इड
इड आधुनिक मनोविज्ञान का एक शब्द है, जो जर्मन भाषा से निकला। फ्रायड ने सर्वप्रथम इस शब्द का उपयोग अपने मनोवैज्ञानिक विश्लेषणों में किया।फ्रायड के अनुसार मानव का जन्मजात नैसर्गिक पक्ष ही इड है। यह कामशक्ति (लिबिडो) का कोष है। वंशानुक्रम से प्राप्त मानव की सभी प्रवृत्तियां इसी में अवस्थित हैं। इस प्रकार यह मानव के मूल प्रवृत्तियों का कोष है।
इड केवल सुख की इच्छा से ही संचालित होता है। यह अच्छे-बुरे के पचड़े में नहीं पड़ता। यह कामरूप है। इमें कोई निषेध, कोई नियंत्रण या कोई वर्जना नहीं होती।
मनुष्य का यही प्रमुख तथा प्रारम्भिक रूप है।
मन का यह पक्ष नहीं जानता कि नैतिक क्या है और अनैतिक क्या, अच्छा क्या है और बुरा क्या, आदि। काम की तृप्ति ही इसका मूल ध्येय है तथा उससे श्रेष्ठ या अनुकरणीय यह किसी को नहीं मानता।
यह संस्कृत में तामस प्रवृत्ति कही जाती है।