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कश्मीर के हल के लिए व्यावहारिक होना पड़ेगा

सुषमा की इस्लामाबाद वार्ता से उम्मीदें बढ़ीं
हरिहर स्वरूप - 2015-12-14 12:22 UTC
भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत जब भी शुरू हो अथव बातचीत जब भी टूट जाय, दोनों परिस्थितियों में कश्मीर मुख्य समस्या होती है। इस बार भी भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की इस्लामाबाद यात्रा के बाद जब दोनों पक्षों के बीच व्यापक बातचीत होने की घोषणा हुई, तब भी बातचीत के मूल में कश्मीर मसला ही है।

भाजपा अपने राजनैतिक विरोधियों के पीछे जरूर होगी

लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष संपत्ति हड़पने के आरोप का जवाब दें
नन्तू बनर्जी - 2015-12-12 10:43 UTC
लोग यही चाहेंगे कि इन्दिरा गांधी की बहु सोनिया गांधी अपनी सास के प्रति ज्यादा सम्मान दिखाएं। अदालत द्वारा जारी किए गए समन पर वह जिस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही हैं, उससे इन्दिरा गांधी का सम्मान नहीं बढ़ता। वह कह रही हैं कि वह अदालती मुकदमों से नहीं डरेगी, क्योंकि वह इन्दिरा गांधी की बहु है, लेकिन वह यह भूल जाती हैं कि जब इन्दिरा गांधी के खिलाफ मुकदमा चल रहा था, तो वह उस मुकदमे को अदालत का सम्मान करती हुई लड़ रही थीं। हालांकि अंत में वह इलाहाबाद में मुकदमा हार गईं, लेकिन मुकदमे के दौरान उन्होंने संसद की कार्रवाई तबाह नहीं की। उन्होंने इस बात का रोना नहीं रोया कि उनके राजनैतिक विरोधी उनके खिलाफ झूठा मुकदमा चला रहे हैं। उन्होंने यह शिकायत नहीं की कि अदालती प्रक्रिया का इस्तेमाल कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह नहीं कहा कि वह जवाहर लाल की बेटी हैं और वह किसी से नहीं डरतीं।

भाजपा और कांग्रेस का टकराव अलोकतांत्रिक

राजनीति ने संसद को बंधक बना लिया है
कल्याणी शंकर - 2015-12-12 02:57 UTC
जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ एक अच्छे माहौल पर अपने निवास पर बैठक की, तो यह लग रहा था कि संसद का शीतकालीन सत्र अब अच्छी तरह चलेगा और आर्थिक सुधार कार्यक्रमों के विधेयक पारित हो जाएंगे। प्रधानमंत्री ने संसद में अपने भाषण में टकराव की जगह मेल का भाव अपनाया था और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भूरी भूरी प्रशंसा की थी। उस मुलाकात में सोनिया गांधी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी थे। बैठक के बाद कांग्रेस भी नरम रुख दिखा रही थी और वह वस्तु सेवा कर विधेयक को पारित कराने का संकेत दे रही थी।
भारत

नेशनल हेराल्ड मामले का राजनैतिकरण

आग से खेल रहे हैं सोनिया और राहुल
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-12-10 11:04 UTC
सोनिया और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड से जुड़े एक मामले मे हाई कोर्ट के एक निर्णय के बाद जो कर रहे हैं, वह इस देश की एक अभूतपूर्व घटना है। इसके पहले भी अदालती निर्णयों पर अनेक बार तल्ख टिप्पणियां होती रही है, लेकिन वे टिप्पणियां सिर्फ फैसलों पर ही होती थीं। जज और न्यायपालिका को कोई राजनेता कटघरे में खड़ा नहीं करता था। ज्यादा से ज्यादा जांच एजेंसियों की आलोचना की जाती थी और उसके द्वारा उनकी आलोचना की जाती थी, जिनके हाथ मे जांच एजेंसियां हैं। लाख कमियां होने के बावजूद न्यायपालिका और जजों के प्रति एक सम्मान का भाव होता था। नीचले अदालत के फैसले को स्वीकार या अस्वीकार करते हुए ऊपरी अदालतों में जाने की बात की जाती थी। यदि किसी तरह की टिप्पणी या सजा भी किसी अदालत ने दी है, तो उसके खिलाफ अपील करने का अधिकार रहता है और उसका हवाला देते हुए अपने आपको निर्दोष बनाए रखने का दावा भी किया जाता था। कहा जाता था कि जबतक देश की आखिरी अदालत अपना फैसला न सुना दे, तब तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।

