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आत्मविघटन

आत्मविघटन मनोविज्ञान का शब्द है। यह व्यक्ति कि एक मनोदशा है जिसमें वह किसी आन्तरिक द्वंद्व में फंसा होता है।

इसमें व्यक्ति स्वयं के बारे में सोचता है कि वह कैसा है या उसका रास्ता कैसा है आदि। अच्छे और बुरे के बीच के द्वंद्व में वह तब तक फंसा रहता है जबतक वह किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच जाता। तब जाकर उसकी बेचैनी समाप्त होती है तथा वह निर्णित मार्ग पर आगे बढ़ता है।

यह स्थिति व्यक्ति के लिए अच्छी भी हो सकती है तथा बुरी भी, जो इस बात पर निर्भर करता है कि निर्णित मार्ग अच्छा है या बुरा।

अनेक संत तथा व्यक्ति आत्मनिरीक्षण के बाद अच्छे मार्ग पर चलते हुए महान हो गये जबकि अनेक अन्य बुरे मार्ग को चुनकर स्वयं का विनाश कर बैठे। एक के अच्छे मार्ग ने सारी बेचैनियों और मानसिक व्याधियों से मुक्ति दे दी तथा दूसरे के गलत मार्ग ने बेचैनियां तथा मानसिक व्याधियां बढ़ा दीं।



Page last modified on Sunday July 13, 2014 16:52:45 GMT-0000