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केरल चुनाव: सीटों के बंटवारे की समस्या

सभी पार्टियों के सामने बड़ी चुनौती
पी श्रीकुमारन - 2016-03-10 10:36 UTC
तिरुअनतुपरमः केरल विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। सभी पार्टियों ने उम्मीदवारों के चयन का काम शुरू भी कर दिया है, लेकिन चयन के काम में एक बड़ी बाधा गठबंधन के दलों के बीच सीटों का बंटवारा है।

मोदी को भाषण कला में टक्कर दे रहे हैं राहुल

लोक सभा में उनका भाषण बेजोड़ रहा
हरिहर स्वरूप - 2016-03-09 09:56 UTC
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राहुल गांधी ने जो भाषण दिया वह बेजोड़ था। उसके जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने जो भाषण दिया, वह भी बहुत अच्छा था, लेकिन राहुल ने अपने भाषण में जो सवाल पूछे थे, उसके जवाब प्रधानमंत्री ने दिए ही नहीं। उन्होंने बहुत ही तीखे और मारक शब्दों में प्रधानमंत्री से रोहित वेमुला की मौत, जवाहरलाल नेहरू में किया गया हस्तक्षेप और पाकिस्तान नीति पर हमले किये थे और प्रधानमंत्री से उनके बारे में जानना चाहा था। राहुल गांधी ने सरकार के काला धन को सफेद बनाए जाने की नीति का भी जमकर मजाक उड़ाया था। उन्होंने उस नीति को ’’फेयर एंड लवली’’ योजना बताई थी। उन्होंने ’’मेक इन इंडिया’’ की योजना को बब्बर शेर बताया था। प्रधानमंत्री की यह कहकर आलोचना की थी कि वे निर्णय लेने के पहले अपने मंत्रियों से बात नहीं करते। उन्होंने मंत्रियों का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करने की हिम्मत नहीं होती।

कन्हैया को लेकर भाजपा नर्वस़

उसके पास कन्हैया की काट का कोई नेता नहीं
अमूल्य गांगुली - 2016-03-08 10:35 UTC
यह बात समझ में आती है कि छात्रों के आंदोलन से भारतीय जनता पार्टी परेशान क्यों है। वह अपनी विरोधी पार्टियों के विरोध से परेशान नहीं है, लेकिन छात्रों द्वारा किया जा रहा विरोध से खासा परेशान कर रहा है। इसका कारण यह है कि जब 2014 में वह लोकसभा का चुनाव लड़ रही थी, तो मैदान उसके लिए पूरा खाली था, क्योंकि देश के लोग उसकी विरोधी पार्टियों और उनके नेताओं से खफा था। इसका कारण यह है कि उन नेताओं ने अपनी विश्वसनीयता खो डाली थी।

वेमुला और कन्हैया प्रकरण केन्द्र सरकार पर भारी

मोदी की देश और विदेश में छवि बिगड़ी
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-03-07 10:16 UTC
नरेन्द्र मोदी की सरकार के अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं, पर उसकी देश में छवि ऐसी हो गई है कि भारतीय जनता पार्टी को आने वाले चुनावों में जीत हासिल करने के लिए बहुत ही मशक्कत करनी होगी। वेमुला की आत्महत्या ने नरेन्द्र मेादी की ओबीसी छवि को नुकसान पहुंचाया है, तो कन्हैया प्रकरण ने मोदी की चाय वाले के बेटे की छवि पर कुठाराघात कर दिया है। इन दोनों प्रकरणों ने केवल सरकार की छवि देश में, बल्कि विदेशों में भी खराब कर दी है, क्योंकि कन्हैया की गिरफ्तारी के साथ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के खिलाफ जो अभियान चले, उसे अंतरराष्ट्रीय पब्लिसीटी मिली और जनेवि के खिलाफ भारत के सत्ताधारियों द्वारा चलाए गए अभियान की दुनिया के 500 विश्वविद्यालयों ने निंदा की।

