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मोदी सरकार के तीन साल, सब गोलमाल

आम आदमी के हिस्से में दुख, निराशा और दुश्वारियां आई हैं
अनिल जैन - 2017-05-22 18:50 UTC
अब जबकि केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार अपने पांच साला कार्यकाल के तीन साल पूरे कर चुकी है तो लाजिमी है कि उसके घोषणा पत्र के बरअक्स उसके कामकाज की समीक्षा होनी चाहिए। भाजपा के घोषणापत्र का सूत्र वाक्य था- भाजपा की नीतियों और उसके क्रियान्वयन का पहला लक्ष्य होगा- ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ और रास्ता होगा- ‘सबका साथ-सबका विकास।’ इसी सूत्र वाक्य पर आधारित तमाम वायदों के जरिए देश की जनता में ‘अच्छे दिन’ आने की उम्मीद जगाई गई थी।

2019 के लिए अखिलेश कस रहे हैं कमर

आधार बढ़ाने के लिए नया सदस्यता अभियान
प्रदीप कपूर - 2017-05-20 17:57 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुह की खाने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अब 2019 के लोकसभा चुनाव की जमकर तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वे पार्टी के एक मजबूत ढांचे को खड़ा करने में लगे हुए हैं।

मोदी सरकार के तीन साल

2019 में विपक्ष के सामने कठिन चुनौती
कल्याणी शंकर - 2017-05-19 13:00 UTC
मोदी सरकार ने अपने तीन साल पूरे कर लिए हैं और वह अपने कार्यकाल के चैथे साल में प्रवेश कर रही है। वह अपने वर्तमान कार्यकाल पूरा करने को लेकर ही आत्मविश्वास से लवरेज नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वे 2019 का लोकसभा चुनाव भी जीत लेंगे।

नर्मदा यात्रा की सफलता से चौहान गदगद

अनसुना करने वाले मंत्रियों से अब कड़ाई से निबट सकते हैं मुख्यमंत्री
एल एस हरदेनिया - 2017-05-18 10:09 UTC
भोपालः यह कहना कठिन है कि 148 दिनों की नर्मदा यात्रा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आध्यात्मिक रूप से सहायता कर पाएगी या नहीं, लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि इससे मुख्यमंत्री को राजनैतिक रूप से बहुत फायदा हुआ है। इस यात्रा के समापन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिवराज सिंह चौहान की खुले शब्दों में प्रशंसा की। इसके कारण भी चौहान की छवि को चार चांद लगे हैं।

भारतीय जनता पार्टी की गाय ग्रंथि

संघ परिवार को चीन से सबक लेनी चाहिए
अमूल्य गांगुली - 2017-05-17 11:55 UTC
यह बात अपनी जगह है कि वन बेल्ट वन रोड की चीन की परियोजना उसके आर्थिक और सामरिक पौरुष को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, लेकिन इतना तो तय है कि अब वह देश सांस्कृतिक का्रंति के दौर से निकलकर आधुनिक युग में आ गया है।
बिहार में राजनैतिक पैंतरेबाजी

लालू को हासिए पर धकेलने के लिए भाजपा अडिग

अरुण श्रीवास्तव - 2017-05-16 10:35 UTC
लालू यादव के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी पिछले एक महीने से भी ज्यादा दिनों से अभियान चला रही थी। इसके तहत भाजपा नेता सुशील मोदी लगातार लालू और उनके परिवार के लोगों पर हमले कर रहे थे। और अब तो लालू यादव की बेटी और दामाद के खिलाफ सीबीआई छापे भी पड़ चुके हैं।

ईवीएम का मसला: खुद संदेह को बढ़ावा दे रहा है निर्वाचन आयोग

उपेन्द्र प्रसाद - 2017-05-15 11:33 UTC
पिछले 12 मई को भारत के निर्वाचन आयोग ने चुनाव सुधारों को लेकर एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। इस समय ईवीएम द्वारा चुनाव नतीजों को प्रभावित किया जाने का मुद्दा बहुत गर्म है। जाहिर है बैठक के दौरान यह मुद्दा सबसे ज्यादा गंभीरता से उठाया गया। जिस गंभीरता से यह मुद्दा उठाया जाता है, उतनी तत्परता के साथ निर्वाचन आयोग अपना बयान जारी कर कह देता है कि इन चुनावी मशीनों से छेड़छाड़ की ही नहीं जा सकती। अपनी यह बात निर्वाचन आयोग बहुत ही दृढता से करता है। लेकिन उसकी दृढ़ता आरोप लगाने वालों पर असर नहीं डालती और वे फिर उसे दुहरा देते हैं।

सोनिया को कार्यक्रम आधारित नेतृत्व विपक्ष को देना चाहिए

कांग्रेस को छोटी पार्टियों के प्रति ज्यादा उदार बनना पड़ेगा
नित्य चक्रबर्ती - 2017-05-13 12:58 UTC
पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विपक्षी पार्टियों के नेताओं से लगातार मुलाकात कर रही हैं और उनसे राष्ट्रपति चुनाव की रणनीति पर चर्चा कर रही हैं। चुनाव जुलाई में होगा और भारतीय जनता पार्टी भी एनडीए क बाहर की पार्टियों के साथ संपर्क में है और उसने जगनमोहन की पार्टी का समर्थन भी अपने उम्मीदार के लिए हासिल कर लिया है।

आप का बिखराव रोक पाएंगे केजरीवाल?

गरीब जनता के बड़े वर्ग का समर्थन आप के साथ अब भी है
अनिल सिन्हा - 2017-05-12 16:59 UTC
चुनावी पराजय के बाद पार्टी में भगदड़ मचना भारतीय राजनीति के लिए जानी-पहचानी घटना है। इसलिए आम आदमी पार्टी में जो हो रहा है उसमें कुछ नया नहीं है। लेकिन यह जिस तरीके से हो रहा है वह एक बड़े खतरे की इशारा कर रहा है। आमतौर पर राजनीतिक पार्टियों की बनावट ऐसी होती है कि वे ऐसे झटके झेल जाते हैं और आप के लिए तो यह और भी आसान होना चाहिए था क्योंकि वह नई राजनीतिक शैली बनाने का दावा लेकर सामने आई थी। लेकिन वह बिखराव की चुनौतियों का सामना करने में परंपरागत पार्टियों से भी कमजोर साबित हो रही है।

आप का बिखराव रोक पाएंगे केजरीवाल?

गरीब जनता के बड़े वर्ग का समर्थन आप के साथ अब भी है
अनिल सिन्हा - 2017-05-12 16:59 UTC
चुनावी पराजय के बाद पार्टी में भगदड़ मचना भारतीय राजनीति के लिए जानी-पहचानी घटना है। इसलिए आम आदमी पार्टी में जो हो रहा है उसमें कुछ नया नहीं है। लेकिन यह जिस तरीके से हो रहा है वह एक बड़े खतरे की इशारा कर रहा है। आमतौर पर राजनीतिक पार्टियों की बनावट ऐसी होती है कि वे ऐसे झटके झेल जाते हैं और आप के लिए तो यह और भी आसान होना चाहिए था क्योंकि वह नई राजनीतिक शैली बनाने का दावा लेकर सामने आई थी। लेकिन वह बिखराव की चुनौतियों का सामना करने में परंपरागत पार्टियों से भी कमजोर साबित हो रही है।