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भाजपा ने वामपंथी छात्रों पर निशाना साधा

जेएनयू संकट से केन्द्र के पक्षपात की बू आती है
अमूल्य गांगुली - 2016-02-18 16:34 UTC
पिछले महीने हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय और इस समय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जो हो रहा है, उसमें काफी समानता देखी जा सकती है।

टूट चुका है मोदी के अपराजेय होने का मिथ

लोकतंत्र में जनादेश की भी एक सीमा होती है
हरिहर स्वरूप - 2016-02-15 11:39 UTC
नरेन्द्र मोदी अपराजेय हैं, यह मिथ ध्वस्त हो चुका है। पहले दिल्ली में उनकी करारी हार हुई और उसके बाद बिहार में भी वे बुरी तरह हारे। अब केन्द्र का बजट सत्र आ रहा है और उसके ठीक पहले जो कुछ हो रहा है, वह मोदी सरकार के लिए अपशकुन जैसा ही है। इस साल 5 राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव हो रहे हैं। दिल्ली और बिहार की हार को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को लेकर अपनी रणनीति बदल डाली है।

उत्तर प्रदेश के उपचुनावों पर सबकी नजर

सपा को सभी सीटों पर जीत की उम्मीद
प्रदीप कपूर - 2016-02-13 18:20 UTC
लखनऊः 13 फरीवरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा के तीन उपचुनावों के लिए मतदान हुए। वे विधानसभा क्षेत्र हैं बिकापुर, देवबंद और मुजफ्फरनगर। इनके चुनावी नतीजे आगामी विधानसभा आमचुनाव के मूड तय कर देंगे।

सहयोगियों को शांत करने के लिए भाजपा सक्रिय

शाह ने उनकी शिकायतों को दूर करने के मेकैनिज्म बनाने की बात की
कल्याणी शंकर - 2016-02-12 10:20 UTC
भारतीय जनता पार्टी के सामने एक नई समस्या आ रही है और वह समस्या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अपने सहयोगी दलो के असंतोष से संबंधित है। उनके अनेक सहयोगी दल हैं, लेकिन उसे सबसे ज्यादा समस्या का सामना उन दलों से हो रहा है, जिनके साथ वह प्रदेशों मे सरकार चला रही है।

मनरेगा के 10 साल

इसे अन्य ग्रामीण योजनाओं से जोड़ दिया जाना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-02-11 10:35 UTC
महात्मा गांधी नेशनल रूरल इम्पल्वाय गारंटी एक्ट (मनरेगा) 2005 में बना था। इसके 10 साल पूरे हो गए हैं। इस बीच इसकी क्या उपलब्धियां रहीं और यह कितना नाकाम रहा, इस पर चर्चा होना स्वाभाविक है, क्योंकि इसके आधार पर ही इससे और भी ज्यादा फलदायी बनाने की रणनीतियां बनाई जा सकती हैं अथवा यह विचार किया जा सकता है कि इसे रहने दिया जाय भी या नहीं।

संघ समर्थकों ने कानून अपने हाथों में लेने की ठानी

वसंत पंचमी को धार मे हो सकता है भारी तनाव
एल एस हरदेनिया - 2016-02-10 10:31 UTC
भोपालः अगले 12 फरवरी को वसंत पंचमी है। इस दिन हिन्दु सरस्वती पूजा करते हैं और उत्सव मनाते हैं। लेकिन उत्सव का यह दिन मध्यप्रदेश के धार शहर को भारी पड़ सकता है।

वेमुला की आत्महत्या से मोदी को झटका

खोयी जमीन वापस पाना आसान नहीं होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-02-09 10:32 UTC
दिल्ली और बिहार विधानसभा के चुनावों में मिली शिकस्त के बाद भी नरेन्द्र मोदी की राजनैतिक प्रतिष्ठा को उतना झटका नहीं लगा है, जितना बड़ा झटका उनकी प्रतिष्ठा को रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद लगा है। आत्महत्या अपने आप में बड़ी खबर नहीं होती। खासकर दक्षिण भारत के राज्यों मंे लोगों मंे तो आत्महत्या की प्रवृत्ति बहुत ही ज्यादा है। जयललिता के जेल जाने के बाद तमिलनाडु में कई लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। आंध्र प्रदेश के ही तत्कालीन मुख्यमंत्री रेड्डी की एक हेलिकाॅप्टर दुर्घटना में मौत के बाद उस राज्य के अनेक लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।

महबूबा मु्फ्ती भाजपा पर आक्रामक हुई

पार्टी का आधार बचाना उनकी पहली प्राथमिकता
हरिहर स्वरूप - 2016-02-08 10:48 UTC
भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन कर सरकार के गठन में महबूबा मुफ्ती विलंब क्यों कर रही है? यदि वह भाजपा के साथ मिलकर जम्मू और कश्मीर मे अपनी सरकार बनाती है, तो उसके सामने कश्मीर घाटी में अपना जनाधार खोने का खतरा है। मुफ्ती मोहम्मद सईद एक अनुभवी नेता थे और उनकी शख्सियत बहुत बड़ी थी, इसलिए वे इस अंतर्विरोध को बर्दाश्त कर सकते थे। लेकिन महबूबा मुफ्ती में वह काबिलियत नहीं है। यदि महबूबा सरकार बनाने में विफल रही, तो प्रदेश मंे फिर से नया चुनाव हो सकता हैं। और यह उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि उन्हें पता है कि उनकी पार्टी घाटी में अपना जनाधार तेजी से खो रही है। जनाधार खोने का एकमात्र कारण भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर मुफ्ती मोहम्मद का सरकार बनाना था।

उत्तर प्रदेश में माया की चुनौती बेहद कठिन

बसपा प्रमुख कर रही है विशेष तैयारी
प्रदीप कपूर - 2016-02-06 09:36 UTC
लखनऊः बसपा प्रमुख मायावती ने अपना दलित वोट आधार बचाने और अगड़े और मुस्लिम समुदाय में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए जबर्दस्त अभियान छेड़ रखा है। वे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से पराजित हुई थीं।

उत्तर और दक्षिण के दो बुजुर्ग नेता

करुणानिधि और बादल करेंगे चुनावों का सामना
कल्याणी शंकर - 2016-02-05 10:51 UTC
दो क्षेत्रीय दलों के दो बड़े नेता अगले 12 महीनो मे दो राज्यों के विधानसभाओ के चुनावों का सामना करते दिखाई देंगे। उनमें से एक उत्तर भारत के हैं, तो दूसरे दक्षिण भारत के। उत्तर भारत के पंजाब के शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल 88 साल के हैं, जबकि दक्षिण भारत के तमिलनाडु के नेता करुणानिधि 94 साल के हैं। दोनों अपने अपने दलों के प्रमुख भी है। सच तो यह है कि किसी भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी का प्रमुख अबतक 94 साल का कोई व्यक्ति नहीं हुआ है। इस मायने में करुणानिधि ने तो एक राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया ही है, हो सकता है कि उनका इस उम्र मंे अपनी पार्टी का मुखिया होना एक विश्व रिकार्ड भी हो।
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