भारत
कारसेवक बनाम शिवसैनिक
सेना और संघ का टकराव क्या गुल खिलाएगा?
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2010-02-03 09:49 UTC
सांप्रदायिकतावाद की तरह ही फासीवाद भी अपने अनुयाइयों को अपना भोजन बना लेता है। यह सभी हिंसक दर्शनों की नियति रहा है। जो हिंसा को बढ़ावा देते हैं, वे खुद उसी हिंसा के श्किार हो जाता है। एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है। जो दूसरे के लिए खाई खोदता है, वह खुद ही उसमें गिर जाता है। हम महाराष्ट्र में यही देख रहे हैं। शिवसेना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वहां मुसलमानों के खिलाफ एकजुट होकर अभियान चलाया करते थे। आज मराठा क्षेत्रवाद के मसले पर वहां वे दोनों एक दूसरे के सामने खड़े हैं।