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प्रदूषण निवारण का खर्च उठाना राज्य की जिम्मेवारी

वायु प्रदूषण की कोई सीमा नहीं
डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-11-11 12:29 UTC
उत्तरी भारत में फैले स्माॅग ने जो समस्या पैदा कर दी है, वह बहुत बड़ी चिंता का कारण होना चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली इससे सबसे ज्यादा तबाह हो रहा है। चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा ही इससे त्रस्त है। नमी के साथ प्रदूषित कणों के मिल जाने के कारण यह समस्या पैदा हुई है। ये प्रदूषण मुख्य रूप से वाहनों द्वारा निकल रहे धुंओं से पैदा हो रहा है। इसके अलावा फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुंआ, सड़कों पर उड़ने वाली धूल और कचरा जलाए जाने के कारण भी प्रदूषण के पदार्थ भारी पैमाने पर निकलते हैं। धान फसल की कटाई के बाद खेतों में फसल की खंूटियों के जलाए जाने से भी काफी धुआं निकलता है। जब तापमान नीचे गिरता है तो प्रदूषण के ये सारे कण एक दूसरे से मिलकर भारी होते हैं और जमीन की ओर आने लगते हैं। दिल्ली सहित उत्तर भारत के बड़े भूभाग पर यही हो रहा है। हवा की गति मंे आई कमी और वर्षा के अभाव ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है।

दिल्ली एक मरता हुआ महानगर

आखिर ऐसी स्थिति आई क्यों?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-11-11 12:25 UTC
दिल्ली सहित पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण ने मारक रूप अख्तियार कर लिया है और सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक इस समस्या को हल करने के लिए अपने अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है। तरह तरह की तरकीबें सुझाई जा रही हैं और यह स्थिति पैदा होने के लिए तरह तरह के कारण बताए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार 5 दिनों के लिए आॅड इवन फाॅर्मूले के तहत चैपहिया निजी वाहन चलवाएगी। निर्माण कार्यो पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए है, जिन पर पूरी तरह से अमल ही नहीं होना है। कचरो को जलाए जाने पर भी रोक है, लेकिन इस पर भी अमल नहीं होने वाला है।

कालाधन उगाही वालों के बीच से कैसे मिटेगा भ्रष्टाचार ?

भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए सरकार बना रही है कानून
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2017-11-09 11:53 UTC
कालाधन उगाही करने वालों के संरक्षण में अभी हाल ही में राजस्थान राज्य में वर्तमान भाजपा नेतृृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा विधेयक लाने का मामला उजागर हुआ है जिसका विरोध होने के कारण फिलहाल यह विधेयक प्रवर समिति को सौंप दिया गया है। इस विधेयक के विरोध में पत्रकारिता जगत में विशेष अभियान जारी है । साथ ही इस कानून के विरोध में विपक्षी दल के अलावे भाजपा के विशेष सहयोगी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संध ने भी आपति जतायी है। इस कानून को लोकतंत्र पर प्रहार बताते हुए काला कानून के रूप में विरोध हर जगह जारी है। जब तक कानून काला तब तक ताला प्रसंग प्रदेश में विशेष चर्चा का विषय आज बना हुआ है।

हिमाचल प्रदेश में अस्तित्व की लड़ाई

कांग्रेस के कमजोर अभियान से भाजपा को मिल सकता है फायदा
कल्याणी शंकर - 2017-11-09 11:50 UTC
वैसे सबकी आंखें गुजरात विधानसभा के चुनावी नतीजों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गृह प्रदेश है, लेकिन हिमाचल प्रदेश का चुनाव कोई कम मायने नहीं रखता है। यदि कांग्रेस वहां एक बार फिर सत्ता पर काबिज होने में सफल हो जाती है, तो उसके हौसले काफी बुलंद हो जाएंगे। और यदि वहां भाजपा जीतती है, तो उसके जीतने का सिलसिला जारी रहेगा। इसलिए दोनों पार्टियों के लिए वहां बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।

