कंथा
कंथा जोगियों या योगियों के बारह भेषों में से एक है। ऐसे जोगी गेरुए रंग की सुजनी या चोलना अपने गले में डाल लेते हैं जिससे उनके अंग ढक जाते हैं।गुदड़ी सम्प्रदाय में इसे ही गुदरी या गुदड़ी कहते हैं। उनकी गुदड़ी आवश्यक नहीं कि गेरुए रंग की हो। वह भांति-भांति के रंगों के पुराने कपड़ों के चिथड़ों से बनी होती है।
इस सम्प्रदाय को जोगियों या साधुओं के लिए नियम यह है कि वे गृहस्थों को परेशान न करें और उनसे उनके घर से पुराने वस्त्र भी भिक्षा के रूप में न मांगें। गृहस्थ जो फटे-पुराने कपड़ों और चिथड़ों को बाहर सड़क आदि में फेंक देते हैं, उन्हें ही ये जोगी उठायें तथा उनको ही स्वयं सिलकर कंथा बना लें।
जोगियों की वेशभूषा के लिए निर्धारित 12 महत्वपूर्ण वस्तुओं में कंथा का बड़ा महत्व है।