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आद्यतत्व

आद्यतत्व का सामान्य अर्थ है वह तत्व जो आदिकाल का है। आध्यात्म में आद्यतत्व को जगत् का आदि कारण बताया गया इस प्रकार ईश्वर को ही आद्यतत्व मान लिया गया।

परन्तु आध्यात्म में ही एक ग्रंथ है कौलिकार्चन दीपिका। यह कौल दर्शन और अर्चन पद्धति, जो एक तांत्रिक पद्धति है, की पुस्तक है। उसमें पांच आद्यतत्वों का नाम आया है।

उसके अनुसार पहला आद्यतत्व है विजया, अर्थात् भांग। इसे आद्यमद्य भी कहा गया।

दूसरा है अदरक। इसे मांस माना गया और आद्यशुद्धि कहा गया।

तीसरा है जम्बीर। इसे आद्यमीन कहा गया।

चौथा है धान्यज (धान की खील जो उसे भूनकर तैयार की जाती है)। इसे आद्यमुद्रा माना गया।

चौथा है साधक की विवाहिता पत्नी। इसे आद्याशक्ति कहा गया।

समझा जाता है कि तंत्र साहित्य में पंचमकार के स्थान पर वैष्णवों के प्रभाव से वैष्णव तंत्र साहित्य की रचना हुई जिसकी यह वैकल्पिक व्यवस्था है।

Page last modified on Tuesday July 15, 2014 07:18:12 GMT-0000