कपाली
कपाली शब्द की उत्पत्ति कापालिक से हुई है। ये एक प्रकार के योगी हैं। जो योगी 'क' नामक महासुख के बीज को पालते हैं उन्हें कपाली या कापालिक कहा जाता है। यही कारण है कि डोम्बी के साधक को भी कपाली कहते हैं।चर्यापदों में कपाली या कापालिक का उल्लेख हुआ है जिसमें चर्याधर को ही कापालिक या कपाली कहा गया है।
मनुष्य की खोपड़ी को भी कपाल कहते हैं इसलिए खोपड़ी या खप्परधारी योगी भी कपाली या कापालिक कहे जाते हैं। उनकी साधना पद्धति में कपाल धारण करने का एक विशेष महत्व होता है।