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भारतीय जनता पार्टी दिखा रही है हताशा

भारत माता की जय उसका नया कार्ड
बी के चम - 2016-04-02 11:49 UTC
चंडीगढ़ः क्या भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के ताजा बयान उनकी हताशा को दिखाता है या इसके पीछे उनकी कोई सोची समझी चाल है? क्या उसे डर लग रहा है कि पिछले कुछ सप्ताहों में जो घटनाएं घटी हैं, उनसे पार्टी की छवि को झटका लगा है और उसके कारण पांच राज्यो में हो रहे चुनावों मे पार्टी को नुकसान हो सकता है?
उत्तराखंड का राजनैतिक संकट

कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व पर एक विपरीत टिप्पणी

कल्याणी शंकर - 2016-04-01 10:51 UTC
उत्तराखंड में चल रही ’आया राम, गया राम’ की राजनीति से यही पता चलता है कि हमारी राजनैतिक व्यवस्था में सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। हमारे देश में कड़ा दलबदल विरोधी कानून है, इसके बावजूद छोटे राज्यों के विधायक इसे अंगूठा दिखाने मे सफल हो जाते हैं। उत्तराखंड में तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है और अनेक पेचिदगियां वहां पैदा हो गई हैं। पेश किए गए बजट को पारित होने या न होने को लेकर विवाद पैदा हो गया है। राष्ट्रपति शासन भी वहां लागू हो गया है और उस आदेश को लेकर मामला कोर्ट में भी जा पहुंचा है। कोर्ट राष्ट्रपति शासन के उस आदेश पर ही सवाल खड़ा कर रहा है। इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। छह महीने पहले उत्तराखंड में भी कुछ वैसा ही हो रहा था। वहां भी उत्तराखंड की तरह कांग्रेस विधायकों ने विद्रोह कर दिया था और अंत में वहां भी राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा था।

उत्तराखंड का राजनैतिक संकट

भाजपा ने की एक और चूक
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-04-01 10:47 UTC
उत्तराखंड में चल रही राजनैतिक अस्थिरता का अंत होता अभी दिखाई नहीं पड़ रहा है। जब कभी इसकी विधानसभा के आमचुनाव होंगे, उसके बाद ही इस अस्थिरता का अंत हो पाएगा। इसमें कोई दो मत नहीं कि भारतीय जनता पार्टी ने इस अस्थिरता को हवा दी है और इसके कारण आज सबसे ज्यादा फजीहत उसी की हो रही है। वह सफाई दे रही है कि इस समस्या के लिए कांग्रेस का आंतरिक कलह जिम्मेदार है। यह आंशिक रूप से ही सही है। कांग्रेस में आंतरिक कलह है और कोई नया नहीं है। पिछली विधानसभा का चुनाव जीतकर जब कांग्रेस सत्ता में आई थी, कलह उस समय भी थी। जब विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बना दिया गया, उस समय कलह और तेज हो गई। लेकिन उस समय तो वह राजनैतिक बवंडर खड़ा नहीं हुआ, जो आज हुआ है। अंतर यह है कि आज भारतीय जनता पार्टी उस कलह का इस्तेमाल कर कांग्रेस की सरकार को वहां गिरा चुकी है और वैसा करके उसने अपने आप को राजनैतिक रूप से थोड़ा और कुख्यात कर लिया है।

यूडीएफ में सीटों को लेकर मारामारी

कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
पी श्रीकुमारन - 2016-03-30 11:09 UTC
तिरुअनंतपुरमः सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के सामने सीटों के बंटवारे की एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। कांग्रेस के सहयोगी दल अपने लिए ज्यादा से ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस झुकने के लिए तैयार नहीं है।

बंगाल चुनाव में तृणमूल बेहतर स्थिति में

वाम-कांग्रेस गठबंधन दे पाएंगे मुकाबला?
नन्तू बनर्जी - 2016-03-29 11:51 UTC
कोलकाता व पश्चिम बंगाल के अन्य इलाकों की दीवारों पर चुनाव प्रचार के नतीजे लिखे दिखाई पड़ सकते हैं। उनमे से 80 फीसदी पर तृणमूल कांग्रेस के प्रचार लिख दिए गए हैं। इसे देखकर तो यही लगता है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने चुनाव के नतीजे पहले ही जारी कर दिए हैं, हालांकि मतदान होने अभी बाकी हैं।

उफ! पेरियार के प्रदेश में यह कलंक-कथा

दलित पिछड़ी जातियों की हिंसा के शिकार हो रहे
अनिल जैन - 2016-03-28 13:08 UTC
आधुनिक भारत में तमिलनाडु को जाति-व्यवस्था और ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन की आदिभूमि माना जाता है। वहां देश की आजादी के पहले और उसके बाद भी पेरियार रामास्वामी नायकर के नेतृत्व में बाल विवाह, देवदासी प्रथा, विधवा पुनर्विवाह विरोधी अवधारणा और दलितों व स्त्रियों के शोषण आदि सामाजिक बुराइयों के विरुध्द लंबे समय तक आंदोलन चले हैं। उसी तमिलनाडु के त्रिपुर में पिछले दिनों कथित सम्मान के नाम पर एक दलित युवक की दिनदहाडे सरेआम हत्या की घटना दहला देने वाली और सामाजिक विकास के लिहाज से गंभीर चिंता पैदा करने वाली है। इससे ज्यादा हैरानी और अफसोस की बात और क्या होगी कि जिस दौर में जाति की जड़ता तोड़ने को सामाजिक विकास के लिए एक जरुरी प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा हो, उसमें किसी दलित युवक को इसलिए मार डाला जाए कि उसने प्रेम और विवाह में जाति के सवाल को परे कर दिया था।
भारत

