सिकुडते जंगल, संकट में सभ्यता
अंधाधुंध औद्योगीकरण ही इसके लिए जिम्मेदार
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2016-09-20 18:53 UTC
प्रकृति ने जल और जंगल के रुप में मनुष्य को दो ऐसे अनुपम उपहार दिए हैं, जिनके सहारे कई दुनिया में कई सभ्यताएं विकसित हुई हैं, लेकिन मनुष्य की खुदगर्जी के चलते इन दोनों ही उपहारों का तेजी से क्षय हो रहा है। पानी के संकट को स्पष्ट तौर पर दुनियाभर में महसूस किया जा रहा है और कई विशेषज्ञ चेतावनी दे चुके हैं कि अगला विश्व युध्द अगर हुआ तो वह पानी को लेकर ही होगा। जिस तेजी से पानी का संकट विकराल रुप लेता जा रहा है, कमोबेश उसी तेजी से जंगलों का दायरा भी सिकुडता जा रहा है।