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कारणमाला

कारणमाला या गुम्फ साहित्य में एक श्रृंखलामूलक अर्थालंकार है। इसमें वर्णित चीजों में परस्पर कार्य-कारण-भाव का सम्बंध होता है।

ऐसा दो प्रकार से किया जाता है। पहला तो पूर्व वर्णित पदार्थों में उत्तरोत्तर कारण उपस्थित किया जाता है और दूसरा उत्तरोत्तर वर्णित पदार्थ का कारण पूर्व में उपस्थित किया जाता है।

तुलसीदास के दोहे में इसका उदाहरण देखें -
बिनु बिस्वास भगति नहिं, तेहि बिनु द्रवहिं न राम।
राम कृपा बिनु सपनेहुं, जीव न लह विश्राम।


Page last modified on Thursday August 21, 2014 07:44:48 GMT-0000