अनुकूलित राष्ट्रपति की कड़ी में कोविंद
भाजपा को दलित वोट दिलाने में हो सकते हैं मददगार
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2017-06-27 11:22 UTC
हमारे देश में आजादी के बाद से अब तक यही देखा गया है कि राष्ट्रपति चाहे राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला हो या गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला- सरकार के साथ उसका रिश्ता कुछ अपवादों को छोडकर आमतौर पर सामंजस्यपूर्ण ही रहा है। जो राजनीतिक दल सत्ता में होता है उसकी भी कोशिश यही रहती है कि वह राष्ट्रपति के पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठाए जो हर तरह से उसके अनुकूल हो और किसी भी मामले में संविधान प्रदत्त अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सरकार या प्रधानमंत्री के लिए कोई परेशानी खडी न करे। इस लिहाज से देश का नया राष्ट्रपति चुनने के लिए सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को अपना उम्मीदवार बनाकर कोई अनोखा या हैरानी वाला काम नहीं किया है, जैसा कि कई विश्लेषक इसे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं।