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चुनावी प्रक्रिया के तहत ईवीएम को आधार से जोड़ा जाना चाहिए!

डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2017-12-22 11:02 UTC
लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सत्ता परिवर्तन के इस दौर में जो दल कभी पीछे चल रहे थे, आज सबसे आगे है , जो आगे रहे थे , सबसे पीछे खड़े हैं । जनता जर्नादन किसे तख्त ताज देगी, किसे पदच्यूत कर देगी, कोई नहीं जानता ? लोकतांत्रिक प्रक्रिया का इससे ज्यादा जीता जागता और क्या प्रमाण हो सकता है। चुनाव में जीत तो सबकुछ सही, हार तो हर प्रक्रिया संदेह के दायरे में , कुछ इसी तरह के परिवेश भारतीय लोकतंत्र में उभरने लगे है। जनाक्रोश को समझने के वजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर संदेहात्मक सवाल उभरने लगे है। आज की मतदान कराने की आधुनिक प्रणाली इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशाीन पर कुछ इसी तरह के सवाल उभरने लगे है । जब कि यह प्रणाली मत पत्र प्रक्रिया से अधिक विश्वसनीय एवं तीव्रगति से परिणाम देने वाली साबित हुई ।

राहुल गांधी अनियंत्रित बयान देने वालों कांग्रेसियों को रोकें

सुशील कुट्टी - 2017-12-22 10:55 UTC
हर राजनीतिक पार्टी यही करती है कि पार्टी की राजनीतिक विफलताएं उसके नेता को नहीं छुए। अभी कांग्रेस में इसी का समय है। इसके बावजूद कि राहुल गंाधी ने ‘‘नैतिक विजय’’ का दावा किया है, उन्हें गुजरात की पराजय से अलग रखने के लिए काफी मेहनत चल रही है। उन्हें ऐसी प्रवृति को हतोत्साहित करना चाहिए। उन्हें कांग्रेसजनों को इसका स्मरण दिलाना चाहिए कि कांग्रेस 132 साल पुराना पार्टी है जिसके इतिहास से ईष्र्या की जा सकती है। एक मजबूत इतिहास है इसका। यही पार्टी है जिसने भारत को आजादी पाने में नेतृत्व दिया। आधुनिक भारत के कुछ बड़े दिग्गजों को कांग्रेस ने आधार दिया और वे आजादी की लड़ाई के उतार-चढाव से होकर गुजरे।

अखिलेश चाहते हैं कि राहुल महागठबंधन के लिए काम करें

सपा अध्यक्ष को 2019 में बड़े बदलाव की उम्मीद
प्रदीप कपूर - 2017-12-22 10:53 UTC
लखनऊः जीत के बावजूद गुजरात में भाजपा को लगे जबर्दस्त झटके के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ने प्रस्ताव किया है कि राहुल गांधी को एक महागठबंधन बनाने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह का गठबंधन भाजपा- आरएसएस की जहरीली राजनीति को 2019 में पराजित करना आवश्यक है।

शेयर संस्कृति ने गुजरात में भाजपा को जीत दिलाई

शहर में भारी जीत का आखिर क्या मतलब हो सकता है
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-12-21 12:17 UTC
गुजरात में अंततः भाजपा जीत ही गई। चुनाव के पहले जो लोग भाजपा की स्थिति खराब बताते थे, वे भी यह मानने से झिझकते थे कि वह चुनाव हार भी सकती है। इसका कारण यह था कि कांग्रेस एक संगठन के रूप में वहां कमजोर थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी सांगठनिक रूप से बहुत ही मजबूत है। वहां उसकी सरकार भी है और नरेन्द्र मोदी के पास चुनाव जीतने के लिए बहुत सारे हथकंडे भी थे। यही कारण है कि भाजपा की स्थिति खराब होने के बावजूद उसके हार जाने की भविष्यवाणी करने का खतरा बहुत ही कम लोग उठाते थे।

