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भारत

उत्तर प्रदेश में अमित शाह की कठिन परीक्षा

समाजवादी पार्टी के लिए अस्तित्व की लड़ाई
प्रदीप कपूर - 2014-08-04 13:44 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में अमित शाह एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके सामने पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन हो दुहराने की चुनौती है। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में भाजपा ने 71 सीटों पर जीत हासिल की थी और उसके सहयोगी अपना दल को 2 सीटें मिली थीं। यानी 73 सीटों पर नरेन्द्र मोदी को जीत प्राप्त हुई थी।
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वीआईपी-वीवीआईपी को सुरक्षा और इसका औचित्य

एम.वाई. सिद्दीकी - 2014-08-03 16:29 UTC
भारत जैैसे लोकतांत्रिक देश में जहां, आम जनता स्वयंभू सत्ता नायक का दर्जा पाती है, वहां वीआईपी और वीवीआईपी (विशिष्ट व अतिविशिष्ट) माननीयों को प्रदान किए जाने वाले सुरक्षा कवच को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। कर्ई समाजशास्त्रियों का तो यहां तक मानना है कि जनता का सच्चा प्रतिनिधि होने का दावा करने वाले कथित नेता जब अपने लिए कड़ी सुरक्षा कवच की मांग करते हैं तो यह आम जनता के धन को पानी में बहाने के अलावा जनता से छलावा भी है, जो उन्हीं के बीच जाकर अपनी शान दिखाने का झूठा गौरव बघारते हैं।
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अन्य पार्टियों से भाजपा की ओर मच रही है भगदड़

तृणमूल कांग्रेस की परेशानी बढ़ी
आशीष बिश्वास - 2014-08-02 10:48 UTC
कोलकाताः पश्चिम बंगाल के आर्थिक ठहराव ने राजनैतिक अवसरवादिता को बढ़ावा दे रखा है। 2011 में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई और उसी समय से प्रदेश की राजनीति में एक नई प्रवृति दिखाई दे रही है। राजनीति से जुड़े लोग अपनी पार्टी को छोड़कर सत्तारूढ़ पार्टी की ओर भाग रहे हैं। सबसे पहले कांग्रेस में यह प्रवृति उभरी। उसके सदस्य तृणमूल कांग्रेस में भागते दिखाई देने लगे। उसके बाद यही प्रवृति वाम मोर्चे की पार्टियों में भी उभरी। सबसे पहले तो फार्वर्ड ब्लाक और आरएसी के नेता और कार्यकत्र्ता तृणमूल कांग्रेस की ओर मुखातिब दिखे। और अब तो सीपीएम के नेता और कार्यकत्र्ता भी तृणमूल में प्रवेश कर रहे हैं।
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एक नई पड़ोसी विदेश नीति का निर्माण जरूरी

मोदी सरकार के सामने एक नई चुनौती
कल्याणी शंकर - 2014-08-01 11:14 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले दो महीने से एक व्यावहारिक पड़ोसी नीति के निर्माण मंे लगे हुए हैं। पर सवाल उठता है कि क्या वे इसे पूरा कर पाएंगे और उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे? अभी कुछ भी कहना मुश्किल है, क्योंकि नीति निर्माण के साथ साथ ही उस पर अमल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इस समय तो विदेश मंत्रालय इस काम में पूरी तन्मयता के साथ लगा हुआ है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खुद पड़ोसी देशों की सरकारों से संपर्क कर रही हैं और उन्हें मोदी सरकार के इरादों से अवगत करा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद भी शपथ ग्रहण के बाद सबसे पहले भूटान की यात्रा की। उसके बाद अगले सप्ताह वे नेपाल की यात्रा पर जा रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के उपचुनाव

अमितशाह की असली परीक्षा
उपेन्द्र प्रसाद - 2014-07-31 11:15 UTC
उत्तराखंड में हुए उपचुनाव के नतीजे भाजपा का नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह के लिए ’’प्रथमग्रासे मक्षिकापात’’ साबित हुए हैं। वहां हुए तीनों उपचुनाव में भाजपा की हार हुई, जबकि दो सीटें तो भाजपा विधायकों के सांसद बन जाने के कारण खाली हुई थीं। लोकसभा चुनाव में भारी जीत और विधानसभा चुनाव में करारी मात- उत्तराखंड के लोगों ने साबित कर दिया कि हमारे देश के मतदाताओं में समय और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता आ गई है। लोकसभा चुनाव के समय नरेन्द्र मोदी उनके सामने प्रधानमंत्री के एक सशक्त दावेदार था। उन्हें लग रहा था कि श्री मोदी उनकी समस्याओं के समाधान हैं। इसलिए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों को ज्यादा वोट दिए। विधानसभा चुनाव में उनके सामने हरीश रावत मुख्यमंत्री के रूप में मौजूद थे। मतदाताओं को यह निर्णय करना था कि वे श्री रावत के प्र्रति अपना समर्थन दिखाते हैं या वे उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटे देखना चाहते हैं। उन्हें श्री रावत को मुख्यमंत्री पद पर बनाए रखना ही रास आया, इसलिए उन्होंने उस कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया, जिसे वे लोकसभा चुनावों के दौरान ठुकरा चुके थे।
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कांगेस का अंत निकट नहीं