‘अतुल्य भारत’ में असुरक्षित विदेशी सैलानी

दुनिया में भारत की छवि खराब हो रही है
अनिल जैन - 2017-11-06 12:21 UTC
भारत की समृद्ध पर्यटन संपदा के बारे में मशहूर अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने कहा है- ‘भारत वह भूमि है, जिसे दुनिया के तमाम लोग देखने की हसरत रखते हैं और जिन्होंने उसकी एक झलक भी देखी है, वे उस एक झलक के बदले दुनिया के तमाम नजारों को ठुकरा सकते है।’ मार्क ट्वेन का यह कथन भारत की सांस्कृतिक विविधता, चप्पे-चप्पे पर बिछा उतार-चढाव भरा इतिहास, उसी इतिहास से तादात्म्य बनाती अनमोल पुरा संपदा, बेमिसाल वास्तुशिल्प और नयनाभिराम प्राकृतिक नजारों की हकीकत बयान करने वाला है। शायद इसी हकीकत से रूबरू होने के लिए स्विस नागरिक क्वैंटीन जेरेमी क्लेर्क और उनकी महिला मित्र मैरी ड्रोज बीती 30 सितंबर को भारत आए थे।

स्वास्थ्य को सार्वजनिक बहस का विषय बनाना चाहिए

स्वास्थ्य संगठन लोगों की राय बदलने में सहायक हो सकते हैं
डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-11-04 12:39 UTC
स्वास्थ्य सभी लोगों की चिंता का विषय है। उत्पादकता में एक स्वस्थ व्यक्ति ही योगदान कर सकता है। इसके कारण ही ‘स्वास्थ्य ही धन है’ वाली कहावत बनी है। पिछले कुछ सालों में जीवन शैली में बदलाव के कारण अनेक बीमारियां अस्तित्व में आ गई हैं। डेंगू, चिकनगुनिया, एचआईवी व अन्य अनेक प्रकार के वाइरल बुखार लोगों को होने लगे हैं। पहले से ही उपस्थित बीमारियों के अलावा ये नई बीमारियां हमारे गंभीर विवेचन के विषय होने चाहिएं। चूंकि हमारे देश के स्वास्थ्य का जिम्मा मुख्य रूप से अब निजी क्षेत्र के पास है, इसलिए लोगों की चिंता अब कई गुना बढ़ गई है। एक बीमार व्यक्ति अपनी आमदनी खो देता है। वह बीमारी के दौरान दवाइयों और स्वास्थ्यवदर््धक भोजन पर आश्रित हो जाता है। उसे अपनी बीमारी के इलाज का भी खर्च उठाना पड़ता है। एक स्वस्थ व्यक्ति से ज्यादा उसे खर्च करना पड़ता है, जबकि उसकी आमदनी या तो समाप्त हो जाती है या कम हो जाती है।

नोटबंदी के एक साल: खोदा पहाड़ निकली चूहिया

उपेन्द्र प्रसाद - 2017-11-04 12:33 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के दो बड़ी करेंसी नोट को प्रचलन से रोकने की घोषणा के एक साल पूरे होने हैं। आजादी के बाद किसी सरकार द्वारा लिया गया यह सबसे बड़ा नीतिगत फैसला था और फैसले के बाद जिस तरह का इसे समर्थन मिला था, वह भी अभूतपूर्व था। इसे एक बड़ी क्रांति माना गया था, जिसमें बिना किसी एक गोली चलाए व्यवस्था परिवर्तन को अंजाम दिया गया मान लिया गया था। लगने लगा था कि काला धन रखने वालों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं और देश एक ऐसे काल में प्रवेश कर गया है, जिसमें अवैध रूप से धन संग्रह करना अतीत की बात बन जाएगी। लिहाजा इस घोषणा को देश के आमलोगों का जबर्दस्त समर्थन मिला। जो लोग इसका विरोध कर रहे थे, उन्हें या तो लोगों ने गंभीरता से लिया ही नहीं या उन्हें काले धन के मालिकों का हमदर्द मान लिया गया।

