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कर्ज से दबकर किसानों की आत्महत्या

कृषि में गंभीर सुधार करने की जरूरत
कल्याणी शंकर - 2017-06-14 11:31 UTC
हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन ने पिछले दिनों ट्विट किया कि यदि खेती की स्थिति बिगड़ती है तो किसी की स्थिति अच्छी नहीं रहेगी। इसलिए सरकार को चाहिए कि किसानों की बेहतर स्थिति को वह अपने सभी कार्यक्रमों और नीतियों का केन्द्र बनाए। विख्यात कृषि विशेषज्ञ स्वामीनाथन ने सोशल मीडिया में अपने ये विचार उस समय रखे, जब मंदसौर में पुलिस की गोली से किसानों के मरने की खबर आई थी।

केरल की नई शराब नीति

विपक्ष विरोध में लामबंद
पी श्रीकुमारन - 2017-06-13 11:00 UTC
तिरुअनंतपुरमः सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार की नई शराब नीति ने प्रदेश की आबादी के एक बड़े हिस्से में भूचाल पैदा कर दिया है। लेकिन इसके कारण कैश की कमी का सामना कर रहे प्रदेश को राहत लेने का मौका भी मिल गया है।

ढह गए हैं बिहार में विद्या के मंदिर

नतीजों में घोटाले क्यों न हों?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-06-12 11:58 UTC
बिहार में एक बार फिर टाॅपर घोटाला सामने आया है। पिछले साल जब यह घोटाला सामने आया और पता चला के टाॅपर करने वाले अधिकांश छात्र और छात्राएं पास होने की योग्यता भी नहीं रखते, तो बहुत हल्ला हंगामा हुआ और उसके बीच अनेक गिरफ्तारियां हुईं। बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड के चेयरमैन सहित अनेक लोग जेल गए। उनमें से अधिकांश अब जेल से बाहर भी आ गए हैं। उस घोटाले के बाद प्रदेश सरकार ने कुछ नई नियुक्तियां भी कीं और उसके बाद उम्मीद की गई कि अब नतीजों में घोटाले नहीं हो सकेंगे।

मध्यप्रदेश का किसान आंदोलन

सरकार ने आग में घी का काम किया
एल एस हरदेनिया - 2017-06-10 16:14 UTC
भोपालः 1956 में अपने निर्माण के बाद मध्यप्रदेश ने उतनी हिंसा कभी नहीं देखी, जितना वह आज देख रहा है। पिछले एक सप्ताह से मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा जल रहा है। दर्जनों बसों और ट्रकों को आंदोलनकारियों ने फूंक डाला। कारों और पेट्रोल पंपों में भी आग लगाई गई। इसके कारण हजारों करोड़ रुपयों की संपत्ति का नुकसान हो चुका है।

अपने आदेशों पर अमल नहीं करवा पा रहे हैं योगी

अनुभव की कमी और बाहरी हस्तक्षेप से समस्या हो रही है जटिल
प्रदीप कपूर - 2017-06-09 12:12 UTC
लखनऊः योगी सरकार के 100 दिन पूरे होने वाले हैं, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री प्रशासन पर अपनी पकड़ पाने में नाकाम रहे हैं। 100 दिन की उपलब्धियों की सूची तैयार करने को नौकरशाही को कहा गया है, लेकिन सरकार की क्या उपलब्धियां रहीं, यह ढूृढ़े नहीं मिल पा रही है।

मंदसौर में किसानों पर गोली

बारुद के ढेर पर बैठी है मोदी सरकार?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-06-09 12:07 UTC
मध्यप्रदेश में किसानों पर चली पुलिस की गोलियां कहीं इस बात के संकेत नहीं कि मोदी सरकार बारुद के ढेर पर बैठी है? यह संदेह इसलिए पैदा होता है कि सिर्फ मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश भर के किसानों में भारी आक्रोश है। खेती का उत्पादन अच्छा है, लेकिन अच्छा उत्पादन कृषि उत्पादकों के लिए ही विनाश का पैगाम लेकर आता है और उसके उत्पाद उन्हें अच्छी कीमत नहीं दे पाते। अच्छी कीमत तो दूर अनेक बार तो खेती के लिए लगाई गई पूंजी के बराबर आय भी किसान अपने उत्पादों ने नहीं कर पाता। और यदि किसानों ने वह पूंजी कर्ज लेकर जुटाई हो, तो फिर वे कर्ज की वापसी में विफल होने लगते हैं और उनकी यह विफलता उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर कर देती है।

मोदी और भाजपा को हराना आसान नहीं होगा

2019 में विपक्ष की एकता जरूरी है
कल्याणी शंकर - 2017-06-07 12:54 UTC
2004 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मैंने डीएमके नेता करुणानिधि का इंटरव्यू लिया और उनसे पूछा कि वे यूपीए का हिस्सा क्यों बन रहे हैं। एक मिनट के लिए वे ठहरे और फिर कहा कि उनकी नजर में सोनिया के नेतृत्व वाले यूपीए के लिए सत्तारूढ़ एनडीए का विकल्प बनने के लिए जगह है। वे उस समय की राजनैतिक स्थिति को समझने में सफल रहे थे। 2004 के चुनाव में यूपीए सत्ता में आ गई। क्या विपक्षी एकता एक बार फिर जरूरी हो गई है?

भाजपा के 'मिशन केरल' को झटका

अमित शाह ने महसूस किया कि केरल गुजरात नहीं है
पी श्रीकुमारन - 2017-06-06 11:18 UTC
तिरुअनंतपुरमः वे आए। उन्होंने देखा। पर जीतने में वे विफल रहे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के तीन दिवसीय केरल दौरे का सार यही है।

2019 के चुनाव तक मंदिर मसले को गर्म रखेंगे योगी

मुख्यमंत्री की अयोध्या यात्रा का समय महत्वपूर्ण
प्रदीप कपूर - 2017-06-05 11:04 UTC
लखनऊः मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की पिछली अयोध्या यात्रा इस मायने में महत्वपूर्ण है कि यह उस समय हुई, जब भाजपा के बड़े नेताओं पर मुकदमे का ट्रायल शुरू हो रहा था और वे नेता अदालत में अपनी हाजिरी दे रहे थे।

बिहार का बढ़ता राजनैतिक अनिश्चय

नीतीश कुमार के सामने नई चुनौती
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-06-03 09:45 UTC
बिहार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और नीतीश कुमार आज एक ऐसे दोराहे पर खड़े हैं, जिसकी दोनों राहें अनिश्चितता से भरी है। मंडल राजनीति से निकले सभी राजनेतओ मे नीतीश कुमार निश्चय ही सबसे ज्यादा राजनैतिक कुशलता रखने वाले नेता रहे हैं, जो जनाधारहीन होने के बावजूद न केवल लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी अपनी छाप छोड़ते रहे हैं। उनमें ऐसी कुशलता है कि भारतीय जनता पार्टी से दोस्ती करने, उसका समर्थन लेने और उसको समर्थन देने के बावजूद वे अपनी सेक्युलर छवि बनाने में सफल रहे हैं। बिहार में वे खुद अपने बूते मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, बावजूद इसके वे प्रधानमंत्री के दावेदार बन जाते हैं।