा रहा है। यह सच है कि हमारे सामने ऊर्जा का गंभीर संकट है। हमें इसके लिए आयात पर निर्भर होना पड़ रहा है। हमारे विकास के लिए इसकी बहुत जरूरत है। लेकिन सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि इस समस्या के समाधान का जवाब क्या वाकई परमाणु ऊर्जा है?

सुलभ जनसुविधाओं से आज भी वचिंत है सार्वजनिक स्थल

इस तरह के परिवेेश में भारत कैसे स्वच्छ रह पायेगा?
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2017-10-07 11:26 UTC
केन्द्र की वर्तमान सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभालते ही महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर से भारत को स्वच्छ बनाने की दिशा में स्वच्छता अभियान का आगाज किया, जिसका परिणाम यह रहा कि आज देश का अधिकांश आम जन इस बात को समझने लगा तो है कि आस - पास का वातावरण साफ - सुथरा होना चाहिए, इसीलिये कुछ खाने के बाद व्यर्थ सामान को इधर - उधर फेंकने के वजाय वह कचरा पेटी तलाशता नजर आता है। आम दुकानदारों के साथ ठेले वाले भी अपने साथ कचरा रखने के पात्र साथ रखने लगे । रेलवे स्टेशन भी अब साफ - सुथरे नजर आने लगे । इस दिशा में पूर्व सरकारों एवं वर्तमान सरकार द्वारा भी जगह जगह सार्वजनिक स्थलों एवं बस स्टैंड के आस पास शौचालय एवं पेशाबघर बनाये गये जिसमें देश का करोडों का बजट भी लगा, पर सही रख - रखाव नहीं होने के कारण वे आज बेकार साबित हो रहे हैं।

नोटबंदी पर अब फिर विपक्षी हमला तेज

क्या यह पूरी तरह विफल हो गई है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-10-07 11:24 UTC
उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे आने के बाद विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने नोटबंदी पर सरकार के खिलाफ बोलना बंद कर दिया था। उस चुनाव में इसे विपक्ष ने अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा भी बनाया था। लोगों को नोटबंदी के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। 100 से ज्यादा लोग लाइन में खड़े खड़े मारे गए। अनेक बैंककर्मियों की काम के दबाव के तहत मौत हो गई। कई शादियां रुक गईं और कई फीकी हो गईं। अनेक लोग बेरोजगार हो गए और अनेक लोगों को अपनी मजदूरी नहीं मिल पाई। कई धंधें बंद हो गए। इसलिए विपक्षी पार्टियों को लग रहा था कि चुनावी मुद्दा बनाकर वह उत्तर प्रदेश और पड़ोसी उत्तराखंड में भाजपा को सत्ता में आने से रोक सकती हैं। पर हुआ बिल्कुल उल्टा। दोनों राज्यों मंे भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व जीत हुई। सच कहा जाय तो दोनों राज्यों में किसी भी पार्टी की उतनी बड़ी जीत हुई ही नहीं जितनी बड़ी 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हुई।

क्या फिल्मी सितारें तमिलनाडु को बचा पाएंगे?

रजनीकांत और कमल हासन से बहुत उम्मीदें
कल्याणी शंकर - 2017-10-05 07:30 UTC
तमिल फिल्मों के दो सुपर स्टार राजनीति में प्रवेश करने वाले हैं। ये सितारे हैं रजनीकांत और कमल हासन। जयललिता के निधन के बाद से ही इनके बारे में अटकलबाजी का बाजार गर्म था, लेकिन रजनीकांत इस मसले पर अपने समर्थकों को सस्पेंस में रखे हुए थे। अब जब उनका राजनीति में आना लगभग तय माना जा रहा है, तो सवाल यह उठता है कि क्या वे सफल हो पाएंगे।

मुलायम का आशीर्वाद अखिलेश के साथ

नई पार्टी बनाने को तैयार नहीं
प्रदीप कपूर - 2017-10-03 11:49 UTC
लखनऊः नई पार्टी या नया मोर्चा बनाने से इनकार कर मुलायम सिंह यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने बेटे का हाथ मजबूत करना चाहते हैं। इस समय अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं।

यशवंत सिन्हा की बगावत

यह तो अभी शुरुआत है
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-10-03 11:46 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बनारस यात्रा के पहले वहां का माहौल जानबूझकर बीएचयू प्रशासन ने खराब किया। फिर वरुण गांधी ने लेख लिखकर रोहिंग्या मसले पर सरकार और अपनी पार्टी के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए। और उसके बाद अब पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने बगावती तेवर दिखा दिया है। नरेन्द्र मोदी की सरकार की अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा की गई यह अबतक की सबसे बड़ी और कड़ी आलोचना है।

पहले देश को रोजगार देने वाले उद्योग चाहिए

हमें पुराने अनुभवों से सीखना चाहिए
डा भरत मिश्र प्राची - 2017-09-28 10:50 UTC
देश जब - जब चुनाव के करीब होता है , जनमत पाने एवं सत्ता पर कब्जा जमाने की दृष्टि से आम जनता को भरमाने की पूरी कोशिश राजनीतिक पार्टियों द्वारा की जाती रही है। राजतंत्र में जिनकी बाजुओं में ताकत रही वहीं शासन करता रहा। लोकतंत्र में जनता को जिसने ज्यादा भरमाया उसने शासन किया। लोकतंत्र एवं राजतंत्र के बदलते परिवेश इस बात के गवाह है। समय समय पर सत्ता परिवर्तन के होते परिदृश्य को आसानी से देखा जा सकता है।

सरदार सरोवरः कहां जाएंगे प्रभावित किसान

विस्थापन नहीं है विकास का हल
प्रभुनाथ शुक्ल - 2017-09-28 10:36 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 67 वें जन्म दिन पर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जल परियोजना सरदार सरोवर डैम देश को समर्पित किया। निश्चित तौर पर उन्होंने इतिहास का नया अध्याय लिखा है। 56 साल से जो महात्वाकांक्षी परियोजना तकनीकी और दूसरे गतिरोध की वजह से ठप पड़ी थी उसे उन्होंने मूर्तरुप दिया है। हलांकि इसके पीछे भाजपा और पीएम मोदी की छुपी राजनीतिक इच्छाओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। परिजयोना के शुभाारंभ के मौके पर उन्होंने विरोधियों पर जमकर हमला बोला। कांग्रेस और पर्यावरण विंदो को उन्होंने इसके लिए कटघरे में खड़ा किया। परियोजना के पूरा होने से जहां गुजरात और राजस्थान के कुछ इलाकों में पानी की समस्या का समाधान होगा।