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अवहट्ट

अवहट्ट का शाब्दिक अर्थ है अपभ्रष्ट जो जनमानस में प्रचलित किसी भाषा विशेष के बदले हुए स्वरुप को अभिव्यक्त करता है। अवहट्ट को जनसाधारण आसानी से समझ सकती थी इसलिए विद्यापति समेत कई विद्वानों ने अवहट्ट भाषा का प्रयोग अपने साहित्य में किया है।

इस सम्बंध में कुछ विद्वानों का मत है कि अवहट्ट आधुनिक भाषाओं के पूर्व का स्वरुप थी, परन्तु कुछ तो इसे अपभ्रंश ही मानने के पक्ष में हैं। विद्वानों में इस बात पर भी मतभेद बना हुआ है कि अवहट्ट और अपभ्रष्ट भाषाएं दो अलग-अलग भाषाएं थीं या एक।


Page last modified on Friday January 17, 2014 06:34:58 GMT-0000