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भारत

क्या यही देश की प्राथमिकताएं हैं

अगंभीर दलों वाला देश वास्तविक महाशक्ति नहीं बन सकता
अवधेश कुमार - 2009-12-19 11:45 UTC
इस समय यदि बाहर से कोई भारत की सुर्खियों पर नजर दौड़ाए तो देश के बारे में उसके अंतर्मन में समग्र तस्वीर कैसी बनेगी? वास्तव में देश के अंदर और देश के बाहर भारत की बिल्कुल परस्पर विरोधी और बेमेल तस्वीर नजर आती है। हम इस बात पर तो आत्ममुग्ध हो सकते हैं कि इन दिनों दुनिया के विकसित देश भारत को अकल्पनीय महत्व दे रहे हैं।

कांग्रेस के 125 साल: उत्सव पर तेलंगना की छाया

कल्याणी शंकर - 2009-12-18 13:12 UTC
कांग्रेस के 125 पूरे हो रहे हैं। अपने 125 वें वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए यह उत्सव के मूड में है। आगामी सप्ताह से उत्सव की शुरुआत होनी है, लेकिन उत्सव के इस माहौल पर तेलंगाना संकट की छाया पड़ रही है। 9 दिसंबर की मध्यरात्रि को तेलंगना नाम के नये राज्य की घोषणा करके कांग्रेस जिस संकट में फंस गई है, उससे निकलने के लिए उसके पास फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है।

महिला आरक्षण विधेयक अगले बजट सत्र तक के लिए टला

एस एन वर्मा - 2009-12-17 12:44 UTC
नई दिल्ली। बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक इस साल भी संसद में पारित नही हो सका। लेकिन इतना जरूर हुआ कि इस विधेयक पर गठित संसद की स्थायी समिति ने इसे मूल रूप में ही संसद में पेश करने की सिफारिश कर दी है। अब इस विधेयक में कोई बदलाव करने की संभावना नहीं रह गयी है।
भारत

आंध्र प्रदेश का संकट

मुश्किल में है कांग्रेस
एस सेतुरमण - 2009-12-17 12:11 UTC
सोनिया गांधी और उनके खास लोगों ने मिलकर 9 दिसंबर की रात को तेलंगना के गठन का जो निर्णय लिया, उसके कारण कांग्रेस आंध्र प्रदेश में गंभीर संकट में फंस गई है। आंध्र प्रदेश का कांग्रेस के लिए खास महत्व है। देश का यही एकमात्र बड़ राज्य है, जहां कांग्रेस अपने बूते सत्ता में है।
भारत

उत्तर प्रदेश के विभाजन की राजनीति

आखिर मायावती चाहती क्या हैं?
उपेन्द्र प्रसाद - 2009-12-16 11:34 UTC
जब केन्द्र सरकार ने आंध्र प्रदेश को विभाजित कर तेलंगाना के गठन पर अपनी सहमति दी, तो अन्य अनेक राज्यों के गठन की मांग की जाने लगी। अलग राज्य की मांग आमतौर पर वे लोग ही कर रहे हैं, जो विपक्ष में हैं। अलग राज्य की मांग करने वालों के बीच मायावती का चेहरा बिल्कुल अलग है।
भारत

उत्तर प्रदेश में छोटे राज्यों की राजनीति

सभी पार्टियां अपने हिसाब से सक्रिय
प्रदीप कपूर - 2009-12-15 11:52 UTC
लखनऊः केन्द्र सरकार की तेलंगाना के गठन पर सहमति के बाद उत्तर प्रदेश में राज्य के विभाजन पर राजनीति तेज हो गई है। इस राजनीति की शुरुआत खुद मुख्यमंत्री मायावती ने की। उन्होंने प्रदेश के विभाजन के लिए प्रधानमंत्री को दो पत्र लिख डाले। पहले पत्र में उन्होंने बुन्देलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गठन की मांग की और दूसरे पत्र में उन्होंने पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग कर दी। उन्होंने राज्य के पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए केन्द्र सरकार से 80 हजार करोड़ रुपये की मांग भी की है।
भारत: आन्ध्र प्रदेश

तेलंगाना पर उलझन में है सरकार

केन्द्र को जल्द ही कोई निर्णय लेना होगा
कल्याणी शंकर - 2009-12-14 09:09 UTC
लगता है तेलंगाना मसले पर केन्द्र ने एक कदम आगे और दो कदम पीछे की रणनीति अपना रखी है। अलग राज्य के गठन परद सहमति जताकर अब वह चुप बैठ गई लगती हैए क्योंकि उसके उस निर्णय के बाद आंध्र प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश भर में तूफान मच गया है।
भारत

छोटे राज्यों के बड़े खतरे

हमें झारखंड से सीख लेनी चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2009-12-12 10:05 UTC
तेलंगना राज्य के गठन की मांग को केन्द्र सरकार द्वारा मान लिए जाने के बाद पूरे देश भर में राज्यों के विभाजन की उठ रही मांग अप्रत्याशित नहीं है। यह मांग निश्चय ही हमारे देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता का विषय केन्द्र द्वारा तेलंगाना की मांग को मान लेने में दिखाई गई जल्दबाजी है।
भारत

अन्य राज्यों से भी पृथक प्रदेश की मांग जोर पकड़ने से केंद्र सरकार दुविधा में

एस एन वर्मा - 2009-12-11 12:18 UTC
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश से पृथक तेलांगना राज्य की मांग पर केंद्र सरकार दुविधा में पड़ गयी है। कांग्रेस भी इसको लेकर पशोपेस में है। तेलांगना राज्य के विरोध में विधायकों के इस्तीफे से आंध्र प्रदेश सरकार पर खतरा मंडरा गया है। वहीं देश के अन्य राज्यों से पृथक प्रदेश की मांग जोर पकड़ रही है।
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करुणानीधि के रिटायरमेंट का मामला

स्टालिन की ताजपोशी आसान नहीं होगी
कल्याणी शंकर - 2009-12-11 11:12 UTC
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्तमान लोकसभा के कार्यकाल की समाप्ति पर राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। लालकृष्ण आडवाणी भी किसी भी दिन अपने राजनैतिक जीवन की समाप्ति की घोषणा कर सकते हैं। माकपा नेता ज्योति बसु और भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी पहले सक ही राजनैतिक रूप से सक्रिय नहीं हैं।
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