कामना पूर्ति
कामना पूर्ति का सामान्य अर्थ है कामनाओं की पूर्ति करना। परन्तु मनोविज्ञान में इसका प्रयोग एक विशिष्ट अर्थ में किया जाता है। कोई व्यक्ति जब वास्तविक जीवन में अपनी कामनाओं की पूर्ति नहीं कर पाता है तो वह उसकी पूर्ति अन्य तरीकों से करता है। उदाहरण के लिए, प्रेम की पूर्ति वास्तविक जगत में न होने पर प्रेम काव्य में डूबकर इसकी कमी को पूरा करना।ऐसी मनोवैज्ञानिक कामना पूर्ति के असंख्य तरीके या स्वरूप हो सकते हैं। आदर्श की कल्पना, स्वप्नावस्था में, या उसे अन्य लेखन आदि में प्रकट करते हुए भी ऐसा किया जाता है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक फ्रायड ने विश फुलफिलमेंट नाम से इसी कामना पूर्ति का उल्लेख किया है। उनके अनुसार यह आवश्यक नहीं कि व्यक्ति में कामना पूर्ति का विचार प्रकट रूप से हो ही। कामना पूर्ति की इच्छा अवचेतन में भी रह सकती है, जो दमित कामनाएं होती हैं, और इन दमित कामनाओं की पूर्ति व्यक्ति येन केन प्रकारेण करता है।
स्वप्नों पर विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि स्वप्नों की गुप्त अन्तर्वस्तु ऐसी ही कामनाएं होती हैं।
उनके अनुसार काव्य, कथा साहित्य, नाटक, चित्रकला आदि के माध्यम से रचनाकार भी ऐसी ही मनोवैज्ञानिक कामना पूर्ति करते हैं।
उन्होंने ऐसी मनोवैज्ञानिक कामना पूर्ति से उत्पन्न मनोवैज्ञानिक व्याधियों का भी उल्लेख किया और ऐसे रोगियों की चिकित्सा की आवश्यकता बतायी।
उन्होंने कहा कि ऐसी मनोवैज्ञानिक दशा में व्यक्ति सोचने लगता है कि स्थिति बदलेगी और वैसी ही हो जायेगी जैसा वह व्यक्ति कामना करता है। उसे वह कई बार प्रकट भी करता है और अपनी सोच के विपरीत तथ्यों या धारणाओं को अस्वीकार कर देता है।