भारी कर्ज के भार से कराहती भारतीय रेल
- 2016-05-29 15:53 UTCआज की तारीख में भारतीय रेलवे के लिए सबसे बड़ी चिंता उसके ऊपर बढ़ते कर्ज का भार है जिसकी कराह से रेलवे की सारी कमाई धरी की धरी रह जाती है क्योंकि इस कर्ज के ब्याज के रूप में ही भारी भरकम राशि इसे चुकाने पड़ रहे हैं। पत्रकार शशिकान्त सुशांत द्वारा दाखिल आरटीआई के जवाब में रेलवे ने जो अपने कर्ज का आंकड़ा दिया है उसके अनुसार दिसंबर 31, 2015 तक भारतीय रेलवे पर भारतीय रेल वित्त निगम का 82 हजार 961 करोड़, विभिन्न स्त्रातों जैसे वल्र्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी से 37 हजार 309 करोड़ और 1 लाख 50 हजार करोड़ रूपये भारतीय जीवन बीमा निगम से कर्ज लिया जा चुका है। इसके साथ-साथ मुंबई-अहमदाबाद के बीच 500 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन ट्रैक निर्माण के लिए जापान से 1,00000 करोड़ रूपये की राशि अलग है। इस तरह कुल मिलाकर रेलवे पर अलगे छह वर्षों में 3 लाख 70 हजार 270 करोड़ रूपये का कर्ज चढ़ गया है जिसके भार से रेलवे कब तक निकलेगी इसकी गणना अगले दस वर्षों में ही की जा सकेगी।