केरल कांग्रेस (मणि) दो फाड़

कांग्रेस नेतृत्व वाले मोर्चे को झटका
पी श्रीकुमारन - 2016-03-05 11:42 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के लिए अभी खराब समय चल रहा है। कानूनी मोर्चे पर यूडीएफ को दो बड़े झटके लगे और अब उसको एक करारा राजनैतिक झटका भी लगा है।

भाजपा और बीजद के बीच सौदा

ओडिसा के मुख्यमंत्री की भूमिका निर्णायक
अशोक बी शर्मा - 2016-03-04 11:24 UTC
स्मार्ट सीटी की सूची में भुवनेश्वर सबसे ऊपर है और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु की पहली बार प्रशंसा की है और कहा है कि उनके प्रदेश ओडिसा के प्रति बहुत ही उदार हैं। इन सबसे कांग्रेस को लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी और नवीन पटनायक के बीजू जनता दल के बीच कोई न कोई सौदेबाजी हुई है। नवीन पटनायक एक पोंजी और खनिज घोटाले में फंसे हुए हैं और उन घोटालों की जांच सीबीआई कर रही है। वे चाहते हैं कि सीबीआई के काम में सुस्ती आ जाए।

उत्तर प्रदेश में दलित वोटों के लिए मारामारी

चुनावों में इनकी भूमिका निर्णायक
प्रदीप कपूर - 2016-03-03 10:45 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में दलित वोटों के लिए राजनैतिक पार्टियों के बीच घमासान मच गया है। प्रदेश में अनुसूचित जातियों की आबादी कुल आबादी की 20 फीसदी से भी ज्यादा है। चुनावी नतीजे प्रभावित करने मंे उनकी भूमिका सबसे ज्यादा होती है। यही कारण है कि सभी पार्टियां उनके मतों के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा में कर रही हैं।

भारत में राजनैतिक पतन का दौर

भाजपा और उसके सहयोगी साबित हो रहे हैं अक्षम
बी के चम - 2016-03-02 11:58 UTC
चंडीगढ़ः भारत का राजनैतिक पतन तेजी से हो रहा है। 2015 में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण हो रहा था, जिसके कारण देश की एकता और अखंडता को खतरा पैदा हो गया था। और अब जातिगत ध्रुवीकरण का दौर शुरू हो गया है। इससे देश के सामाजिक ताने बाने को खतरा पैदा हो गया है। इन घटनाओं के पीछे संघ परिवार के लोगों का हाथ है। वे अखंड भारत की बात करते हुए भारत को खंडित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मोदी सरकार का तीसरा बजट: मध्यवर्ग के लिए कोई राहत नहीं

उपेन्द्र प्रसाद - 2016-03-01 11:34 UTC
अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए इस तीसरे बजट को मोदी सरकार का पहला असली बजट माना जा रहा था। उम्मीद थी यह बजट कठोर होगा, क्योंकि लोकप्रिय बजट तब पेश किया जाता है, जब सरकारी पार्टियों को चुनाव का सामना करना पड़ता है। चूंकि चुनाव 2019 में है, इसलिए 2016 और 2017 मे पेश किए गए बजट को कठोर बनाने में सरकारी पार्टियों को कोई नुकसान होता दिखाई नहीं पड़ता है।

लवलीन केस की विलंबित सुनवाई

पी विजयन और सीपीएम के खेमे में खुशी
पी श्रीकुमारन - 2016-02-29 11:44 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल की सीपीएम ईकाई के लिए लवलीन मामले की अंतिम सुनवाई को हाई कोर्ट द्वारा दो महीने तक टालने की घटना एक वरदान के रूप में आई है। इस मामले से सीपीएम के नेता पी विजयन का नाम जुड़ा हुआ है, इसलिए पी विजयन के लिए तो यह बहुत ही राहत का सबब लेकर आया है।
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