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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा की स्थिति सुधरी

सरकार फिर बनाने के लिए अखिलेश कर रहे हैं जद्दोजहद
हरिहर स्वरूप - 2016-08-22 13:45 UTC
जैसे जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनैतिक पार्टियों के आपसी समीकरण बदलते जा रहे हैं। मायावती को पूरा विश्वास है कि उनकी पार्टी को उत्तर प्रदेश में इस बार बहुमत जरूर मिलेगा। दूसरी तरफ अखिलेश यादव यह महसूस कर रहे हैं कि इस बार लड़ाई कठिन है।

बिहार की जहरीली शराब त्रासदी

शराबबंदी को और कड़ाई से लागू करना जरूरी
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-08-20 11:22 UTC
बिहार के गोपालगंज जिले में हुई हूच (जहरीली शराब) त्रासदी में कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है और इस घटना के बाद शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए नीतीश सरकार की आलोचना की जा रही है। कहा जा रहा है कि सरकार ने शराबबंदी कर दी है, इसके कारण ही लोग अवैध रूप से बनी जहरीली शराब पीने के लिए बाध्य हो रहे हैं और उसके कारण ही यह घटना घटी है। लेकिन इस तरह का दिया गया तर्क कुतर्क से ज्यादा कुछ भी नहीं है। जो लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं, क्या वे दावे के साथ कह सकते हैं कि जब प्रदेश मे शराबबंदी नहीं थी और लोगों को बाजार में मान्यताप्राप्त शराब मिल जाया करती थी, तो क्या इस तरह की हूच ट्रेजडी नहीं हुआ करती थी?

समाजवादी पार्टी में दरार

अखिलेश और शिवपाल के बीच बढ़ा तकरार
कल्याणी शंकर - 2016-08-19 12:41 UTC
मुलायम सिंह यादव के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। परिवार का झगड़ा अब सार्वजनिक हो गया है। विधानसभा का चुनाव सिर पर है और सरकार के खिलाफ लोगों का असंतोष पार्टी की चुनाव संभावना को कमजोर कर रहा है। वैसी हालत में देश का सबसे बड़ा राजनैतिक परिवार में छिड़ा युद्ध कोई अच्छा संकेत नहीं है। गौरतलब हो कि मुलायम सिह यादव का परिवार देश का सबसे बड़ा राजनैतिक परिवार है, जिसके कम से कम 20 सदस्य किसी न किसी महत्वपूर्ण राजनैतिक पद पर बैठे हैं।

बाबूलाल गौड़ विद्रोह की मुद्रा में

यादवों की सभा में अपनी भड़ास निकाली
एल एस हरदेनिया - 2016-08-18 17:12 UTC
भोपालः क्या बाबूलाल गौर अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विद्रोह का इरादा रखते हैं? भोपाल में आयोजित यादवों की एक सभा में उन्होंने जो कुछ कहा, उसका संकेत तो यही है।

सीपीएम डाल रही है मणि पर डोरे

सीपीआई और अच्युतानंदन हैं नाराज
पी श्रीकुमारन - 2016-08-17 18:39 UTC
तिरुअनंतपुरमः गठबंधन की राजनीति में राजनैतिक मोर्चे को विस्तार देना वक्त की जरूरत है, लेकिन यह यदि राजनैतिक प्रतिबद्ता को ताक पर रख कर किया जाता है, तो इससे गठबंधन को बढ़ाने वाले का जनाधार प्रभावित हो सकता है।

शहरों और राज्यों के बदलते नाम

अब बारी है पश्चिम बंगाल की
हरिहर स्वरूप - 2016-08-17 18:37 UTC
अब राज्यों, शहरों, सड़कों और गलियों का नाम बदला जाना रूटीन हो गया है। पिछले कुछ समय में अनेक नाम बदले हैं। नाम बदलने के अलग अलग कारण बताए जाते हैं। कभी नाम बदलने के लिए इतिहास का हवाला दिया जाता है, तो कभी साम्राज्यवादी स्मृति से छुटकारा पाने के लिए नाम बदल दिए जाते हैं। कई बार तो राजनैतिक कारणों से भी नाम बदल दिए जाते हैं। कलकत्ता में एक हैरिंगटन स्ट्रीट हुआ करती थी। वह स्ट्रीट अभी भी है, लेकिन उसका नाम बदल कर हो ची मिन्ह कर दिया गया है।

अखिलेश का मुलायम हिन्दुत्व

भाजपा के कट्टर हिन्दुत्व से मुकाबले की तैयारी
प्रदीप कपूर - 2016-08-14 04:09 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी हिन्दुत्व कार्ड खेल रहे हैं, हालांकि उनके इस कार्ड को हम मुलायम हिन्दुत्व कार्ड कह सकते हैं, क्योंकि इसमें इस्लाम विरोधी कट्टरता नहीं है।

कश्मीर को चाहिए मरहम

महबूबा का हाथ मजबूत किया जाना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2016-08-12 10:26 UTC
संसद में इसकी चर्चा हो गई। प्रधानमंत्री ने भी इस पर अपनी बात कह दी। लगभग सभी पार्टियों के नेताओं ने इस मसले पर अपनी अपनी राय जाहिर कर दी है। उनमें से सभी ने कश्मीर में हो रही घटनाओं पर अपने आक्रोश व्यक्त किए हैं। इसकी चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक का भी आयोजन होगा। उस बैठक मे इस मांग पर विचार किया जाएगा कि क्या कश्मीर में एक सर्वदलीय शिष्टमंडल को भेजा जाना उचित होगा।

अभी शेष है कुपोषण से आजादी

लड़कों की बनिस्बत लड़कियां ज्यादा कुपोषित
अनिल जैन - 2016-08-11 09:49 UTC
लंबे समय से भारत ऐसा देश रहा है, जहां एक ओर संपन्नता और समृध्दि के द्वीप जगमगा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर घोर गरीबी और बदहाली का महासागर हिलोरे मार रहा है। बीते ढाई दशकों से यानी नवउदारीकृत आर्थिक नीतियां लागू होने के बाद से आर्थिक गैरबराबरी यह फासला और बढा है। एक छोटा तबका आला दर्जे के ऐशो-आराम वाली जीवनशैली के मजे ले रहा है और दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में हमारे देश के धनकुबेर शामिल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश की आबादी के एक बडे हिस्से को भरपेट भोजन तक मयस्सर नहीं है। हमारे लगभग आधे बच्चे कुपोषित हैं। इस स्थिति पर कोई चार साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था- 'एक ओर देश में हर साल उचित भंडारण के अभाव में लाखों टन अनाज सड जाता है जबकि दूसरी ओर करोडों भारतीयों को भूखे पेट सोना पडता है।’ देश की सर्वोच्च अदालत की इस कठोर टिप्पणी के बाद भी आज तक हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। भंडारण की बदइंतजामी के चलते अनाज के सडने और लोगों के भूख से मरने-बिलबिलाने का सिलसिला लगातार जारी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण और दर्दनाक स्थिति तब है जब हम अपनी आजादी के सात दशक पूरा करने की दहलीज पर हैं।

क्या पीएम की दलित चिंता असली है?

कथित गौरक्षकों को संघ परिवार का समर्थन प्राप्त है
अमूल्य गांगुली - 2016-08-11 07:20 UTC
नरेन्द्र मोदी संघ परिवार के हिंसक लोगों के खिलाफ अपना मुंह खोलने में बहुत ज्यादा समय ले लेते हैं। जब अखलाक ही हत्या हुई थी, तो उन्होंने उसके खिलाफ एक शब्द बोलने में 10 दिन का समय ले लिया था।
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