देश में विदेशी सैलानियों की सुरक्षा का सवाल

अतुल्य भारत में असुरक्षित विदेशी पर्यटक?
प्रभुनाथ शुक्ल - 2017-11-02 09:56 UTC
भारत भूमि पर्यटन के लिहाज से अतुल्य है। यहाँ लाखों की संख्या में विदेशी सैलानी भारत दर्शन करने आते हैं। सैलानी यहाँ से देवभूमि, प्रकृति सौंदर्य और अनूठी सांस्कृतिक विरासत की सुखद अनुभूति साथ लेकर स्वदेश लौटते हैं। भारत आने वाले देशी - विदेशी पर्यटक न सिर्फ मौजमस्ती के लिए आते हैं बल्कि यहाँ से देश की गौरवमयी संस्कृति और सभ्यता की खोज और तथ्यात्मक जानकारी जुटाने भी आते हैं। इस तरह के विदेशी मेहमानों की तादात भी काफी है जो एक बार भारत आने के बाद, फिर यहाँ के होकर रह जाते हैं। इसके अलावा भौतिक जिंदगी की उलझनों से ऊब कर भी लोग यहाँ वाराणसी , हरिद्वार, उत्तराखण्ड आदि में शांति की तलाश में आते हैं । पर्यटन देश की आर्थिक स्थिति की अहम कड़ी है । विदेशी सैलानियों से जहाँ देश की आय बढ़ती हैं , वहीँ जीडीपी में इसका बड़ा योगदान होता है । सैलानियों के लिए स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की हालत आतंकवाद की वजह से खराब है । यहाँ विदेशी पर्यटक जाने से घबराते हैं जिसकी वजह से हमें भारी आर्थिक नुकसान उठना पड़ा है । कई राज्यों में नक्सल समस्या से भी स्थिति विकट है ।

गुजरात चुनाव तय करेंगे आगामी लोकसभा चुनाव की तस्वीर

देश की जनता विकास के साथ अमन चैन भी चाहती है
भरत मिश्र प्राची - 2017-11-01 11:00 UTC
देश में शीघ्र ही दो राज्य गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने जा रहे है। इन दोनों राज्यों में विशेष रूप से गुजरात विधान सभा चुनाव पर देश भर की नजरें टिकी हुई है। गुजरात भाजपा नेतृृत्व में बनी केन्द्र सराकर के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गृृह प्रदेश है जहां सर्वाधिक मुख्यमंत्री का काल भी इनका व्यतीत हुआ है। भाजपा को लोकसभा में सर्वाधिक मत दिलाने का श्रेय भी नरेन्द्र मोदी को ही जाता है। गत गुजरात विधानसभा चुनाव में विकास के नाम सर्वाधिक जनमत नरेन्द्र मोदी के नेतृृत्व में भाजपा को ही मिला । इस परिदृृश्य ने नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में लाकर खड़ा कर दिया ।

क्या कश्मीर में स्वायत्तता को लेकर विवाद है?

पी चिदंबरम का अजीबोगरीब बयान
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-11-01 10:57 UTC
कश्मीर समस्या एक बार फिर अपने अनेक आयामों के साथ राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। वहां की हिंसक घटनाएं तो पहले की तरह ही जारी हैं और सुरक्षा बलों द्वारा वहां के उपद्रवी तत्वों का दबाने का प्रयास भी जारी है। इस बीच केन्द्र सरकार ने एक वार्ताकार भी तय कर दिया है, जो कश्मीर के लोगों से मिलकर वहां की समस्याओं के बारे में जानेंगे और घावों पर मरहम लगाने का काम करेंगे। इन सबके साथ साथ संविधान की धारा 35(ए) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का समय भी नजदीक आ गया है।