नई पार्टी को लेकर केरल में उथल पुथल

भाजपा और वाममोर्चा में भ्रम की स्थिति
पी श्रीकुमारन - 2015-12-09 09:38 UTC
तिरुअनंतपुरमः श्री नारायणा धर्म परिपालना योगम ने एक राजनैतिक पार्टी के गठन का फैसला कर लिया है। योगम केरल की सबसे ज्यादा आबादी वाली हिन्दुओं की इझावा जाति का एक सामाजिक संगठन है। उस फैसले के बाद प्रदेश के राजनैतिक हलकों मंे इस बात को लेकर अटकबाजी की जा रही है, क्या इस नई पार्टी का गठन तीसरे मोर्चे के उदय का कारण बनेगा?
भारत

बाजारवादी मनमोहन सोनिया के समाजवाद के सामने झुके

लोकप्रियतावाद के दौर मे वापस आ गई है कांग्रेस
अमूल्य गांगुली - 2015-12-08 10:04 UTC
इंटक के सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने जो कुछ कहा वह बहुत ही हैरतअंगेज है। उन्होंने मोदी सरकार के प्रस्तावित आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का विरोध किया, जबकि देश भर में आम धारणा है कि नई आर्थिक नीतियो के तहत आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को लागू करने की शुरुआत मनमोहन सिंह ने ही की थी। दरअसल, इंटक के सम्मेलन मे मनमोहन सिंह कांग्रेस के उत्तराधिकारी राहुल गांधी के विचारों का समर्थन कर रहे थे।
भारत

कौन नहीं है नेहरू के गुनहगार?

मरणोपरांत उन्हें खारिज किया जाने लगा
अनिल जैन - 2015-12-07 11:16 UTC
देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक असहमति जगजाहिर है। केंद्र में उसकी सरकार के शीर्ष नेता जब-जब भी इस असहमति का इजहार करते हैं तो कांग्रेस की तरफ से आपत्ति जताते हुए कहा जाता है कि मौजूदा सरकार नेहरू की शानदार विरासत को न सिर्फ नकारने का बल्कि उसे योजनाबद्ध तरीके से मिटाने का भी प्रयास कर रही है। लेकिन डॉ. भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर संविधान के प्रति प्रतिबद्धता’ पर संसद में दो दिन की विशेष बहस के दौरान पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने और फिर बहस का समापन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आधुनिक भारत के निर्माण में और देश में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने में जवाहरलाल नेहरू के योगदान की उदारतापूर्वक और अप्रत्याशित रूप से सराहना की है। अब नेहरू की इस सराहना ने कांग्रेस नेतृत्व को कितना संतुष्ट किया होगा, यह तो अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन हकीकत यह है कि देश के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर नेहरू का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन होना अभी शेष है।
भारत

असहिष्णुता पर एक असहिष्णु बहस

असली मुद्दा उठा ही नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-12-05 10:57 UTC
पिछले दिनों असहिष्णुता पर लोकसभा में दो दिनों तक बहस चली। इस पर बहस देश भर में चल रही है और देश का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच लोकसभा के सदन पर इसकी चर्चा न हो, यह कैसे हो सकता था। लेकिन बहस का स्तर इतना गिरा हुआ था कि पता ही नहीं चल रहा था कि उसमें भाग लेने वालों को असहिष्णुता शब्द का मतलब पता है भी नहीं।

वस्तु सेवा कर पर नहीं होनी चाहिए राजनीति

मोदी सरकार को कांग्रेस को संतुष्ट करना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2015-12-04 10:53 UTC
वस्तु सेवा कर विधेयक को पारित करने के पीछे की राजनीति भी गजब है। इसे पारित कराने के लिए 2007 से ही कोशिश हो रही है, लेकिन यह विधेयक बार बार राजनीति का शिकार हो जाता है। जब केन्द्र में यूपीए की सरकार थी, तो वह उसे पास कराना चाहती थी और तब भाजपा उसका विरोध करती थी। अब भाजपा की सरकार केन्द्र में है और वह इसे पास कराना चाहती है, लेकिन अब यूपीए की नेता कांग्रेस इसका विरोध कर रही है।

भारत: मध्य प्रदेश

शिवराज चौहान सरकार के 10 साल

मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा दिन मुख्यमंत्री रहने का बनाया रिकार्ड
एल एस हरदेनिया - 2015-12-03 09:31 UTC
भोपालः पिछले 29 नवंबर को शिवराज सिंह चौहान ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल का 10 साल पूरा कर लिया। यह श्रेय अबतक प्रदेश में किसी भी भाजपा के मुख्यमंत्री को नहीं मिला है। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में अपना 10 साल जरूर पूरा किया है, लेकिन शिवराज सिंह ने उनसे ज्यादा दिन तक मुख्यमंत्री रहकर मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा दिन तक इस पद पर बने रहने का रिकाॅर्ड बना लिया है।
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