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पाटीदार को आरक्षण संभव नहीं

झूठे आश्वासन देना गलत
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-11-25 11:55 UTC
गुजरात में पाटीदारों के आरक्षण के चले आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल से आखिरकार कांग्रेस का समझौता हो ही गया। श्री पटेल का कहना है कि कांग्रेस ने आंदोलनकारियों की मांग मान ली है और यदि कांग्रेस की सरकार बनी, तो पाटीदारों को आरक्षण मिल जाएगा। लेकिन क्या वाकई यह संभव है? केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली, जो कानून के भी जानकार हैं, का कहना है कि ऐसा संभव ही नहीं है। आरक्षण से संबंधित आंदोलनों, मांगों, सरकार के आदेशों और न्यायालयो के निर्णयो के बारे मे जो जानकारी रखते हैं, उन्हें भी यह पता है कि वर्तमान संवैधानिक प्रावधानो के तहत पाटीदारों को आरक्षण मिलना संभव ही नहीं है। अदालतों ने एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा का उल्लंघन करने वाले सरकारी आदेशों को निरस्त कर दिया है। अदालत ने आर्थिक आधार पर आरक्षण को भी खारिज कर दिया है। और अदालत में संपन्न जातियों को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण देने के सरकार के आदेश को भी असंवैधानिक घोषित कर दिया है।

राम के खिलाफ कृष्ण: समाजवादी पार्टी की नई रणनीति

प्रदीप कपूर - 2017-11-23 11:08 UTC
लखनऊः जब भारतीय जनता पार्टी और संघ उत्तर प्रदेश में राम मन्दिर के निर्माण के लिए कमर कस रहे हैं और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भी मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं, तो प्रमुख विपक्षी समाजवादी पार्टी ने कृष्ण का राग अलापना शुरू कर दिया है। वे राम की काट कृष्ण में ढूंढ़ रही है।

गुजरात चुनाव में बढ़ रहा है कांग्रेस का समर्थन

मोदी और राहुल में सीधा मुकाबला
कल्याणी शंकर - 2017-11-23 11:05 UTC
जैसे जैसे गुजरात में मतदान की तारीखें नजदीक आती जा रही है, कांग्रेस का समर्थन भी बढ़ता दिखाई पड़ रहा है। कांग्रेस दो दशकों से भी ज्यादा समय के बाद इस बार सत्ता पर एक बार फिर काबिज करने की लड़ाई लड़ रही है। गुजराती मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी हर संभव प्रयास कर रही है।

राहुल गांधी की ताजपोशी

क्या कांग्रेस की वापसी हो सकेगी?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-11-20 11:53 UTC
सोनिया गांधी के राजनैतिक नेपथ्य में जाने के इरादे के साथ ही राहुल गांधी अब अगले महीने ही कांग्रेस के अध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं। 11 तारीख को वे पार्टी का अध्यक्ष बन जाएंगें और उसके पहले उनके अध्यक्ष बनने की जो प्रक्रिया पार्टी अपनाएगी, वह महज औपचारिकता ही होगी। इस तरह मीडिया में लंबे समय से चल रही यह अटकलबाजी कि राहुल अब अध्यक्ष बने और तब अध्यक्ष बनेंगे, समाप्त हो जाएगी।

संसद एक बार फिर सरकार के ठेंगे पर!

नवंबर महीने में शीत सत्र क्यों नहीं?
अनिल जैन - 2017-11-20 11:49 UTC
सरकार द्वारा देश की सबसे बडी पंचायत यानी संसद की उपेक्षा, उससे मुंह चुराने की या उसका मनमाना इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति हमारे देश में कोई नई बात नहीं है। केंद्र में जिस किसी पार्टी की सरकार रही हो, उसकी कोशिश संसद का कम से कम सामना करने की ही रही है। लेकिन इस सिलसिले में इस वर्ष अब तक संसद का शीतकालीन सत्र न आयोजित कर मौजूदा भाजपा सरकार ने तो एक नया ही इतिहास रच दिया है। भारत के 65 वर्ष के संसदीय इतिहास में यह पहला मौका है जब नवंबर का आधा महीना बीत जाने के बावजूद संसद का शीतकालीन सत्र अभी तक शुरू नहीं हुआ है और न ही यह तय हुआ है कि वह कब होगा या होगा ही नहीं।