रेलवे में सुधार : अधर में पड़ी हैं समिति की रपटें

एम.वाई. सिद्दीकी - 2016-03-28 13:03 UTC
पिछले कुछ वर्षों में रेलवे में ढांचागत से लेकर तकनीकी सुधार से संबंधित तैयार विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को लागू करने में आवश्यकता से ज्यादा देरी हो रही है। रेल मंत्रालय की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि ये रिपोर्ट बहुत पहले से ही रेलवे को सौंपे जा चुके हैं। इससे इन समितियों के संवैधानिक औचित्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। रेलवे में सुधार से संबंधित रिपोर्ट तैयार करने वाली समितियों में प्रमुख रूप से काकोदकर समिति, सैम पित्रोदा समिति, मित्तल समिति, श्रीधरण समिति और बिबेक देबरॉय समिति प्रमुख हैं। इन समितियों ने रेलवे को 2012 से लेकर 2015 तक अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी हैं। दूसरी ओर रेलवे के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इन समितियों की रपटों का परीक्षण का कार्य चल रहा है और इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया निकट भविष्य में प्रारंभ हो जाएगा।

धनबल, सत्ताबल और मठबल का अश्लील प्रदर्शन

शासक वर्ग धर्म का इस्तेमाल कर रहा है
अनिल जैन - 2016-03-26 10:07 UTC
अपने देश में धर्म-अध्यात्म का चोला ओढ़े बाबाओं के पीछे पगलाए लोगों की कमी नहीं है। ऐसे लोगों में अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे गरीब ही नहीं बल्कि उनसे भी ज्यादा अच्छे-खासे शिक्षित और खाए-अघाए लोग भी होते हैं। इन बाबाओं को राजनेताओं और सत्ता प्रतिष्ठान का प्रश्रय मिलना भी कतई चैंकाता नहीं है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ कि किसी आध्यात्मिक गुरू के एक विवादास्पद आयोजन में भारत सरकार ने सारे नियम-कायदे ताक पर रखकर अपने पूरे तंत्र को ही नहीं बल्कि देश की सेना तक को झोंक दिया गया।

स्वच्छता अभियान पर धब्बा हैं अधूरे शौचालय

कब तक होंगे पूरे अधूरे शौचालय
राजु कुमार - 2016-03-26 10:05 UTC
मध्यप्रदेश में सरकार लगातार यह बात दोहराती है कि प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन को प्राथमिकता दी जा रही है। गांवों, पंचायतों, विकासखंडों से आगे जाकर एक जिला को भी खुले में शौच से मुक्त कर दिए जाने की घोषणा कर दी गई है। सैकड़ों पंचायतों के बीच नरसिंहपुर के चांवरपाठा विकासखंड, सीहोर जिले के बुदनी विकासखंड और संपूर्ण इंदौर जिले को खुले में शौच से मुक्त किया गया है। बुदनी विकासखंड मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान का गृह क्षेत्र है। सरकारी दावों से अलग इन्हें पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त कहना अभी बहुत ही कठिन है, क्योंकि अधिकांश जगहों पर कागजों पर बना दिए गए शौचालय या अधूरे, अनुपयोगी शौचालय इस मिशन के स्याह पक्ष है। सीहोर जिले के संदर्भ में मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने भी स्वीकार किया कि जिले में अधूरे एवं अनुपयोगी शौचालय हैं। पर सीहोर या शहरों के पास के ग्रामीण इलाकें से ज्यादा बुरी स्थिति दूर-दराज के आदिवासी अंचलों में ज्यादा खराब है। वहां लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
भारत

प्रधानमंत्री का अम्बेडकर प्रेम

क्या दलितों के बीच पैठ बना पाएगी भाजपा?
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-03-23 11:34 UTC
दिल्ली में अंबेडकर के एक स्मारक का शिलान्यास करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दावा किया कि वे अंबेडकर भक्त हैं और आरक्षण को वे खरोंच तक नहीं आने देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टियां आरक्षण को लेकर देश में भ्रम फैला रही हैं कि उनकी सरकार इसे खत्म कर देगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब आरएसएस के नेता आरक्षण की समीक्षा की मांग करते दिखाई पड़ रहे हैं। कुछ दिन पहले हुए आरएसएस के एक चिंतन शिविर में चिंतन के बाद संघ ने प्रस्ताव पास कर उन लोगों से आरक्षण छोड़ने का अनुरोध किया, जो सशक्त और संपन्न हैं।
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