लोकतंत्र में अभिव्यक्ति का प्रभाव सर्वोपरि
पर सत्ता परिवर्तनशील रही है
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2017-10-17 11:14 UTC
राजतंत्र में शक्ति सदा से हावी रही तो लोकतंत्र में अभिव्यक्ति प्रभावी रही । सत्ता पाने के क्रम में छल प्रपंच की कला सदियों से चलती रही है। आज भी जारी है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति का प्रभाव सर्वोपरि है। जिनके पास अभिव्यक्ति का माध्यम सशक्त है, जो तेज तर्रार , वाचाल है, जनता उसी के पास खींची चली आती है। राजनीति क्षेत्र से लेकर अध्यात्म तक अभिव्यक्ति के प्रभाव को आसानी से देखा जा सकता है। राजनीति में जिस नेता के पास बेहतर अभिव्यक्ति है, जनता उसी के सिर ताज रख देती है। अघ्यात्म में जिस गुरू के पास अभिव्यक्ति है, जनता उसे सारा कुछ सौंप देती है। इस तरह के अनेक उदाहरण वर्तमान परिवेष एवं इतिहास के आईने में देखे जा सकते है।