ईवीएम मशीनों पर सवाल उठाना बंद होना चाहिए

निर्वाचन आयोग ज्यादा वीवीपीएटी मशीनों से मिलान करे
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-12-20 11:25 UTC
गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजे आने के पहले ईवीएम मशीनों पर सवाल उठाए जा रहे थे। हार्दिक पटेल सवाल उठाने वालों में सबसे मुखर थे। एक्जिट पोल में जिस तरह के नतीजे दिखाए जा रहे थे, उन्हें देखर हार्दिक व उनके जैसे अन्य संशयवादियों को लग रहा था कि भाजपा का प्रदर्शन जब बहुत अच्छा नहीं था, तो फिर उसे 120 या 135 सीटें कैसे आ सकती हैं। गौरलतब हो कि कई बार सटीक नतीजे देने वाला चाणक्य टुडे भारतीय जनता पार्टी को 135 सीटों पर जीतता दिखा रहा था।

ढ़हती हालत में जामा मस्जिद

डा. सबाह अमन - 2017-12-19 11:19 UTC
जमा मस्जिद की ढ़हती हालत को देखकर सरकारी एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पिछले 14 दिसंबर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दिल्ली सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग तथा दिल्ली वक्फ बोर्ड की टीमों ने इसका दौरा किया ताकि इसे गिरती हालत से बचाया जा सके।

सोमनाथ मंदिर का निर्माण और उद्घाटन

नेहरू हिन्दू और मुस्लिम के बीच की दरार को नहीं बढ़ाना चाहते थे
एल.एस. हरदेनिया - 2017-12-19 11:17 UTC
सरदार वल्लभ भाई पटेल एवं अंबेडकर के अलावा जिस एक अन्य प्रमुख मुद्दे पर जवाहरलाल नेहरू को राष्ट्रविरोधी और हिन्दू विरोधी बताया जाता है वह है गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर।

विशुद्ध अर्थशास्त्र की राजनीतिक कीमत

जीएसटी के पालन को लेकर जनता संदेह में
अंजन राय - 2017-12-19 11:12 UTC
गुजरात उनमें से एक है जहां आर्थिक मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ा गया हो और इसी आधार पर उसका फैसला हुआ हो। चालाक राजनीतिज्ञ नरेंद्र मोदी ने इस समझ लिया था और उन्होंने स्पष्ट रूप से इसे कहा भी कि वह अपने फैसलों की राजनीतिक कीमत चुकाने को तैयार हैं।

गुजरात में कोई नहीं जीता ?

मोदी की उतरती लहर
अमूल्य गांगुली - 2017-12-19 11:08 UTC
गुजरात के चुनाव परिणाम दोनों मुख्य प्रतिद्वदियों को नाखुश करने वाले हैं। जहां भाजपा के लिए 100 का मनोवैज्ञानिक सीमा पार करना संभव नहीं हो पाया, कांग्रेस ने अपनी संख्या बढ़ा ली ,लेकिन प्रतिद्वंदी के अांकड़ों से काफी नीचे रह गई।

मणिशंकर अय्यर के डिनर में क्या हुआ

किसी ने गुजरात का नाम नहीं लिया
हरिहर स्वरूप - 2017-12-18 10:13 UTC
ऐसा क्या हुआ मणिशंकर अय्यर की ओर से अपने घर पर आयोजित डिनर में जिसने इतना बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया ? मणि ने यह डिनर कैंब्रिज के दिनों केे अपने दोस्त पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के सम्मान में आयोजित किया था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा पाकिस्तान में भारत के पिछले उच्चायुक्त टीसीए राघवन तथा विदेश सेवा के अधिकारी रहे पूर्व उप राष्ट्रपति हमीद अंसारी समेत भारतीय विदेश सेवा के आधा दर्जन पूर्व अधिकारियों ने इसमें हिस्सा लिया। खासकर आमंत्रितों में पाकिस्तान के उच्चायुक्त तथा अन्य अधिकारी भी शामिल थे। अगर दूसरे ओर से देखा जाए तो मणि ने एक तरह से भारत पाकिस्तान संबंधों को पर बातचीत का एक अवसर प्रदान किया।