डीडीसीए का तूफान जेटली का कर सकता है स्थाई नुकसान
न कीर्ति शांत होंगे और न ही केजरीवाल
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2015-12-28 12:47 UTC
अरुण जेटली को एक बहुत ही व्यावहारिक नेता माना जाता है। वे एक बहुत ही तीक्ष्ण वकील रहे हैं। लेकिन उनके जैसा व्यक्ति भी एक के बाद एक गलतियां कर सकता है। यह कोई भी सवाल कर सकता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर छापेमारी की जरूरत क्या थी? कहने को तो वह छापेमारी मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार के दफ्तर पर थी, लेकिन मुख्यमंत्री के दफ्तर से राजेन्द्र कुमार के दफ्तर का अंतर कर पाना आसान नहीं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने बिना समय गंवाए पहले प्रधानमंत्री पर निजी हमला कर डाला और उसके बाद मौके का लाभ उठाते हुए उन्होंने उस छापे को डीडीसीए में अरुण जेटली के कार्यकाल में हुए घोटाले से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के एक दफ्तर में डीडीसीए घोटाले से संबंधित एक फाइल थी, जिसमें जेटली फंसते दिखाई दे रहे थे और उसी फाइल को हासिल करने के लिए उनके दफ्तर में सीबीआई का छापा पड़वाया गया।