आद्याशक्ति
सनातन या हिन्दू धर्म में देवी दुर्गा को आद्याशक्ति माना जाता है। परन्तु तन्त्र साधना में आद्याशक्ति साधक की विवाहित पत्नी को माना जाता है, जो मैथुन के अनुष्ठान में एकमात्र सहधर्मिणी बनकर साधक का साथ दे।परन्तु कुछ विशेष परिस्थितियां भी होती हैं जब स्वपरिणीता पत्नी इस अनुष्ठान की अधिकारिणी नहीं रह जाती है। इस स्थिति में साधक किसी भी अन्य स्त्री के साथ मैथुन का तांत्रिक अनुष्ठान कर सकता है। उस समय वह अन्य स्त्री भी आद्याशक्ति मानी जाती है।
ऐसी भी स्थिति हो सकती है कि साधक की अपनी पत्नी न हो। वैसी स्थिति में वह अविवाहित या विधुर साधक भी किसी स्त्री के साथ मैथुन का तांत्रिक अनुष्ठान कर सकता है। तब वह स्त्री भी आद्याशक्ति कहलाती है।
स्त्री में तान्त्रिक साधना में साधक को साथ दे सकने की योग्यता होनी चाहिए तभी वह आद्याशक्ति के रूप में स्वीकार्य होती है।