उत्तराखंड की जीत को उसे आग भी दुहराना चाहिए
अमूल्य गांगुली - 2014-07-30 11:26 UTC
एक बार फिर सभी को चैंकना पड़ा है। लंबे समय से चल रहे चुनावी सूखे के बाद कांग्रेस को एकाएक मानसून के दर्शन हुए हैं। एक के बाद एक उसे हार का सामना करना पड़ रहा था। 2013 में चार राज्यों की विधानसभा चुनावों में उसे भारी हार का सामना करना पड़ा था। दिल्ली में तो उसे तीसरें नंबर की पार्टी भी हो जाना पड़ा। राजस्थान और मध्यप्रदेश में उसे भारी हार मिली थी। छत्तीसगढ़ में भी उसे जीत का स्वाद नहीं मिला।
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उत्तर प्रदेश कांग्रेस में राहुल का विरोध

प्रियंका की राजनैतिक सक्रियता के लिए अभियान
प्रदीप कपूर - 2014-07-28 11:06 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश के अनेक कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रियंका गांधी वाड्रा को मौका मिला तो प्रदेश में मृतप्राय कांग्रेस को फिर से वह जिंदा कर सकती हैं।
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ममता बनर्जी ने लिया वामपंथी झुकाव

21 जुलाई के भाषण में दिए महत्वपूर्ण संकेत
बरुण दास गुप्ता - 2014-07-26 10:55 UTC
कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस प्रत्येक साल 21 जुलाई को शहीद दिवस आयोजित करती है। इस दिन 1993 को 13 युवकों की पुलिस फायरिंग में मौत हुई थी। उस समय यहां वाम मोर्चे की सरकार थी और उस सरकार के खिलाफ पश्चिम बंगाल प्रदेश युवा कांग्रेस ने राइटर्स बिल्डिंग पर प्रदर्शन करने का आहवान किया था। उस समय ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थी। यह प्रदर्शन उन्हीें के नेतृत्व में हो रहा था। राइटर्स बिल्डिंग की ओर कूच करने के लिए युवक कोलकाता के अनेक स्थानों में उपस्थित हुए थे।
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साथी दल छोड़ रहे हैं कांग्रेस को

डूबती नाव में कोई रहना नहीं चाहता
कल्याणी शंकर - 2014-07-25 11:22 UTC
यूपीए के सहयोगी दल अब कांग्रेस को छोड़ते जा रहे हैं। कांग्रेस आज एक डूबती हुई नाव है, जिसकी सवारी करना अब कोई नहीं चाहता। जो उसके साथ पहले से थे, अब वे भी उसे छोड़ रहे हैं, तांिक वे ऐसी जगह जा सकें, जहां उन्हें ज्यादा माल मिले। उसे छोड़ने वालों में अब नेशनल कान्फ्रेंस भी शामिल हो गई है। कुछ दूसरी पार्टियां भी पीछे नहीं रहने वाली हैं। कांग्रेस अब लगातार अलग थलग पड़ती जा रही है। उसके साथ अब एनसीपी, राष्ट्रीय जनता दल और मुस्लिम लीग जैसे ही इक्के दुक्के दल रह गए हैं।
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तरुण गोगाई इस समय सुरक्षित

आलाकमान के मजबूत समर्थन ने उन्हें बचाया
बरुण दास गुप्ता - 2014-07-24 10:57 UTC
कोलकाताः मुख्यमंत्री तरुण गोगाई को हटाने का कांग्रेस असंतुष्टों का दो साल पुराना अभियान पिछले 21 जुलाई को अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचकर टूट गया। उस रोज सुबह मुख्यमंत्री के विरोधियों का नेतृत्व कर रहे हिमन्त बिस्वाल सरमा ने राज्यपाल से मुलाकात की। उनके साथ उस मुलाकात में कांग्रेस के 28 विधायक भी थे। यह संख्या महत्वपूर्ण है, क्योंकि दावा किया जा रहा था कि मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पाल रहे बिस्वाल के पास 56 कांग्रेसी विधायकों का समर्थन है। गौर तलब है कि 126 विधायकों वाली विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या वहां 78 है। राज्यपाल के साथ बैठक के बाद श्री बिस्वाल वहां से सीधे निकले और एक प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करने जा पहुंचे। प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने जो कुछ कहा वह परस्पर विरोधाभासी था।
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