स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता में बहुत नीचे

अफगानिस्तान से भी हमारा खर्च इस मद में कम
डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-11-17 13:54 UTC
बहुत उम्मीद बंधी हुई थी 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष किया जाएगा। इसका कारण यह है कि स्वास्थ्य नीति एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसमें स्वास्थ्य की वर्तमान दशा का चित्रण होता है और बेहतरी के लिए इसमें प्रावधान किए जाते हैं ताकि देश के नागरिक स्वस्थ रहें और उनके स्वास्थ्य की देखरेख के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार हों। 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को इसी संदर्भ में परखा जाना चाहिए।

चित्रकूट में भाजपा की हार

कांग्रेस ने जीत का श्रेय राम को दिया
एल एस हरदेनिया - 2017-11-16 12:19 UTC
भोपालः चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की हार पूरे प्रदेश के राजनैतिक मूड में हो रहे बदलाव का दर्पण हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। लेकिन इसमें कोई दो मत नहीं कि यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के लिए एक बड़ी चेतावनी है, क्योंकि उन्हें और उनकी पार्टी को अगले एक साल में विधानसभा चुनाव का सामना करना करना है।

भाजपा की तमिलनाडु राजनीति

करुणानिधि से मिलकर क्या हासिल करना चाहते हैं मोदी
कल्याणी शंकर - 2017-11-15 12:03 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एकाएक गोपालपुरम स्थित करुणानिधि के घर की यात्रा करने के क्या निहितार्थ हो सकते हैं? पिछले सप्ताह जब प्रधानमंत्री चेन्नई में थे, तो उन्होंने एकाएक प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि से मिलने के लिए उनके घर जा धमके। श्री करुणानिधि अधिक उम्र होने के कारण कुछ समय से अस्वस्थ हैं और स्वास्थ्य लाभ के लिए वे लंबे समय से आराम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी राजनैतिक विरासत अपने बेटे स्टालिन को थमा दी है।

गुजरात का घमसान

अपने घर में ही मोदी को मिल रही है शह
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-11-14 12:50 UTC
गुजरात का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए बहुत ही भारी पड़ रहा है। उनकी पार्टी की जीत आसान नहीं दिख रही है, भले ही खबरिया चैनलों द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षणों में भाजपा की भारी जीत की भविष्यवाणियां की जा रही हों। अब तो उन सर्वेक्षणों को मीडिया जगत में भी गंभीरता से नहीं लिया जाता और कहा जाता है कि उनके पीछे पैसे का खेल होता है और जो पार्टियां पैसा खर्च कर सकती हैं और जो चैनलों को वित्तीय फायदा किसी भी तरीके से पहुंचा सकती है, उनके पक्ष में सर्वेक्षण के नतीजे बताए जाते हैं। कभी वे नतीजे सही होते हैं, तो कभी गलत और कभी कभी तो वे नतीजे चुनाव परिणामों को भी पलटने में भूमिका अदा करते हैं। पर अब जब उन सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता समाप्त हो रही है, तो उनके द्वारा नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता भी लगातार कमजोर होती जा रही है।

नोटबंदी का एक साल

कहानी में और भी मोड़ हैं
अनिल सिन्हा - 2017-11-14 12:47 UTC
जब 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंाच सौ और हजार रूपए के नोटों का चलन खत्म करने घोषणा की तो देश के गरीब नाच उठे थे। मीडिया प्रचार के करण उन्हें एक ऐसा सुख मिल रहा था जो काल्पनिक था। उन्हें लगा था कि अमीरों के पास बोरियों में पड़े नोट बेकार हो जाएंगे। मुझे याद है जब दिल्ली के एक आटोरिक्शा वाले झूम कर कहा था कि मोदी यह काम कर सकता है। मोदी और भी आगे बढ गए थे। उन्होंने कहा था कि यह सिर्फ काला धन ही नहीं बल्कि आतंकवाद और नक्सलवादी हिंसा को खत्म करने में मदद करेगा।